खंडवा में पिपलानी सहकारी समिति घोटाले में करोड़ों डूबे, FIR तक नहीं
News In Short
- खंडवा जिले के पिपलानी की सहकारी समिति में 25 से 30 करोड़ का घोटाला हुआ है।
- समिति ने अच्छे ब्याज का लालच देकर ग्रामीणों से रकम जमा करवाई।
- करीब छह महीने पहले खाताधारकों का बैलेंस अचानक शून्य हो गया।
- कलेक्टर के FIR के आदेश के बाद भी पांच महीने से जांच अधूरी है।
- डूब प्रभावित किसान भी अपनी मुआवजा राशि के लिए दर-दर भटक रहे हैं।
News In Detail
मध्य प्रदेश केखंडवा जिले के किल्लौद ब्लॉक में पिपलानी गांव है। यहां की प्राथमिक कृषि साख सहकारी समिति में हजारों ग्रामीणों ने पैसे जमा किए थे। किसी ने खेतों में मेहनत से कमाई रकम जमा कराई। किसी ने इंदिरा सागर बांध के डूब का मुआवजा यहां सुरक्षित रखा। सबको लगा कि समिति सुरक्षित है। लेकिन आज वही लोग अपनी रकम के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
ब्याज का लालच और करोड़ों का गबन
समिति ने ग्रामीणों को अच्छे ब्याज का सपना दिखाया। इसी लालच में लोगों ने अपनी जिंदगीभर की बचत यहां जमा (पिपलानी सहकारी समिति घोटाला) करा दी। करीब छह महीने पहले खाताधारकों को बड़ा झटका लगा। उनके खातों का बैलेंस अचानक शून्य हो गया था।
जांच में सामने आया कि समिति प्रबंधक ने यह रकम गबन कर ली है। अब तक 15 करोड़ से ज्यादा का गबन सामने आ चुका है। पूरे मामले में 25 से 30 करोड़ रुपए की राशि फंसी बताई जा रही है।
किसान रामबक्श की दर्दभरी कहानी
ग्राम भंवरली के किसान रामबक्श गिन्नारे की कहानी सबसे दुखद है। वे इंदिरा सागर बांध के डूब प्रभावित किसान हैं। उन्हें 2002 और 2004 में डूब का मुआवजा मिला था। यह रकम उन्होंने 2024 में पत्नी जागृति के नाम तीन FD में जमा कराई।
7 लाख, 6.75 लाख और 2 लाख रुपए, यानी कुल 16 लाख रुपए जमा हुए। इसका मतलब है 7.25 फीसदी ब्याज से एक साल में 17 लाख मिलने थे, लेकिन समिति ने जो 10 लाख का चेक दिया, वह भी बाउंस हो गया। अब रामबक्श बैंक और दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।
30 साल पुरानी संस्था में लंबा खेल
यह समिति करीब 30 साल पुरानी बताई जाती है। इस इलाके में ज्यादातर डूब प्रभावित परिवार रहते हैं। इन लोगों ने मुआवजे की रकम इसी समिति में जमा कराई थी। यही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी पूंजी थी। समिति प्रबंधक श्रीराम राजपूत को जांच के दौरान हरसूद में अटैच किया गया है। लेकिन FIR अब तक नहीं हुई है।
कलेक्टर का आदेश, विभाग ने दबाया
जिला कलेक्टर ऋषव गुप्ता ने इस मामले में नाराजगी जाहिर की थी। उन्होंने साफ कहा कि जल्द जांच पूरी कर FIR दर्ज की जाए। यह आदेश सहकारिता विभाग के अधिकारियों को दिया गया था, लेकिन विभाग ने इसे अनसुना कर दिया।
जिला पंजीयक सहकारिता संजय आर्य को जांच सौंपी गई है। पांच महीने से ज्यादा बीत चुके हैं, जांच अभी भी अधूरी है। दोषी पर FIR न होना सबसे बड़ा सवाल है। आखिर किसके दबाव में मामला दबाया जा रहा है?
खाताधारक कलेक्ट्रेट के लगा रहे चक्कर
जब से खातों का बैलेंस शून्य हुआ, खाताधारक परेशान हैं। वे लगातार कलेक्ट्रेट के चक्कर काट रहे हैं। कोई अपने बच्चे की पढ़ाई के लिए जमा रकम मांग रहा है। कोई बीमारी के इलाज के लिए पैसों का इंतजार कर रहा है। जिन लोगों ने मुआवजे की पूरी रकम समिति में लगाई, उनके पास अब कुछ नहीं बचा। यह उनके साथ बहुत बड़ा धोखा हुआ है।
सहकारिता विभाग पर गंभीर सवाल
15 करोड़ से ज्यादा का गबन जांच में साबित हो चुका है। कलेक्टर भी FIR का आदेश दे चुके हैं। इसके बाद भी FIR न होना सहकारिता विभाग की नीयत पर सवाल खड़ा करता है। क्या दोषियों को जानबूझकर बचाया जा रहा है? जब तक FIR नहीं होती, पीड़ित किसानों को न्याय मिलने की उम्मीद बहुत कम है। यह मामला अब जिले की सबसे बड़ी जवाबदेही की परीक्षा बन गया है।
ये खबरें भी पढ़ें...
इलेक्ट्रिसिटी एक्ट-2025 देने वाला है झटका, स्मार्ट मीटर खुद ही बढ़ा देंगे बिजली लोड
एमपी में नहीं लगेंगे स्मार्ट मीटर, गलत रीडिंग की शिकायत और विरोध के बाद फैसला
भोपाल में कांग्रेस का प्रदर्शन, पीसी शर्मा बोले-स्मार्ट मीटर का पाक कनेक्शन
इलेक्ट्रिसिटी बिल से मिलेगा छुटकारा! इस स्मार्ट टेक्नीक से आप खुद तय करेंगे अपना बिजली बिल