केन-बेतवा प्रोजेक्ट के विरोध में अनशन तेज, महिलाओं ने शुरू की चूल्हाबंदी
समझें क्या है पूरा मामला...
- छतरपुर में केन-बेतवा प्रोजेक्ट का विरोध लगातार बढ़ रहा है।
- प्रभावित ग्रामीणों ने चूल्हाबंदी आंदोलन शुरू कर दिया है।
- अमित भटनागर का आमरण अनशन 17वें दिन जारी है।
- अमित भटनागर जिला अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं।
- कार्रवाई के बाद कलेक्टर और एसपी छुट्टी पर गए।
चूल्हाबंदी आंदोलन क्यों शुरू हुआ
20 जुलाई की सुबह कूपी गांव के बराना नदी घाट पर आंदोलन चल रहा था। प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ इसे हटा दिया। अधिकारियों का कहना था कि लगातार बारिश और प्रदर्शनकारियों की बिगड़ती तबीयत के कारण यह कदम उठाया गया। सभी आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया था।
इसके विरोध में प्रभावित गांवों की महिलाओं ने नया रास्ता अपनाया। हर दिन 10 से 20 महिलाएं चूल्हा नहीं जलातीं। यानी वे खुद उपवास रखती हैं। बच्चे, बुजुर्ग, बीमार और गर्भवती महिलाओं को इस उपवास से दूर रखा गया है।
अमित भटनागर से मिलने पर रोक
अमित भटनागर के साथी पवन पटेल ने बताया कि मीडिया, समाजसेवियों और समर्थकों को उनसे मिलने नहीं दिया जा रहा। उन्हें 24 घंटे पुलिस निगरानी में रखा गया है। इससे परिजनों और समर्थकों में नाराजगी है। उनका कहना है कि पारदर्शिता बनाए रखने के लिए मिलने की अनुमति जरूरी है।
क्या बोले सीएमएचओ ?
सीएमएचओ डॉ. आरके गुप्ता ने बताया कि अमित भटनागर को लो ब्लड प्रेशर की शिकायत है। इस वजह से वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। वे ओरल भोजन नहीं ले रहे। उन्हें आईवी फ्लूइड्स के जरिए इलाज दिया जा रहा है। साथ ही वे सिर्फ पानी और जूस ले रहे हैं।
सामाजिक कार्यकर्ताओं की अपील
भटनागर की सेहत को देखते हुए कई बड़े सामाजिक कार्यकर्ताओं ने चिंता जताई है। मेधा पाटकर, प्रफुल्ला समांतरा, सौम्या दत्ता, इंद्रजीत सिंह, अशोक चौधरी, विश्वनाथ तिर्की, कैलाश मीणा, नीलम अहलूवालिया और क्लाइमेट एक्टिविस्ट लोकेश भिवानी ने वीडियो संदेश और ईमेल के जरिए अनशन खत्म करने की अपील की है।
वहीं आदिवासी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रामू टेकाम ने आंदोलन को समर्थन देने की बात कही है। इससे यह मुद्दा राजनीतिक स्तर पर भी चर्चा में आ गया है।
फर्जी ग्रामसभा का दावा
अनशन शुरू होने से एक दिन पहले अमित भटनागर ने बड़ा दावा किया था। उन्होंने केन-बेतवा प्रोजेक्ट से जुड़ी फर्जी ग्राम सभाओं के दस्तावेज सार्वजनिक किए। उनका दावा है कि ये छतरपुर जिले के आधिकारिक रिकॉर्ड हैं। उन्होंने कलेक्टर से इस मामले में प्रशासन का पक्ष स्पष्ट करने की मांग की है।
भटनागर बार-बार कहते रहे हैं कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं है। यह लड़ाई विस्थापितों के अधिकार, पारदर्शिता और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए है। उन्होंने साफ किया है कि मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा।
प्रशासनिक अधिकारी छुट्टी पर
प्रदर्शनकारियों को हटाने की कार्रवाई के बाद छतरपुर कलेक्टर पार्थ जैसवाल सोमवार से छुट्टी पर हैं। एसपी भी कार्रवाई के तुरंत बाद छुट्टी पर चले गए थे। वे बुधवार को वापस लौटे हैं। इससे स्थानीय लोगों में प्रशासन की जवाबदेही को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
फिलहाल स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अमित भटनागर का स्वास्थ्य चिंता का बड़ा विषय है। दूसरी ओर प्रभावित गांवों में विरोध लगातार बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सबकी नजर रहेगी।
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