डिप्टी कलेक्टर लता शरणागत नियुक्ति विवाद: मंत्री की नोटशीट का जवाब नहीं, काली पट्टी बांधकर विरोध कर रहे कर्मचारियों

Sourabh Bhatnagar | Sept 01, 2025, 09:38 IST
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महिला बाल विकास विभाग में लता शरणागत की नियुक्ति के बाद उठे विवाद को लेकर मंत्री ने जीएडी से जवाब मांगा, लेकिन एक हफ्ते में कोई कार्रवाई नहीं हुई। कर्मचारियों का विरोध जारी है, और काली पट्टी बांधकर विरोध जताया जा रहा है।

महिला बाल विकास विभाग में 4 अगस्त को अपर कलेक्टर लता शरणागत की अपर संचालक के पद पर नियुक्ति के बाद से लगातार विरोध देखा जा रहा है। विभागीय कर्मचारियों ने इसका विरोध करते हुए काली पट्टी बांधकर काम करना शुरू कर दिया है।



इस नियुक्ति के खिलाफ बढ़ते विरोध को देखते हुए विभागीय मंत्री निर्मला भूरिया ने जीएडी को पत्र भेजकर इस नियुक्ति को रद्द करने का अनुरोध किया है। मंत्री ने अपनी नोटशीट में यह लिखा कि अपर संचालक पद के लिए प्रतिनियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है। साथ ही उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि इस नियुक्ति के प्रस्ताव पर उनकी सहमति या अनुमोदन नहीं लिया गया था।



जीएडी से नहीं आया कोई जवाब

हालांकि, एक हफ्ते का समय बीत जाने के बाद भी जीएडी ने नोटशीट पर कोई कार्रवाई नहीं की है। जीएडी के सूत्रों के अनुसार, महिला बाल विकास विभाग में प्रशासनिक तंत्र को मजबूत करने के लिए एडिशनल कलेक्टर का पद मांगा गया था, जिसे जीएडी ने अपनी सहमति दे दी।





इसलिए हो रहा नियुक्ति का विरोध

  • विरोध का मुख्य कारण यह है कि विभाग में लता शरणागत से लगभग 15 साल वरिष्ठ जॉइंट डायरेक्टर पहले से कार्यरत हैं, जिन्हें अब अधीनस्थ बना दिया गया है। इसके अलावा, अपर संचालक के पांच पदों पर प्रतिनियुक्ति का कोई प्रावधान नहीं है, जबकि विभाग में इन पदों को भरने के लिए अधिकारियों को ही नियुक्ति दी जाती है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा कि परिवहन, एक्साइज और स्वास्थ्य जैसे कई विभागों में बाहरी कैडर के अधिकारियों को नियुक्त किया जाता है।
  • विभागों में दूसरे विभाग या प्रशासनिक अधिकारी की नियुक्ति के विरोध में मामले एक के बाद एक सामने आ रहे हैं। ताजा मामला महिला एवं बाल विकास विभाग से आया है।
  • शासन द्वारा हाल ही में बुरहानपुर में पदस्थ डिप्टी कलेक्टर लता शरणागत की पोस्टिंग अतिरिक्त निदेशक के पद की गई है। अब तक इस पद पर विभाग से ही किसी वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति की जाती रही है।
  • सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश से इस पद के दावेदार अधिकारी नाराज हैं। वहीं विभाग में इस परिपाटी के आगे जारी रहने पर दूसरे लोग भी प्रभावित हो सकते हैं। इस वजह से सभी डिप्टी कलेक्टर की नियुक्ति के खिलाफ लामबंद हैं।

खबर यह भी...डिप्टी कलेक्टर की नियुक्ति के विरोध में लामबंद महिला एवं बाल विकास अधिकारी



मंत्री के सामने दर्ज कराई आपत्ति

डिप्टी कलेक्टर नहीं एक्सपर्ट

अतिरिक्त निदेशक के पद पर डिप्टी कलेक्टर को बैठाए जाने पर महिला एवं बाल विकास विभाग में उथल-पुथल मची हुई है। प्रशासनिक अधिकारी की विभाग में नियुक्ति को अधिकारी अपने अधिकारों पर अतिक्रमण मान रहे हैं। उनका कहना है शरणागत 2008 बैच की प्रशासनिक अधिकारी हैं, जबकि विभाग में कई अधिकारी 2009 से संयुक्त निदेशक के पद पर कार्यरत हैं।



24 साल से इस पद पर काम करने के बाद अतिरिक्त निदेशक के पद पर उनका दावा बनता है। वहीं इस विभाग में महिला एवं बच्चों से संबंधिक कार्यक्रमों का संचालन होता है। इसके लिए प्रशासनिक अनुभव से ज्यादा संवेदनशीलता की जरूरत होता है। डिप्टी कलेक्टर इस मामले में विशेषज्ञ नहीं हैं।



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