शराब दुकान पर बवाल: मंत्री के घर के पास असुरक्षा, OSD को लिखना पड़ा पत्र
भोपाल में पंचायत मंत्री प्रहलाद सिंह पटेल के सरकारी निवास और कन्या महाविद्यालय के पास शराब दुकान चल रही है। इस पर विवाद बढ़ रहा है। मंत्री के विशेष सहायक ने कलेक्टर को पत्र लिखकर दुकान हटाने की मांग की। 15 दिन बाद भी कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई।
क्या है पूरा मामला
भोपाल के प्रोफेसर कॉलोनी स्थित मंत्री निवास के पास पॉलीटेक्निक चौराहे पर शराब दुकान संचालित है। आरोप है कि यहां रोज असामाजिक तत्वों की भीड़ जुटती है, जिससे माहौल बिगड़ रहा है। इस क्षेत्र में शासकीय महारानी लक्ष्मीबाई कन्या महाविद्यालय भी है। यहां पढ़ने वाली छात्राएं और स्थानीय लोग असुरक्षित महसूस कर रहे हैं।
OSD को क्यों लिखना पड़ा पत्र
मंत्री के विशेष सहायक चंद्रप्रकाश पटेल ने 25 मार्च को कलेक्टर को पत्र लिखा। उन्होंने कहा कि शराब दुकान को तत्काल हटाकर शिफ्ट किया जाए। यह सवाल खड़ा करता है कि मंत्री के OSD को भी पत्र लिखना पड़ रहा है। आम जनता की शिकायतें किस स्तर पर सुनी जाती होंगी।
15 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
पत्र भेजे जाने के बावजूद करीब पंद्रह दिन बीत चुके हैं। लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम सामने नहीं आया है। इससे प्रशासनिक उदासीनता पर सवाल और गहरे हो गए हैं।
नियम-कायदों पर उठे सवाल
आबकारी विभाग पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या नियमों को नजरअंदाज कर शराब दुकानों का आवंटन किया जा रहा है। आमतौर पर स्कूल, कॉलेज और धार्मिक स्थलों के आसपास शराब दुकानें प्रतिबंधित होती हैं। इसके बावजूद ऐसी लोकेशन पर दुकान का संचालन नियमों की अनदेखी की ओर इशारा करता है।
पहले भी उठते रहे हैं आरोप
स्थानीय लोग समय-समय पर ऐसी दुकानों को हटाने की मांग करते रहे हैं। लेकिन शिकायतों के बावजूद कार्रवाई न होना प्रशासनिक लापरवाही की कहानी दोहराता है।
कांग्रेस का हमला तेज
कांग्रेस नेता केके मिश्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सरकार को घेरा। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा, शराब-राजस्व और परेशान कद्दावर मंत्री की आवाज अनसुनी हो रही है। इसे अफसरों की भर्राशाही” का उदाहरण बताते हुए उन्होंने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए।
कांग्रेस ने सरकार और अफसरशाही को घेरा
यह मामला सिर्फ एक दुकान का नहीं, बल्कि सिस्टम की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल है। जब मंत्री स्तर पर भी सुनवाई में देरी हो रही है, तो आम नागरिकों की शिकायतों का क्या होता होगा। यह सवाल अब खुलकर सामने है। जब इस मुद्दे पर मंत्री के ओएसडी चंद्रप्रकाश पटेल से पक्ष जानने की कोशिश की गई, तो उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया।
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