दहाड़ से माफी तक: ‘बागी’ तेवरों वाले विधायक प्रीतम लोधी संगठन के आगे पड़े फीके, हाईकमान की क्लास के बाद बदले सुर
मध्यप्रदेश भाजपा में एक बार फिर बयानबाजी पर ब्रेक लगाने की नौबत आ गई। विवादों में घिरे विधायक प्रीतम लोधी, जो हाल तक प्रशासन और अधिकारियों पर आक्रामक तेवर दिखा रहे थे, हाईकमान की सख्ती के बाद पूरी तरह बैकफुट पर आ गए। तीन दिन के नोटिस के बाद भोपाल तलब किए गए लोधी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सामने न सिर्फ सफाई दी, बल्कि अपने शब्दों पर माफी भी मांग ली।
संगठन की ‘क्लास’ और बदले तेवर
पार्टी नेतृत्व ने लोधी को साफ संकेत दिया कि बार-बार विवादित बयान देना भाजपा की कार्यशैली के खिलाफ है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव और बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के सामने पेशी के दौरान वही लोधी, जो पहले आक्रामक भाषा में अधिकारियों को घेर रहे थे, अब बेहद संयमित और रटे-रटाए अंदाज में बात करते नजर आए।
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‘भीगी बिल्ली’ वाला ट्रांजिशन: बयान से बैकफुट तक
जो विधायक कुछ दिन पहले तक SDOP के खिलाफ सख्त बयान दे रहे थे और यहां तक कह चुके थे कि “गोबर से पाट देंगे”, वही अब नरम लहजे में बोले। उन्होंने कहा कि अगर उनके शब्दों से किसी अधिकारी या व्यक्ति को ठेस पहुंची है तो वे उसके लिए खेद व्यक्त करते हैं।
माफी, सफाई और ‘स्क्रिप्टेड’ बयान
लोधी ने खुद को भाजपा का “सच्चा सिपाही” बताते हुए कहा कि उनकी तीन पीढ़ियां पार्टी के लिए समर्पित रही हैं। बेटे से जुड़े मामले को लेकर पुलिस कार्रवाई पर नाराजगी जरूर जताई, लेकिन साथ ही यह भी कहा कि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग किया।
उनका बयान कुछ ऐसा लगा मानो संगठन की लाइन के मुताबिक शब्द चुने गए हों—सीधे, संतुलित और बिना किसी आक्रामकता के।
एक नजर में घटनाक्रम
- प्रीतम लोधी को विवादित बयान के बाद 3 दिन का नोटिस दिया गया
- भोपाल में मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष के सामने पेशी हुई
- SDOP को लेकर दिए गए बयान पर विवाद खड़ा हुआ था
- लोधी ने सार्वजनिक रूप से माफी मांगी और खेद जताया
- पार्टी ने भविष्य में ऐसे बयानों से बचने की सख्त हिदायत दी
- बेटे के मामले की जांच के लिए लोधी ने पत्र भी सौंपा
पुराने विवादों का ‘रिकॉर्ड’ भी खुला
यह पहला मौका नहीं है जब प्रीतम लोधी सुर्खियों में आए हों। इससे पहले शिवपुरी में ब्राह्मण समाज को लेकर दिए गए बयान ने भी बड़ा विवाद खड़ा किया था। पार्टी ने उस वक्त भी उन्हें तलब किया था और चेतावनी दी थी। यानी विवाद और माफी—लोधी की राजनीति में यह सिलसिला नया नहीं है।
हाईकमान का सख्त संदेश, लेकिन ‘नरम हैंडलिंग’
सूत्रों के मुताबिक, बैठक में मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष ने लोधी को उनके पुराने बयानों की याद दिलाई। हालांकि मामला आक्रामक तरीके से नहीं निपटाया गया, बल्कि समझाइश के जरिए बीच का रास्ता निकाला गया। पहले अपनी बात पर अड़े लोधी आखिरकार नेतृत्व के सामने झुकते नजर आए।
वीडियो राजनीति भी नहीं आई काम
तलब से पहले लोधी ने कुछ वीडियो जारी कर अपने पक्ष को मजबूत करने की कोशिश की थी, लेकिन ये रणनीति ज्यादा असरदार नहीं रही। अंत में उन्हें संगठन और प्रशासन के सामने झुकना ही पड़ा।
बयान देते समय शब्दों में चूक हुई
प्रीतम लोधी ने ‘द सूत्र’ से बातचीत में कहा कि उनकी तीन पीढ़ियों ने भाजपा के लिए काम किया है और वे खुद को पार्टी का समर्पित कार्यकर्ता मानते हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि बयान देते समय उनसे कुछ शब्दों में चूक हो गई थी। लोधी ने बताया कि प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने उन्हें इस मुद्दे पर समझाइश दी है और वे आगे से अपने बयान देने में पूरी सावधानी बरतेंगे।
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‘बागी इमेज’ पर ब्रेक या अस्थायी विराम?
पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर साफ कर दिया कि भाजपा में अनुशासन की लाइन क्रॉस करने की कीमत चुकानी पड़ती है। प्रीतम लोधी का यह यू-टर्न बताता है कि राजनीतिक आक्रामकता की भी एक सीमा होती है—और उस सीमा के पार जाते ही ‘दहाड़’ से ‘माफी’ तक का सफर ज्यादा लंबा नहीं होता।