इंदौर हाईकोर्ट ने मांगा जवाब- लाड़ली बहना को 1500 रुपए तो दिव्यांग को 600 क्यों
5 प्वाइंट में समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश में पेंशन को लेकर बड़ा सवाल उठा है।
- लाड़ली बहना में 1500 रुपए दिए जा रहे हैं।
- दिव्यांगजन को सिर्फ 600 रुपए मिलते हैं।
- हाईकोर्ट में इस पर याचिका दाखिल हुई है।
- सरकार से चार हफ्ते में जवाब मांगा गया है।
क्या है लाड़ली बहना और दिव्यांग पेंशन विवाद
इंदौर में मामला हाईकोर्ट पहुंच गया है। पेंशन में अंतर को लेकर सवाल उठे हैं। मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने नोटिस जारी किया है। सरकार से जवाब मांगा गया है।
कोर्ट में क्या सवाल उठाए गए हैं
याचिका में बड़ा अंतर बताया गया है। लाड़ली बहना योजना में 1500 रुपए मिलते हैं। दिव्यांगजन को केवल 600 रुपए दिए जाते हैं। याचिकाकर्ता मनीष विजयवर्गीय ने इसे गलत बताया है।
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किसने दायर की याचिका और क्या मांग
मनीष विजयवर्गीय ने याचिका दायर की है। उन्होंने पेंशन बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि यह राशि बहुत कम है। इससे जरूरतें पूरी नहीं होती हैं।
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कानून क्या कहता है इस मामले में
दिव्यांगजन अधिकार कानून 2016 का हवाला दिया गया है। इसमें ज्यादा लाभ देने की बात कही गई है। याचिका के अनुसार एक्ट के अनुसार प्रदेश में चलने वाली विविध योजनाओं से 25 फीसदी अधिक राशि मिलनी चाहिए। इस आधार पर पेंशन बढ़ाने की मांग की गई है।
इस हिसाब से दिव्यांग को 1875 मिलने चाहिए
एक्ट के इस प्रावधान की बात करें तो मप्र में लाड़ली बहनाओं को 1500 रुपए प्रतिमाह मिल रहे हैं। इसमें 25 फीसदी अधिक की बात करें तो यह 1875 रुपए हो जाती है। यानी दिव्यांग को नियम से इतनी राशि प्रति माह मिलना चाहिए। सभी पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने शासन को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब मांगा है।
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लंबे समय से चल रहा है कानूनी वाद
याचिकाकर्ता ने इसके पहले भी वर्ष 2023 में भी हाई कोर्ट में जनहित याचिका की थी। इस समय हाईकोर्ट ने कहा था कि याचिकाकर्ता इस संबंध में मप्र शासन के समक्ष प्रेजेंटेशन दें। लेकिन इसके बाद भी शासन स्तर पर इसे लेकर फैसला नहीं हुआ। याचिकाकर्ता ने बताया कि राज्य शासन ने यह कहते हुए दिव्यांगजन की पेंशन में बढ़ोतरी से इंकार कर दिया कि यह केंद्र की योजना है, हम कुछ नहीं कर सकते।
अभी इन्हें नहीं मिलती है पेंशन
याचिका में यह भी कहा गया कि अभी 6 से 18 साल के दिव्यांगजन को ही पेंशन की पात्रता है। लेकिन 0 से 6 साल वालों को यह नहीं दी जाती है। इस संबंध में शासन का तर्क है कि छह वर्ष तक के दिव्यांग अभिभावकों पर आश्रित रहते हैं, इसलिए उन्हें पेंशन नहीं दी जा सकती। जबकि मप्र के सिवा अन्य कई राज्यों में यह पेंशन काफी अधिक है।