जबलपुर क्रूज हादसे पर हाईकोर्ट में PIL, जांच सहित पूरे एमपी में क्रूज-बोट सेवाएं बंद करने की मांग
Neel Tiwari | May 08, 2026, 07:20 IST
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बरगी बांध में हुए दर्दनाक क्रूज हादसे का मामला अब मध्य प्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। PIL के जरिए इसे राज्य सरकार की विफलता बताया गया है। जनहित याचिका में आरोप लगाया गया है कि लापरवाही और सुरक्षा नियमों के उल्लंघन के कारण 13 लोगों की जान गई।
News In Short
- बरगी क्रूज हादसे को लेकर हाई कोर्ट में जनहित याचिका दायर की गई है।
- पूरे मध्य प्रदेश में क्रूज और बोट सेवाएं बंद करने की मांग की गई है।
- 13 मौतों को राज्य सरकार की विफलता बताया है, जांच की मांग की गई है।
- मौसम अलर्ट के बावजूद क्रूज संचालन जारी रखने का आरोप लगाया गया है।
- जिला अदालत पहले ही एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दे चुकी है
News in detail
सिर्फ FIR पर नहीं होगी इतिश्री, अब हाईकोर्ट करेगा सुनवाई
याचिका में दावा किया गया है कि सुरक्षा मानकों की लगातार अनदेखी और प्रशासनिक लापरवाही के कारण यह बड़ा हादसा हुआ। इस मामले के हाईकोर्ट पहुंचने से यह तय हो गया है कि, छोटे कर्मचारियों पर कार्यवाही कर इस मामले को खत्म नहीं किया जा सकेगा। हाईकोर्ट में सुनवाई होने के बाद जांच का दायरा बढ़ाना तय है।
भोपाल के सामाजिक कार्यकर्ता ने लगाई याचिका
याचिका में राज्य शासन, केंद्र सरकार की मिनिस्ट्री ऑफ पोर्ट्स, शिपिंग एंड वॉटरवेज, एमपी टूरिज्म बोर्ड को प्रतिवादी बनाया गया है। साथ ही
इनलैंड वॉटरवेज अथॉरिटी ऑफ इंडिया, नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, कलेक्टर जबलपुर और पुलिस अधीक्षक समेत आठ पक्षों को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
29 टिकट, लेकिन 40 से ज्यादा लोग सवार
रिकॉर्ड में केवल 29 टिकट जारी होने की बात सामने आई, लेकिन हादसे के बाद मृतकों और बचाए गए लोगों की संख्या मिलाकर आंकड़ा 41 तक पहुंच गया। याचिकाकर्ता ने इसे सीधे तौर पर सुरक्षा नियमों का उल्लंघन बताया है।
हादसा नहीं, प्रशासनिक विफलता
सुरक्षा नियमों का पालन किया जाता तो कई लोगों की जान बचाई जा सकती थी। याचिका में इस हादसे को राज्य सरकार की विफलता बताया गया है।
मौसम विभाग के अलर्ट की अनदेखी
आरोप है कि तेज हवाओं और ऊंची लहरों के बीच भी पर्यटकों को सफर कराया गया था। इतना ही नहीं यात्रियों को यात्रा शुरू होने से पहले पर्याप्त लाइफ जैकेट भी उपलब्ध नहीं कराए गए थे।
पानी भरने लगा तब याद आई सुरक्षा
दो साल बाद भी नहीं बने Inland Vessels Act के नियम
याचिकाकर्ता का कहना है कि इसी कारण जल पर्यटन संचालन में जवाबदेही और सुरक्षा मानकों की कमी बनी हुई है। बरगी बांध क्षेत्र घोषित वेटलैंड श्रेणी में आता है।
नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT), भोपाल ने 12 सितंबर 2023 को एक आदेश पारित किया था। इस आदेश में कई वेटलैंड क्षेत्रों में मोटर चालित क्रूज और नाव संचालन पर रोक लगाने के निर्देश दिए थे।
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने भी 4 मार्च 2024 को मध्य प्रदेश पर्यटन विकास निगम की अपील खारिज करते हुए NGT के आदेश को बरकरार रखा था।
बिना वैधानिक अनुमति के चल रहा था क्रूज
यह जनहित याचिका हाईकोर्ट में लिस्ट हो चुकी है। इसकी सुनवाई 11 मई 2026 को होने की संभावना है।
जिला अदालत दे चुकी एफआईआर के निर्देश
सरकार ने बनाई हाई लेवल जांच कमेटी
हालांकि इस जांच पर भी खानापूर्ति के आरोप लगा चुके हैं। मामला हाई कोर्ट पहुंचने के बाद यह तय है कि कोई भी जिम्मेदार अपनी जवाबदारी से अब बच नहीं सकेगा। अब सभी की नजर हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और जांच रिपोर्ट पर टिकी हुई है।
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