पार्षद कमलेश कालरा बच गए, OBC होने के मूल दस्तावेज नहीं, IAS कुमार ने दी क्लीन चिट
विधायक मालिनी गौड़ के खास समर्थक और कुछ समय पहले जीतू यादव कांड से चर्चा में आए पार्षद कमलेश कालरा की पार्षदी पर फिलहाल खतरा टल गया है। इस मामले में राज्य शासन पिछड़ा वर्ग उच्च स्तरीय छानबीन समिति प्रमुख सचिव डॉ. ई रमेश कुमार ने मूल दस्तावेज नहीं होने के बाद भी क्लीन चिट दे दी है।
हाईकोर्ट ने यह केस खत्म किया, लेकिन यह दी छूट
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छानबीन समिति ने इस तरह कालरा का किया बचाव
छानबीन समिति ने इस मामले में कलेक्टोरेट से मूल दस्तावेज की फाइल मांगी थी। लेकिन यह मूल दस्तावेज है ही नहीं। कलेक्टोरेट से केवल यह बताया गया कि मूल दस्तावेज नहीं है। लेकिन साल 2009 में उनके लोहार जाति का ओबीसी सर्टिफिकेट जारी हुआ है, जो पंजी में दर्ज है। इसके बाद ई रमेश कुमार ने रिपोर्ट में यह लिखा है कि- समिति के सामने शिकायतकर्ता गोपाल कोडवानी, सुनील यादव द्वारा ऐसे कोई तथ्य, दस्तावेज पेश नहीं किए गए जिससे कि सक्षम प्राधिकारी द्वारा जारी जाति प्रमाण पत्र 9 नवंबर 2009 को निरस्त करने की आवश्यकता हो। इसलिए समिति इस प्रमाणपत्र में किसी प्रकार का हस्तक्षेप नहीं करने का निर्णय लेते हुए प्रकरण को इसी स्तर पर समाप्त किया जाता है।
कालरा ने बताया जीत
इसके बाद कालरा ने कहा कि हमेशा सच्चाई और ईमानदारी से जनता की सेवा करता रहूंगा। समाज का विश्वास मेरी ताकत है। समर्थकों ने कहा कि यह फैसला उन लोगों के लिए तमाचा है जो समाज के सेवकों के खिलाफ साजिश रचते हैं।
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बाकी कार्यकाल भी निकल जाएगा
कालरा के सर्टिफिकेट का विवाद उनके चुनाव जीतने के बाद से ही चल रहा है। इसमें लगी याचिकाओं में ढाई साल में यह केस यहां तक पहुंचा है। फिर याचिकाएं भी लगती है तो भी समय लगेगा। नगर निगम का कार्यकाल जुलाई 2027 तक है, ऐसे में संभावना यही है कि कालरा अपना कार्यकाल पूरा कर ही लेंगे।
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