40 वनकर्मियों पर भारी पड़े 200 हमलावर, किसी के काटे कान, तो कइयों के फोड़े सिर
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश के खंडवा में 200 अतिक्रमणकारियों ने वनकर्मियों पर हमला किया।
- गोफन (Sling) जैसे हथियारों से पथराव में 10 से अधिक वनकर्मी घायल हुए।
- एक वनकर्मी का कान काटा गया, दूसरे का सिर फोड़ा गया।
- आमाखुजरी इलाके में 100 हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण की जड़ है।
- अधिकारियों का मानना है यह संगठित गिरोह की सोची-समझी रणनीति थी।
खंडवा के जंगल में खूनी हमला
मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में रविवार, 28 जून की सुबह वन विभाग की गुड़ी रेंज एक खौफनाक मंजर का गवाह बनी। सुबह करीब 11 बजे, जब 40 वनकर्मी आमाखुजरी इलाके में अपनी ड्यूटी पर थे, तभी करीब 200 अतिक्रमणकारियों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया।
हमलावरों के हाथ में गोफन (गुलेल) थे। वह एक के बाद एक पत्थर बरसने लगे। देखते ही देखते कई वनकर्मी जमीन पर गिर गए। किसी का कान काट दिया गया, किसी के सिर पर चोट आई। कई कर्मचारियों की वर्दी भी फाड़ दी गई।
कान काटा, सिर फोड़ा
वन रक्षक शैलेंद्र यादव की हालत सबसे गंभीर रही। हमलावरों ने उनका कान काट दिया। ज्वाला सिंह के सिर और गर्दन पर पत्थर मारा गया। नरेंद्र के हाथ में भी चोट आई।
वन रक्षक प्रमोद, रोमांक, ओमप्रकाश पिंडोरे (Omprakash Pindore), राजेश बागड़ी, शैलेंद्र यादव, चंद्रपाल तोमर, राजेंद्र सक्कावत (Rajendra Sakkawat) और सोहन ककचे को लाठियों से बुरी तरह पीटा गया। कुल 10 से अधिक वनकर्मी घायल हुए हैं। दोनों पक्षों के बीच करीब दो घंटे तक संघर्ष चलता रहा।
डेढ़ महीने से जंगल की पहरेदारी
यह लड़ाई अचानक नहीं हुई है। वन रक्षक ओमप्रकाश पिंडोरे, राजेंद्र सक्कावत और चंद्रपाल तोमर पिछले करीब डेढ़ महीने से 23-23 वनकर्मियों का दल बनाकर रात-दिन जंगल में गश्त कर रहे थे।
आमाखुजरी के जंगल में अतिक्रमणकारी धीरे-धीरे जमीन दबाते जा रहे थे। जब वनकर्मियों ने उन्हें रोकने की कोशिश की, तो हमला हो गया।
माइन्स जैसी कीलें, सोची-समझी साजिश
यह हमला कितना सोचा-समझा था, इसका अंदाजा इस बात से लगाइए। वन रक्षकों ने बताया कि अतिक्रमणकारियों ने हमले से पहले ही जंगल के रास्तों पर जाल बिछा दिया था।
जब गश्त दल जंगल में 150 से 200 मीटर अंदर पहुंचा, तो पता चला कि रास्ते में लकड़ी के टुकड़ों और पाइप में बड़ी-बड़ी नुकीली कीलें ठोक दी गई थीं। इन कीलों को इस तरह लगाया गया था कि वाहनों के टायर पंक्चर हो जाएं। गाड़ी अंदर जाए तो बाहर न आ सके।
जंगल में मोबाइल नेटवर्क (Mobile Network) भी नहीं था। इसलिए गाड़ी खराब होने पर वनकर्मी मदद नहीं बुला सकते थे। अधिकारियों का साफ कहना है कि यह आम अतिक्रमणकारियों की हरकत नहीं बल्कि एक संगठित गिरोह की रणनीति जैसी लगती है।
16 हजार हेक्टेयर पर अतिक्रमण
खंडवा जिले में करीब 16 हजार हेक्टेयर वन क्षेत्र पर अतिक्रमण है। इसमें कुमठा-हीरापुर और आमाखुजरी की मिलाकर एक हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन शामिल है।
सिर्फ आमाखुजरी इलाके में ही 100 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जा है। यहां अतिक्रमणकारी लकड़ी और पाइप में कीलें गाड़कर उन्हें जमीन में दबा देते हैं। वन विभाग की गाड़ियां अंदर जाएं, यह उनकी मंशा बिल्कुल नहीं है।
अतिक्रमण मुहिम चलाएगा वन विभाग
प्रभारी सीसीएफ वासु कनौजिया ने कहा कि हमने अलग से टीमें तैनात की है जो इस पर ध्यान दे रही हैं। गश्ती दल को अलर्ट किया है। अतिक्रमण मुहिम चलाकर उनके मंसूबे फेल करेंगे।
अब आगे क्या?
रविवार के हमले के बाद वन विभाग के अधिकारियों में गुस्सा और डर दोनों हैं। कर्मचारियों ने किसी तरह खेत में लेटकर अपनी जान बचाई।
जिले में इतने बड़े पैमाने पर अतिक्रमण और अब वनकर्मियों पर हिंसक हमला, यह सवाल खड़ा करता है कि आखिर 100 हेक्टेयर जंगल जमीन पर किसे मिल रहा है संरक्षण? वन विभाग की आगे की कार्रवाई और पुलिस की भूमिका अब सबकी नजरों में है।
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