MP Cyber Fraud Report 2025: एमपी में 6 अरब से ज्यादा की ठगी, इंदौर भोपाल टॉप पर, देखें रिपोर्ट
MP News.आजकल जैसे-जैसे हम डिजिटल हो रहे हैं, साइबर ठगी भी बढ़ रही है। मध्य प्रदेश से आए ताजा आंकड़े (MP Fraud Case) बहुत डराने वाले हैं। यहां साइबर अपराधियों का जाल तेजी से फैल रहा है। साल 2025 में प्रदेश के लोग बड़ी ठगी का शिकार हुए।
नागरिकों से कुल 6 अरब 15 करोड़ रुपए ठगे गए। अब तक ठगी की कुल 64,764 शिकायतें दर्ज हुई हैं। यह रिपोर्ट अपराधियों के काम करने के तरीके को उजागर करती है। हर क्षेत्र में ठगी का नया तरीका सामने आ रहा है। यह आंकड़े हम सभी को सावधान करने के लिए काफी हैं। डिजिटल दौर में अब अपनी सुरक्षा का खास ध्यान रखें। सतर्क रहें और किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक न करें।
मध्यप्रदेश कैसा है साइबर ठगी का ग्राफ
पूरे प्रदेश में ठगी का ग्राफ अलग-अलग क्षेत्रों में अलग तरीके से व्यवहार कर रहा है। जहां मालवा में छोटे, लेकिन ज्यादा केस हैं। वहीं, विंध्य क्षेत्र में केस कम हैं मगर ठगी की रकम बहुत बड़ी है।
प्रमुख शहरों का हाल (Major Cities Data)
| जिला (District) | कुल शिकायतें (Complaints) | ठगी गई रकम (Amount Scammed) |
| इंदौर अर्बन | 8,436 | ₹125.83 करोड़ |
| भोपाल अर्बन | 7,111 | ₹58.30 करोड़ |
| जबलपुर | 3,420 | ₹34.81 करोड़ |
| ग्वालियर | 3,105 | ₹27.43 करोड़ |
| रीवा | 1,677 | ₹109.60 करोड़ |
विंध्य क्षेत्र में 'हाई वैल्यू' ठगी का आतंक
रीवा संभाग के आंकड़े सबसे ज्यादा डराने वाले हैं। यहां जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर अपराधी बड़ी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
- रीवा का औसत: यहां प्रति व्यक्ति औसतन 6.5 लाख रुपए की ठगी हुई है।
- कारण: विंध्य और बुंदेलखंड में अपराधी 'इन्वेस्टमेंट और ट्रेडिंग फ्रॉड' (Forex trading fraud) को हथियार बना रहे हैं। लोग अधिक मुनाफे के लालच में बड़ी पूंजी दांव पर लगा देते हैं और जालसाजों का शिकार हो जाते हैं।
क्षेत्र अलग तो ठगी भी अलग
अपराधी स्थानीय परिस्थितियों के हिसाब से अपना 'स्कैम मॉडल' बदलते हैं।
- मालवा (इंदौर-उज्जैन): यहां यूपीआई (UPI), फर्जी कस्टमर केयर और ओटीपी (OTP) स्कैम जैसे 'मास लेवल' फ्रॉड ज्यादा होते हैं।
- महाकौशल (जबलपुर-छिंदवाड़ा): सरकारी नौकरी, सेना या रेलवे में भर्ती और आसान लोन दिलाने के नाम पर ठगी की जाती है।
- निमाड़ (खंडवा-खरगोन): फर्जी केवाईसी (KYC), सिम-स्वैप और सरकारी योजनाओं के नाम पर लोगों को ठगा जा रहा है।
- चंबल (ग्वालियर-मुरैना): यहां सोशल मीडिया फ्रॉड और फर्जी ट्रेडिंग ऐप्स का बोलबाला है।
सुधार के लिए क्या जरूरी?
- जांच दल: हर 35 साइबर अपराधों के लिए एक विशेष जांच दल (SIT) होना चाहिए।
- न्यायिक व्यवस्था: हर 200 मामलों पर एक विशेष प्रोसिक्यूटर और एक डेडिकेटेड साइबर कोर्ट (Cyber Court) की आवश्यकता है।
- जागरूकता: ग्रामीण क्षेत्रों, विशेषकर विंध्य और बुंदेलखंड में जागरूकता अभियान।
साइबर ठगी से कैसे बचें?
- अनजान लिंक पर क्लिक न करें: एसएमएस या व्हाट्सएप पर आए लुभावने लिंक्स से बचें।
- ट्रेडिंग ऐप्स की जांच: केवल सेबी (SEBI) पंजीकृत ब्रोकर के माध्यम से ही निवेश करें।
- ओटीपी साझा न करें: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाले किसी भी व्यक्ति को अपना ओटीपी न दें।
- कस्टमर केयर नंबर: हमेशा आधिकारिक वेबसाइट से ही संपर्क नंबर प्राप्त करें, गूगल सर्च के रैंडम नतीजों पर भरोसा न करें।
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