केन-बेतवा आंदोलन: आदिवासी किसानों की गिरफ्तारी पर बढ़ा तनाव, विधायक विक्रांत भूरिया बैठे धरने पर
News in Short
- आदिवासी किसानों ने पन्ना में धरना शुरू किया।
- विक्रांत भूरिया आंदोलन में खुद शामिल हुए।
- गिरफ्तारी और पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी।
- जमीन के बदले जमीन की मांग तेज।
- प्रशासन ने रैली और प्रदर्शन पर रोक लगाई।
News in Detail
पन्ना जिले में केन-बेतवा परियोजना को लेकर तनाव बढ़ गया है। जमीन और घर खोने के डर से आदिवासी किसान सड़क पर उतर आए हैं। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर और ग्रामीणों की गिरफ्तारी के विरोध में सैकड़ों लोग एसपी कार्यालय के बाहर धरने पर बैठे हैं। कांग्रेस विधायक विक्रांत भूरिया भी प्रदर्शन में शामिल हुए और सरकार से जमीन, मुआवजा और न्याय की मांग उठाई।
पन्ना में बढ़ा विरोध
पन्ना जिले में विरोध अब खुलकर सामने आ गया है। केन-बेतवा आंदोलन (Ken-Betwa Movement) से जुड़ा असंतोष तेज हुआ। आदिवासी किसान (Tribal Farmers) बड़ी संख्या में जुटे। वे अपनी जमीन, जल और जंगल बचाने निकले। एसपी कार्यालय के बाहर धरना शुरू किया गया। माहौल कई घंटों तक तनावपूर्ण बना रहा। लोगों में भारी नाराजगी साफ दिखी।
धरने पर बैठे विधायक
झाबुआ विधायक विक्रांत भूरिया (Vikrant Bhuria) आंदोलन में पहुंचे। उन्होंने धरने को खुला समर्थन दिया। वे ग्रामीणों के साथ जमीन पर बैठे। शाम चार बजे से विरोध जारी रहा। धरना करीब तीन घंटे तक चलता रहा। इससे कांग्रेस का राजनीतिक संदेश भी साफ गया। पार्टी ने आदिवासी मुद्दे पर सरकार को घेरा।
भूरिया ने सरकार को घेरा
विक्रांत भूरिया ने सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर अन्याय हो रहा। उनके मुताबिक लाखों पेड़ काटे जा रहे हैं। हजारों परिवार बेघर होने की कगार पर हैं। उन्होंने रात की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। उनका कहना है कि अंधेरे में दबिश अन्यायपूर्ण है। उन्होंने जमीन के बदले जमीन (Land for Land) की मांग दोहराई।
गिरफ्तारी से भड़का आक्रोश
आंदोलन की सबसे बड़ी वजह गिरफ्तारी बनी। सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को हिरासत में लिया गया। कुछ ग्रामीणों को भी पुलिस ने पकड़ा। इसके बाद गुस्सा तेजी से बढ़ा। प्रदर्शनकारियों ने कार्रवाई को दमन बताया। उनका कहना है कि आवाज दबाई जा रही। इसी मुद्दे ने धरने को बड़ा रूप दिया।
पुलिस पर लगे आरोप
ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। दिव्या आदिवासी ने कई आरोप लगाए। उनका कहना है कि रात तीन बजे दबिश दी गई। महिला पुलिस बल साथ नहीं था। महिलाओं से बदसलूकी की बात भी कही गई। कुछ लोगों ने मारपीट का आरोप लगाया।
परियोजना पर बड़ा सवाल
केन-बेतवा लिंक और रुंझ परियोजना को लेकर चिंता है। ग्रामीणों का कहना है कि विकास असमान नहीं होना चाहिए। उनके अनुसार हजारों परिवार प्रभावित होंगे। कई घर और खेत डूब क्षेत्र में आएंगे। जंगल और आजीविका पर भी असर पड़ेगा। यही वजह है कि विरोध गहरा हुआ।
प्रशासन ने रोकी रैली
आंदोलन बढ़ने पर प्रशासन सतर्क हो गया। पन्ना नगर में कई स्थानों पर रोक लगाई गई। रैली, पदयात्रा और प्रदर्शन पर पाबंदी घोषित हुई। एसडीएम के आदेश के बाद यह कदम उठाया गया। प्रशासन का तर्क शांति व्यवस्था बनाए रखना है। साथ ही सरकारी कामकाज प्रभावित होने की बात कही गई। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी पीछे हटने को तैयार नहीं।
एसपी दफ्तर पर तनाव
एसपी कार्यालय (Panna SP Office) के बाहर भारी पुलिस बल तैनात रहा। दूसरी ओर आदिवासी अपने पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ डटे रहे। नारेबाजी लगातार जारी रही। प्रदर्शन शांतिपूर्ण लेकिन दृढ़ दिखाई दिया। ग्रामीणों ने साफ कहा कि वे नहीं हटेंगे। उनका कहना है कि एसपी खुद आकर बात करें। इस रुख ने गतिरोध को और लंबा कर दिया।
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