लाड़ली बहना योजना में नाम जुड़वाने से पहले पढ़ लें ये खबर नहीं तो पछताना पड़ेगा
समझें क्या है पूरा मामला...
- लाड़ली बहना योजना के नाम पर ठगी सामने आई है।
- कुछ लोग नया नाम जुड़वाने के नाम पर महिलाओं से पैसे मांग रहे हैं।
- इसके लिए पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने वीडियो का इस्तेमाल हो रहा है।
- ठग महिलाओं से सीधे संपर्क कर उन्हें झांसे में ले रहे हैं।
- विभाग ने साफ कहा है कि अभी नए आवेदन की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है।
पुराने वीडियो का हो रहा दुरुपयोग
इंदौर में इन दिनों एक नया मामला चर्चा में है। कुछ असामाजिक तत्व लाड़ली बहना योजना का नाम इस्तेमाल कर रहे हैं। वे महिलाओं से नया नाम जुड़वाने और फॉर्म भरवाने के नाम पर पैसे मांग रहे हैं। यह रकम करीब 1500 रुपए तक बताई जा रही है।
जानकारी के अनुसार यह गिरोह खासतौर पर ग्रामीण इलाकों और निचली बस्तियों को निशाना बना रहा है। इन इलाकों की महिलाएं अक्सर योजनाओं की सही जानकारी नहीं रखतीं। इसी कमजोरी का फायदा ठग उठा रहे हैं।
ठगों ने विश्वास जीतने का भी एक तरीका निकाला है। वे सोशल मीडिया पर घूम रहे पुराने वीडियो की एडिटिंग कर रहे हैं। इन वीडियो में दिखाया जा रहा है कि योजना के नए फॉर्म जल्द भरे जाएंगे। असल में यह दावा पूरी तरह झूठा है।
विभाग के पास पहुंचे कई मामले
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के पुराने बयान इस्तेमाल किए गए हैं। इन्हें इस तरह एडिट किया गया है कि लगे जैसे यह ताजा बयान है। इसी आधार पर ठग महिलाओं से पैसे वसूल रहे हैं।
सच्चाई जानने के लिए कई महिलाएं खुद महिला एवं बाल विकास विभाग के दफ्तर पहुंच रही हैं। इंदौर की भूरी टेकरी की रहने वाली शिवानी भी इनमें से एक हैं। उन्होंने बताया कि एक कंप्यूटर दुकान वाले ने उनसे फॉर्म भरने की बात कही थी।
शक होने पर शिवानी सीधे दफ्तर जांच करने पहुंचीं। इसी तरह ज्योति रावत नाम की महिला ने भी अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले जाति प्रमाण पत्र के नाम पर भी उनसे ठगी हुई थी। अब लाड़ली बहना योजना के नाम पर फिर पैसे लिए गए।
महिला बाल विकास ने जारी की चेतावनी
महिला एवं बाल विकास विभाग के अधिकारी रजनीश सिंह ने स्थिति साफ की है। उन्होंने बताया कि योजना के तहत नए आवेदन की प्रक्रिया अभी शुरू ही नहीं हुई है। फिलहाल केवल पहले से पंजीकृत पात्र महिलाओं को ही राशि दी जा रही है। यह राशि हर महीने 1500 रुपए तय है।
क्यों जरूरी है सतर्क रहना
इस तरह की ठगी सिर्फ पैसों तक सीमित नहीं रहती। ठग अक्सर बैंक डिटेल या आधार जैसी निजी जानकारी भी मांग लेते हैं। इससे साइबर ठगी का खतरा और बढ़ जाता है।
इसलिए किसी भी योजना से जुड़ी जानकारी सिर्फ सरकारी सूत्रों से ही लेनी चाहिए। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो या मैसेज पर आंख बंद करके भरोसा करना खतरनाक हो सकता है।
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