मध्यप्रदेश में IAS के 68 पद खाली, 4 अफसरों को दिल्ली जाने से रोका; आखिर कब पूरी होगी अधिकारियों की कमी?
ऐसे में चार अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति रोकने के फैसले के साथ एक बड़ा सवाल भी खड़ा हो गया है कि आखिर खाली पद कब भरे जाएंगे?
चार IAS अधिकारियों की दिल्ली जाने की अर्जी खारिज
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए आवेदन करने वाले चारों अधिकारी 2012 बैच के हैं। इनमें हर्षिका सिंह, रोहित सिंह, अभिजीत अग्रवाल और अनुराग चौधरी शामिल हैं। चारों अधिकारी फिलहाल मध्यप्रदेश में अलग-अलग विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। सरकार ने प्रदेश में अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए उनकी अर्जियां नामंजूर कर दी हैं। बताया जा रहा है कि वर्ष 2027 में केंद्रीय सेवा से कुछ अधिकारियों की वापसी के बाद इन चारों को प्रतिनियुक्ति पर भेजने के प्रस्ताव पर दोबारा विचार किया जा सकता है।
IAS के पद खाली, प्रमोशन में भी देरी
प्रदेश में अधिकारियों की कमी के पीछे पदोन्नति की धीमी प्रक्रिया को भी एक वजह माना जा रहा है। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों को आईएएस बनाने की प्रक्रिया में देरी हो रही है। जानकारी के मुताबिक, अगस्त में 13 पदों पर पदोन्नति के लिए राज्य प्रशासनिक सेवा के 39 अधिकारियों के नाम भेजने की तैयारी थी।
वहीं, गैर प्रशासनिक सेवाओं से आईएएस कैडर (IAS cadre) में नियुक्ति की प्रक्रिया वर्ष 2016 से बंद बताई जा रही है। इस रास्ते से योग्य अधिकारियों को करीब 10 साल से मौका नहीं मिला है। ऐसे में Promotion Process को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। जब प्रदेश में अधिकारियों की जरूरत है, तो पदोन्नति और भर्ती की प्रक्रिया में तेजी क्यों नहीं लाई जा रही?
चारों अधिकारियों के पास कौन-कौन सी जिम्मेदारी?
केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन करने वाले चारों अधिकारी प्रदेश में महत्वपूर्ण पदों पर काम कर रहे हैं।
आईएएस हर्षिका सिंह: संचालक, बजट।
आईएएस रोहित सिंह: प्रबंध संचालक, मध्यप्रदेश पाठ्यपुस्तक निगम।
आईएएस अभिजीत अग्रवाल: प्रबंध संचालक, मार्कफेड।
आईएएस अनुराग चौधरी: मत्स्य महासंघ में जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
सरकार का मानना है कि इन अधिकारियों के राज्य में रहने से विभागों का कामकाज संभालने में मदद मिलेगी।
68 खाली पदों को भरने की क्या है तैयारी?
चार अधिकारियों की केंद्रीय प्रतिनियुक्ति रोकने से फिलहाल प्रदेश को अनुभवी अफसरों की सेवाएं मिलती रहेंगी। लेकिन इससे आईएएस के 68 खाली पदों की समस्या खत्म नहीं होगी। सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है। एक तरफ मौजूदा अधिकारियों के जरिए प्रशासनिक कामकाज चलाना है, वहीं दूसरी तरफ पदोन्नति और दूसरी चयन प्रक्रियाओं को आगे बढ़ाकर खाली पद भरने हैं। अब देखना होगा कि राज्य सरकार इन रिक्तियों को भरने के लिए क्या कदम उठाती है। केवल अधिकारियों को बाहर जाने से रोकने के बजाय नई नियुक्तियों और पदोन्नति पर भी तेजी से काम करना जरूरी होगा।