खेलो MP में खेल! पुरस्कार राशि में कटौती से भड़का गुस्सा, खिलाड़ी बोले- हमें ठगा गया
News In Short
- खिलाड़ियों को पुरस्कार राशि में बिना सूचना के कटौती हुई।
- डबल्स/मिक्स्ड में राशि आधी करने से असंतोष फैला।
- खिलाड़ियों को पहले पूरी राशि मिलने की जानकारी दी गई थी।
- खेल मंत्री से जवाब न मिलने से विवाद और गहरा हुआ।
- खिलाड़ियों का मनोबल गिरा, भविष्य में कम भागीदारी हो सकती है।
News In Detail
मध्यप्रदेश सरकार के बड़े प्रचारित “खेलो MP यूथ गेम्स” पर अब सवाल खड़े हो रहे हैं। भव्य उद्घाटन, रोशनी और करोड़ों के खर्च के बीच अब खिलाड़ी खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
आरोप है कि खासकर बैडमिंटन जैसे खेलों में घोषित पुरस्कार राशि (prize money) को बिना स्पष्ट जानकारी के आधा-आधा बांट दिया गया, जिससे पूरे प्रदेश में असंतोष फैल गया है।
जहां मंच से बड़े-बड़े वादे हुए, वहीं मैदान में उतरे खिलाड़ियों को कटी हुई रकम मिली, और अब यह मुद्दा सीधे खेल एवं युवा कल्याण विभाग कीकार्यप्रणाली पर सवाल बनकर खड़ा है।
क्या है पूरा मामला
खिलाड़ियों को पहले पूरी राशि मिलने की जानकारी नहीं दी गई। जनसंपर्क वेबसाइट के सर्कुलर में भी कटौती का कोई उल्लेख नहीं है। बाद में ‘नियम’ का हवाला देकर राशि बांटी गई, जबकि कटौती का कोई उल्लेख नहीं है-
- सिंगल्स में पूरी रकम, लेकिन डबल्स/मिक्स्ड में आधी-आधी।
- कई खिलाड़ियों को तय राशि से हजारों रुपये कम मिले।
- गाइडलाइन स्पष्ट नहीं, या बताई ही नहीं गई।
- विभाग और जिला स्तर पर जवाब अलग-अलग।
खिलाड़ियों का गुस्सा...
- अभिनव शर्मा: मैं बॉयज डबल्स में रनर-अप था। मुझे 21,000 रुपए मिलने थे, लेकिन सिर्फ 10,500 रुपए दिए गए। हमें पहले बताया गया था कि पूरी राशि मिलेगी। बाद में बिना बताए आधी कर दी गई। ये सीधे-सीधे खिलाड़ियों के साथ अन्याय है।
- रुद्र प्रताप सिंह: मैं स्टेट में डबल्स और मिक्स्ड दोनों में विजेता रहा। मुझे कुल 62,000 रुपए मिलने थे, लेकिन कटौती कर 31,000 ही दिए गए। जब जीतने के बाद भी पूरा हक न मिले, तो खेलने का क्या मतलब?
पेरेंट्स का दर्द...
लल्लन ठाकुर ने कहा कि मेरे बेटे ने खेलो MP (Khelo MP) में हिस्सा लिया था। हमें जनसंपर्क की वेबसाइट पर जारी सर्कुलर में साफ लिखा मिला था कि विजेताओं को 31,000, 21,000 और 11,000 रुपए दिए जाएंगे। लेकिन जब पैसे मिले तो डबल्स और मिक्स्ड डबल्स में बिना किसी सूचना के आधे-आधे कर दिए गए। ऐसा कहीं भी सर्कुलर में नहीं लिखा था।
अब अधिकारी कह रहे हैं कि ‘नियम के अनुसार हुआ, तो सवाल है- वो नियम कहां लिखा है? किस सर्कुलर में है? अगर पहले ही स्पष्ट कर देते, तो बच्चे उसी हिसाब से उम्मीद रखते। अचानक पैसे काटना सीधा धोखा है। इस तरह की व्यवस्था से बच्चों का मनोबल टूटेगा। अगर शुरुआत में ही भरोसा टूट गया, तो आगे कौन खेलेगा?
विश्वास सारंग: (खेल एवं युवा कल्याण मंत्री)
विभाग का पक्ष (VK Yadav– Joint Director):
जिला खेल अधिकारी का रुख (Joseph Buxla): इस विषय में मैं कुछ नहीं बोलूंगा। चुप्पी ने सवाल और गहरे कर दिए।
सरकार का दावा बनाम जमीनी सच्चाई
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस आयोजन को “ओलंपिक स्तर का भव्य आयोजन” बताया और करोड़ों की सुविधाओं का दावा किया।
लेकिन जमीनी स्तर पर...
- खिलाड़ियों को पूरी जानकारी नहीं।
- पुरस्कार वितरण में असमानता।
- पारदर्शिता पर सवाल।
क्या थी घोषित पुरस्कार राशि?
🥇 प्रथम: 31,000 रुपए
🥈 द्वितीय: 21,000 रुपए
🥉 तृतीय: 11,000 रुपए
लेकिन बैडमिंटन डबल्स/मिक्स्ड में इन्हें बिना स्पष्ट सूचना के बांट दिया गया।
बड़े सवाल...
- अगर नीति पहले से तय थी, तो खिलाड़ियों को बताया क्यों नहीं गया?
- क्या करोड़ों खर्च सिर्फ “इवेंट शो” के लिए था?
- क्या खिलाड़ियों के हक की कीमत प्रचार से कम है?
इस विवाद का सीधा असर: युवा खिलाड़ियों का मनोबल गिरा। भविष्य में भागीदारी कम हो सकती है
सरकार की खेल नीति पर अविश्वास
“खेलो MP” का मकसद खिलाड़ियों को आगे बढ़ाना था, लेकिन अब सवाल ये है कि क्या ये खेल प्रतिभा बढ़ाने का मंच था या सिर्फ दिखावे का इवेंट? जब खिलाड़ी ही ठगा महसूस करें, तो कोई भी योजना कितनी भी भव्य क्यों न हो उसकी विश्वसनीयता जमीन पर ही तय होती है।
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