एमपी में 40 हजार अफसर-कर्मचारी होंगे इधर से उधर! तबादलों से रोक हटाने की प्रक्रिया शुरू
मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) में कर्मचारियों और अधिकारियों के तबादलों पर तीन साल से लगी रोक अब खत्म होने जा रही है। 2021 में राज्य सरकार ने एक स्थायी तबादला नीति (Transfer Policy) बनाई थी, जिसके तहत तबादलों पर रोक लगा दी गई थी। अब, 2025 में सरकार ने एक नया कदम उठाते हुए तबादलों से रोक हटाने का निर्णय लिया है। आगामी कैबिनेट बैठक में वरिष्ठ सचिवों के लिए नई तबादला नीति (Transfer Policy) को मंजूरी मिल सकती है, जिसके बाद प्रदेश में तकरीबन 40,000 अफसर और कर्मचारी तबादले के अंतर्गत आ सकते हैं।
तबादला नीति में बदलाव
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मंजूरी की आवश्यकता
जब तक तबादलों के नियम लागू नहीं होते, तब तक राज्य सरकार की व्यवस्था में समन्वय की आवश्यकता होगी। यदि किसी विभाग को तय सीमा से अधिक तबादला करना है तो उसे मुख्यमंत्री के समन्वय से मंजूरी लेनी होगी। यह प्रक्रिया प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और नियंत्रण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से की जा रही है।
कैसे होंगे तबादले?
विशेष विभागों के लिए अलग नियम
कभी तक विशेष विभागों, जैसे कि स्कूल शिक्षा, पुलिस और आदिवासी कल्याण विभाग, में कर्मचारियों के ट्रांसफर के लिए अलग नियम लागू थे। अब इन्हें भी नई नीति के तहत समायोजित किया जाएगा। विशेष रूप से शिक्षकों के लिए अलग से तबादला नीति बनाई गई है, जबकि पुलिस विभाग में ट्रांसफर के लिए विभागीय बोर्ड की मंजूरी अनिवार्य होगी।
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मंत्रियों और विधायकों का दबाव
इस तबादला नीति में एक और अहम बदलाव यह है कि अब मंत्री और विधायक अपने क्षेत्रों में कार्यरत अधिकारियों, जैसे कि एसडीएम, तहसीलदार, पटवारी आदि के ट्रांसफर के लिए प्रभारी मंत्री का अनुमोदन जरूरी होगा। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजनीतिक दबाव भी इस प्रक्रिया में भूमिका निभाएगा।
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