इंदौर में महिला-बाल विकास के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल पर लोकायुक्त का छापा
समझें क्या है पूरा मामला...
इंदौर में लोकायुक्त पुलिस ने बुधवार सुबह एक बड़े सरकारी अफसर पर छापा मारा है। यह अफसर महिला एवं बाल विकास विभाग यानी डब्ल्यूसीडी के संयुक्त संचालक लक्ष्मी नारायण कंडवाल हैं।
30 साल की नौकरी में उनकी कुल आय करीब 2.5 करोड़ रुपए थी, लेकिन संपत्ति 9.5 करोड़ रुपए की मिली है। यह आय से 241 प्रतिशत ज्यादा है। एक साथ तीन जगहों पर छापा मारा गया, जिनमें आवास, जिम और डिपार्टमेंटल स्टोर शामिल थे।
एक साथ तीन ठिकानों पर छापा
बुधवार, 10 जून की सुबह करीब 6 से 7 बजे के बीच लोकायुक्त की अलग-अलग टीमें एक साथ तीन जगहों पर पहुंचीं। इनमें कंडवाल का आवास, उनसे जुड़ा जिम सेंटर और एक बड़ा डिपार्टमेंटल स्टोर शामिल था। कार्रवाई इतनी गोपनीय तरीके से की गई कि संबंधित पक्ष को भनक तक नहीं लगी।
अचानक बड़ी संख्या में अधिकारी और कर्मचारी पहुंचे तो आसपास के इलाके में भी चर्चा शुरू हो गई। टीमें दस्तावेज, संपत्ति रिकॉर्ड और निवेश से जुड़े कागजात खंगालती रहीं।
शिकायत से छापे तक का सफर
लोकायुक्त इंदौर राजेश सहाय को एक गोपनीय शिकायत मिली थी। इसके बाद मामले की विस्तृत जांच कराई गई। जांच में आय से अधिक संपत्ति के तथ्य सामने आने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया गया। फिर विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट लेकर बुधवार को कार्रवाई की गई।
30 साल की नौकरी, 9.5 करोड़ की संपत्ति
लोकायुक्त की जांच के अनुसार कंडवाल 1996 से सरकारी सेवा में हैं। यानी करीब 30 साल की सेवा दे चुके हैं। इस पूरे समय में उनके वेतन से होने वाली कुल आय लगभग दो करोड़ पांच लाख रुपए आंकी गई है। वहीं, जांच में सत्यापित संपत्ति करीब नौ करोड़ पांच लाख रुपए की पाई गई है। इस तरह आय की तुलना में 241 प्रतिशत अधिक संपत्ति मिलने के शुरुआती प्रमाण सामने आए हैं।
अधिकारियों का कहना है कि तलाशी के दौरान मिले दस्तावेजों के आधार पर यह आंकड़ा और भी बढ़ सकता है।
करोड़ों की अचल संपत्तियां
जांच में सामने आई संपत्तियों की तस्वीर चौंकाने वाली है। स्कीम नंबर-103 में 252 वर्गमीटर के व्यावसायिक भूखंड पर करीब 13 हजार 500 वर्गफीट का बहुमंजिला निर्माण मिला है। इसमें व्यावसायिक परिसर और आलीशान आवास दोनों शामिल हैं। स्कीम नंबर-140 में लगभग 1000-1000 वर्गफीट के दो अलग-अलग प्लॉट भी पाए गए है।
इसके अलावा पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र के पास तारपुरा, बेकलाय और बनेड़िया जैसे ग्रामीण इलाकों में 11 मूल्यवान भूखंड भी कंडवाल के नाम पर मिले हैं।
जांच में दो मंजिला जिम भी मिली
कंडवाल से जुड़े एमएस जिम सेंटर पर भी लोकायुक्त की टीम पहुंची। यह जिम दो मंजिला भवन में चल रहा है। अंदर आधुनिक फिटनेस उपकरण और महंगी एक्सरसाइज मशीनें मिलीं। शहर के बड़े निजी फिटनेस सेंटरों की श्रेणी में गिना जाने वाला यह जिम देखकर जांच अधिकारी भी हैरान हो गए।
डिपार्टमेंटल स्टोर भी कम बड़ा नहीं था। वहां रोजमर्रा की जरूरतों से लेकर उपभोक्ता वस्तुओं का व्यापक कारोबार पाया गया है। टीम ने स्टोर के वित्तीय दस्तावेज और व्यावसायिक रिकॉर्ड जब्त किए हैं।
जांच अभी जारी है
लोकायुक्त अधिकारी इन सभी प्रतिष्ठानों से मिले वित्तीय दस्तावेज, संपत्ति रजिस्ट्री और निवेश संबंधी कागजात खंगाल रहे हैं। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि इन संपत्तियों में निवेश का स्रोत क्या है?
आय के घोषित स्रोतों से इनका कितना मेल खाता है, यह भी देखा जा रहा है। संभावना जताई जा रही है कि जांच आगे बढ़ने पर अनुपातहीन संपत्ति का आंकड़ा और भी बड़ा हो सकता है।
FAQ
- आय से अधिक संपत्ति के मामले में क्या कानूनी कार्रवाई होती है?
भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत आय से अधिक संपत्ति रखना एक दंडनीय अपराध है। इसमें विशेष न्यायालय से तलाशी वारंट लेकर छापेमारी की जाती है। दोष सिद्ध होने पर संबंधित अधिकारी को जेल की सजा और संपत्ति जब्त होने का प्रावधान है। लोकायुक्त दस्तावेजों की जांच के बाद आरोप पत्र दाखिल करती है और मामला विशेष अदालत में चलता है।
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