रनवे पर पसरा सन्नाटा, फिर भी देश का नंबर-1 एयरपोर्ट बना खजुराहो, भोपाल नंबर 3 पर
समझें क्या है पूरा मामला...
- खजुराहो एयरपोर्ट को AAI के सर्वे में देश का सबसे अच्छा एयरपोर्ट चुना गया है।
- हैरानी की बात यह है कि जुलाई और अगस्त में यहां से एक भी फ्लाइट नहीं उड़ रही।
- पहले भी यहां से सिर्फ दो फ्लाइट चलती थीं, दिल्ली और वाराणसी के लिए।
- अब दोनों बंद हो चुकी हैं। अक्टूबर से उड़ानें फिर शुरू हो सकती हैं।
टॉप रैंकिंग की हैरान करने वाली वजह
मध्य प्रदेश के खजुराहो में बना एयरपोर्ट (खजुराहो एयरपोर्ट प्रबंधन) अब चर्चा में है। वजह है भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण, यानी AAI (Airports Authority of India) का ताजा सर्वे। इस सर्वे में खजुराहो एयरपोर्ट को देश का सबसे अच्छा एयरपोर्ट बताया गया है।
यह सर्वे कस्टमर सेटिस्फैक्शन इंडेक्स, यानी CSI (Customer Satisfaction Index) पर आधारित है। इसी सर्वे में हैरान करने वाला तथ्य भी सामने आया है। जुलाई और अगस्त के दौरान इस एयरपोर्ट से एक भी कमर्शियल फ्लाइट संचालित नहीं हो रही है।
इस नतीजे ने एविएशन इंडस्ट्री को भी चौंका दिया है। कई जानकार अब सर्वे के मानदंडों पर सवाल उठा रहे हैं।
पहले भी सुस्त उड़ानों की रफ्तार
जब यहां सेवाएं चालू थीं तब भी हालात बहुत अच्छे नहीं थे। एयरपोर्ट से सिर्फ दो फ्लाइट का संचालन होता था। ये उड़ानें दिल्ली और वाराणसी को जोड़ती थीं। अब दोनों उड़ानें भी बंद कर दी गई हैं।
बता दें कि यह एयरपोर्ट काफी पुराना है। इसका टर्मिनल 1960 के दशक के अंत में बनकर तैयार हुआ था। रिपोर्ट के मुताबिक यहां पहली फ्लाइट 1978 में उतरी थी। इसके बावजूद इस साल के द्विवार्षिक यात्री सर्वे में इसने बड़े और व्यस्त एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ दिया।
यह सम्मान ऐसे समय मिला है जब मानसून के चलते रनवे पूरी तरह शांत पड़ा है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार एयरपोर्ट डायरेक्टर संतोष सिंह ने बताया कि यहां से उड़ानें आमतौर पर दिल्ली और वाराणसी जाती हैं। उन्होंने बताया कि 1 जुलाई से एक भी फ्लाइट नहीं उड़ी है।
उड़ानें कब होंगी फिर शुरू
सेवाएं क्यों निलंबित हुईं इस पर संतोष सिंह ने विस्तार से कुछ नहीं बताया। हालांकि उन्होंने उम्मीद जताई कि दिल्ली और वाराणसी के लिए उड़ानें अक्टूबर से फिर शुरू हो सकती हैं। यात्रियों को अभी कुछ महीने और इंतजार करना होगा।
कैसे तय होती है रैंकिंग
बता दें कि AAI का यह CSI सर्वे स्वतंत्र एजेंसियों से कराया जाता है। इससे निष्पक्षता बनी रहती है। यह सर्वे साल में दो बार होता है, इसलिए इसे द्विवार्षिक कहा जाता है।
इसमें यात्री 33 मुख्य मानकों पर एयरपोर्ट को आंकते हैं। इनमें ग्राउंड ट्रांसपोर्ट, पार्किंग, वाई-फाई और फूड आउटलेट्स जैसे बिंदु शामिल हैं। साफ-सफाई और हाइजीन से जुड़े सवाल भी अलग से पूछे जाते हैं।
इन सभी अंकों को मिलाकर 5 में से एक कंपोजिट रेटिंग तैयार की जाती है। यही रेटिंग तय करती है कि कौन सा एयरपोर्ट किस पायदान पर रहेगा।
खास बात यह है कि इस रेटिंग में उड़ानों की संख्या को सीधे तौर पर नहीं आंका जाता। सर्वे का पूरा फोकस यात्री अनुभव पर रहता है। यही वजह है कि एक छोटा और कम व्यस्त एयरपोर्ट भी बड़े एयरपोर्ट्स को पीछे छोड़ सकता है।
यात्रियों और पर्यटन पर असर
खजुराहो अपने प्राचीन मंदिरों के लिए दुनियाभर में जाना जाता है। यहां हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक आते हैं। ऐसे में हवाई कनेक्टिविटी का बंद होना पर्यटकों के लिए असुविधा खड़ी कर सकता है।
दिल्ली और वाराणसी जैसे बड़े शहरों से सीधी उड़ान न होने पर यात्रियों को सड़क या रेल मार्ग का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे यात्रा में ज्यादा समय भी लग सकता है।
स्थानीय लोगों की मिली-जुली प्रतिक्रिया
इस नतीजे पर कुछ स्थानीय लोगों ने चुटकी भी ली। उनका कहना था कि जिस एयरपोर्ट के रनवे पर सन्नाटा है, उसे टॉप रैंक मिलना अजीब बात है। वहीं कई लोगों ने इस उपलब्धि का स्वागत भी किया। बता दें कि भोपाल का राजा भोज एयरपोर्ट (भोपाल एयरपोर्ट)इस रैंकिंग में तीसरे स्थान पर रहा।
ये खबरें भी पढ़िए...
एयर इंडिया पर लगा 96 हजार का जुर्माना, झूठा बहाना बनाकर री-शेड्यूल की थी फ्लाइट
भोपाल में बनेगा Air India Express का नया बेस, तीन नई फ्लाइट की सौगात
फ्लाइट लेट होने पर हनुमान बेनीवाल का केंद्र पर निशाना, एयर इंडिया ने जताया खेद
इंदौर कलेक्टोरेट का बाबू IAS से सीआर लिखवाने फ्लाइट से गया रीवा