केन-बेतवा परियोजना: आदिवासी गांव में मुस्लिम परिवार को मुआवजा, सिंघार का आरोप
समझें क्या है पूरा मामला
- उमंग सिंघार ने केन-बेतवा परियोजना पर सवाल उठाए।
- सिंघार ने मुआवजा वितरण में गड़बड़ी के आरोप लगाए।
- सिंघार ने मुस्लिम परिवार को भुगतान का दावा किया।
- सिंघार ने छतरपुर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए।
- स्वतंत्र जांच की मांग नेता प्रतिपक्ष ने की।
कंपनी ने दिया 60 करोड़ चंदा
भोपाल में सिंघार ने कहा कि परियोजना बना रही नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी ने भाजपा को चंदा दिया। यह चंदा इलेक्टोरल बॉन्ड के जरिए 60 करोड़ रुपए का बताया गया है। सिंघार का कहना है कि इसीलिए सरकार कंपनी के हित में काम कर रही है। प्रभावित आदिवासियों और किसानों की शिकायतें नजरअंदाज हो रही हैं। उन्होंने पूरे मामले की स्वतंत्र जांच और सोशल ऑडिट की मांग की।
बुजुर्ग महिलाओं से मारपीट का आरोप
सिंघार ने बताया कि 14 जुलाई को उन्होंने पन्ना और छतरपुर के प्रभावित गांवों का दौरा किया। कूपी गांव में वे करीब पांच से सात घंटे विस्थापित परिवारों के बीच रहे। उनका आरोप है कि आंदोलन कर रहे आदिवासियों और किसानों पर पुलिस ने लाठीचार्ज किया।
सिंघार का कहना है कि 80 साल तक की बुजुर्ग महिलाओं के साथ भी मारपीट हुई। कई महिलाओं ने उन्हें पुलिस कार्रवाई की आपबीती सुनाई। उन्होंने सवाल उठाया कि सरकार कंपनी के लिए आदिवासियों पर इतनी सख्ती क्यों कर रही है।
ग्राम सभा की अनुमति नहीं ली गई
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि जमीन अधिग्रहण से पहले ग्राम सभाओं की अनुमति नहीं ली गई। उनका दावा है कि कई गांवों में ग्राम सभाएं हुईं ही नहीं। फिर भी रिकॉर्ड में उनकी कार्यवाही दर्ज कर दी गई। एक ग्राम पंचायत में सरपंच की जगह किसी और के हस्ताक्षर कर दिए गए। सिंघार ने कहा कि यह पूरी प्रक्रिया कानून के खिलाफ है।
मुस्लिम परिवार को मुआवजा कैसे मिला
सिंघार ने खरिहानी गांव का उदाहरण दिया। यहां 11 करोड़ रुपए का मुआवजा स्वीकृत हुआ था। इसमें से आठ करोड़ रुपए ऐसे लोगों को दिए गए, जिन्होंने 1980 से 1990 के बीच गांव छोड़ दिया था। सिंघार का कहना है कि इस आदिवासी गांव में कोई मुस्लिम परिवार रहता ही नहीं। उनके मुताबिक फिर यह राशि मुस्लिम परिवार के खाते में कैसे पहुंची, यह जांच का विषय है। उन्होंने छतरपुर कलेक्टर की भूमिका पर भी सवाल उठाया।
जमीन दूसरे के नाम, महिला परेशान
सिंघार ने सुखवा गांव की एक बुजुर्ग आदिवासी महिला का मामला भी उठाया। उनका आरोप है कि महिला की जमीन राजस्व रिकॉर्ड में किसी और के नाम दर्ज हो गई। मामला अदालत में लंबित होने के बावजूद मुआवजा दूसरे व्यक्ति को मिल गया। सिंघार ने पूछा कि ऐसी महिला को अब न्याय कैसे मिलेगा।
वसूली और दस्तावेज जब्त करने का आरोप
नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाया कि आंदोलन में शामिल लोगों से पुलिस ने वसूली की। उनके मुताबिक हिरासत में लिए गए लोगों से 20 से 30 हजार रुपए तक लिए गए। मोबाइल फोन, वाहन और जमीन के दस्तावेज भी जब्त किए गए। सिंघार का आरोप है कि यह कानूनी लड़ाई रोकने के लिए किया गया।
सोशल ऑडिट की मांग खारिज
सिंघार ने बताया कि उन्होंने सोशल ऑडिट कमेटी बनाने का सुझाव दिया था। इसमें प्रभावित परिवार, प्रतिनिधि और वकील शामिल होते। लेकिन प्रशासन इसके लिए तैयार नहीं हुआ। उन्होंने मुख्यमंत्री और मुख्य सचिव से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है। उनका कहना है कि अगर सरकार के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं तो जांच में आपत्ति क्यों।
आदिवासी अब भी जल सत्याग्रह पर
पन्ना जिले में केन-बेतवा परियोजना के अलावा मझगांय, रूंझ, नेगुवा और एनटीपीसी (NTPC – National Thermal Power Corporation) परियोजनाओं से विस्थापित लोग भी सत्याग्रह पर हैं। प्रदर्शनकारी उचित मुआवजा और पुनर्वास की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि जब तक मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन जारी रहेगा।
जय किसान संगठन के बैनर तले सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर के नेतृत्व में आमरण अनशन और मिट्टी सत्याग्रह भी चल रहा है। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास दे। वरना जल सत्याग्रह में उनकी जान जाने दे।
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