11 मई को कूनो नेशनल पार्क जाएंगे सीएम मोहन यादव, दो चीतों को करेंगे रिलीज
Kuno National Park: मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले से अच्छी खबर सामने आई है। कूनो नेशनल पार्क में चीतों का कुनबा अब आजाद होने वाला है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव 11 मई को दो चीतों को खुले जंगल में छोड़ेंगे। ये दोनों चीते बोत्सवाना से भारत लाए गए 9 मेहमानों का हिस्सा हैं।
अब तक ये चीते क्वारंटाइन बाड़े में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। अब 11 मई की सुबह 8 बजे कूनो नदी के पास इन्हें रिलीज किया जाएगा। इस दौरान सीएम मोहन यादव खुद वहां मौजूद रहकर इस ऐतिहासिक पल के गवाह बनेंगे।
सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम
सीएम मोहन यादव के इस दौरे को लेकर प्रशासन पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। शुक्रवार ( 8 मई) को कलेक्टर शीला दाहिमा और एसपी सुधीर अग्रवाल ने पार्क का दौरा किया। उन्होंने वहां सुरक्षा व्यवस्था और हेलीपैड स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया।
चीता रिलीज साइट (कूनो नेशनल पार्क में चीते)पर अधिकारियों को जरूरी दिशा-निर्देश भी दिए गए हैं। सीएम 10 मई की शाम को ही कूनो पहुंच जाएंगे। वे रात को पार्क के रेस्ट हाउस में ही विश्राम करेंगे। अगले दिन सुबह चीतों को खुले जंगल की आजादी सौंपी जाएगी।
राजस्थान से वापस लाया गया घुमक्कड़ चीता KP-2
बता दें कि इसी बीच श्योपुर के कूनो नेशनल पार्क प्रबंधन के लिए एक और बड़ी राहत की खबर आई। चीता KP-2, जो पिछले 25 दिनों से राजस्थान में घूम रहा था वो वापस आ गया। उसे रणथंभौर टाइगर रिजर्व से रेस्क्यू कर कूनो लाया गया है। KP-2 बाघ और तेंदुए वाले खतरनाक इलाकों में घूम रहा था।
वन विभाग की टीम ने उसे सुरक्षित ट्रेंकुलाइज कर वापस लाने में सफलता पाई। पिछले दो दिनों में राजस्थान से यह दूसरा सफल रेस्क्यू ऑपरेशन रहा है। अब पार्क के अधिकारी इन चीतों की सेहत पर पूरी नजर रख रहे हैं।
भारत में सफल होता दिख रहा चीता प्रोजेक्ट
कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) आज पूरी दुनिया में चीता स्टेट के नाम से मशहूर हो चुका है। यह पार्क मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले में स्थित है। इसका शांत माहौल और खुले घास के मैदान चीतों के रहने के लिए बिल्कुल परफेक्ट हैं।
भारत में चीते 1952 में विलुप्त हो गए थे। इन्हें वापस लाने के लिए प्रोजेक्ट चीता शुरू किया गया। पीएम मोदी ने 17 सितंबर 2022 को नामीबिया से आए पहले 8 चीतों को यहां छोड़ा था। इसके बाद दक्षिण अफ्रीका और बोत्सवाना से भी चीते लाए गए।
यहां की सबसे बड़ी सफलता शावकों का जन्म है। मादा चीता मुखी और सियाया ने भारतीय मिट्टी पर बच्चों को जन्म देकर इस प्रोजेक्ट को सफल बनाया है।
अब यहां चीतों की संख्या बढ़कर लगभग 27 से ज्यादा हो गई है। यहां चीतों को रेडियो कॉलर पहनाकर सैटेलाइट से ट्रैक किया जाता है। कूनो सिर्फ एक पार्क नहीं, बल्कि भारत की वन्यजीव विरासत को बचाने की एक बड़ी उम्मीद है।
भारत में चीता प्रोजेक्ट की चुनौतियां
कूनो नेशनल पार्क में चीता प्रोजेक्ट एक बड़ी चुनौती रहा है। साल 2026 की शुरुआत तक के आंकड़ों को देखें, तो अब तक कुछ चीतों और उनके शावकों की मौत भी हुई है। रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से अब तक लगभग 7-8 वयस्क चीतों और कुछ शावकों ने दम तोड़ा है। इन मौतों के पीछे विशेषज्ञों ने कई अहम कारण बताए हैं। सबसे बड़ा कारण इंफेक्शन रहा है।
मानसून के दौरान चीतों के रेडियो कॉलर के नीचे नमी की वजह से स्किन इंफेक्शन हो गया था। इसके अलावा कुछ चीतों की मौत आपसी लड़ाई या दिल की धड़कन रुकने से भी हुई। हालांकि, राहत की बात यह है कि 2026 में प्रोजेक्ट अब स्थिर हो गया है।
अब मौतों का सिलसिला काफी कम हुआ है और शावकों के जन्म ने इस घाटे को पूरा किया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी भी नए वातावरण में सर्वाइवल रेट 50% ही रहता है, इसलिए इन मौतों को पूरी तरह विफलता नहीं माना जा सकता। सरकार अब चीतों की हेल्थ मॉनिटरिंग के लिए और भी सख्त कदम उठा रही है।
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