जेलों पर करंट का पहरा... दीवार छूते ही लगेगा झटका, हर जेल पर बिजली की बाड़ लगाने वाला पहला राज्य बनेगा एमपी
भोपाल. मध्यप्रदेश अब देश में ऐसा कदम उठाने जा रहा है, जो जेल सुरक्षा के मामले में बड़ा कदम होगा। प्रदेश की सभी जेलों के चारों ओर इलेक्ट्रिक फेंसिंग (करंट वाली सुरक्षा दीवार या बाड़) लगाने की तैयारी पूरी हो गई है।
इसके बाद जेल की दीवार फांदकर भागना लगभग नामुमकिन हो जाएगा। सरकार ने इसके लिए करीब 18 करोड़ रुपए की मंजूरी दी है। खास बात यह है कि यह पैसा किसी नए बजट से नहीं, बल्कि जेलों के खाने के बजट में बचे पैसे से ही जुटाया गया है।
यह फैसला अचानक नहीं आया है। इसके पीछे बड़ा कारण है। दरअसल, 31 अक्टूबर 2016 को भोपाल की सेंट्रल जेल से सिमी के आठ विचाराधीन कैदी एक हेड कांस्टेबल की हत्या कर जेल से फरार (Jail Security Breach) हो गए थे। इस घटना ने देश में जेल सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए थे। तब से ही यह महसूस किया जा रहा था कि जेलों की बाहरी सुरक्षा को और मजबूत करना जरूरी है। अब जाकर यह योजना जमीन पर उतरने जा रही है।
क्या है इलेक्ट्रिक फेंसिंग और कैसे करेगी काम?
इलेक्ट्रिक फेंसिंग का मतलब है कि जेल की बाहरी दीवार के ऊपर और आसपास ऐसे तार लगाए जाएंगे, जिनमें हल्का करंट रहेगा। कोई कैदी दीवार चढ़ने की कोशिश करेगा तो उसे झटका लगेगा। इससे वह आगे बढ़ नहीं पाएगा। यह सिस्टम तुरंत अलर्ट भी देता है। सरल शब्दों में कहें तो दीवार के ऊपर एक अदृश्य ‘करंट की दीवार’ बन जाएगी।
कितनी जेलों में लगेगी ये सुरक्षा?
मध्यप्रदेश में 123 कार्यरत जेलों (Madhya Pradesh Jail Department) में इलेक्ट्रिक फेंसिंग लगाई जाएगी। अभी तक सिर्फ 14 जेलों में ही यह सुविधा है। यानि बड़ी संख्या में जेलें अब तक इस अहम सुरक्षा व्यवस्था से वंचित थीं। जेल विभाग के महानिदेशक (DGP) वरुण कपूर का कहना है कि मध्यप्रदेश देश का पहला राज्य होगा, जहां सभी जेलों में इलेक्ट्रिक फेंसिंग सुरक्षा व्यवस्था लागू होगी।
कैसे जुटाया 18 करोड़ का बजट?
इस जेल सुरक्षा व्यवस्था की सबसे दिलचस्प बात है इसका फंडिंग तरीका। सरकार ने इसके लिए कोई नया बजट नहीं मांगा है। जेलों के खाद्य बजट (Food Budget) में जो पैसा हर साल बच जाता था और वापस चला जाता था, उसी को इस प्रोजेक्ट में इस्तेमाल करने का फैसला किया गया है।
अधिकारियों के मुताबिक हर साल कुछ राशि खर्च नहीं हो पाती थी। वह ट्रेजरी में वापस चली जाती थी। इस बार उसी बची हुई राशि को री-अप्रोप्रियेट (पुनः आवंटित) करके इस योजना में लगाया जा रहा है। यानी बिना अतिरिक्त बोझ डाले, सुरक्षा मजबूत करने का रास्ता निकाला गया है।
कितनी बड़ी है एमपी की जेल व्यवस्था?
मध्यप्रदेश का जेल सिस्टम छोटा नहीं है। यहां हजारों कैदी अलग-अलग जेलों में बंद हैं।
राज्य की जेलों में कैदियों की संख्या इस प्रकार है:
सेंट्रल जेल: 22,900 कैदी
जिला जेल: 13,313 कैदी
सब-जेल: 5,782 कैदी
ओपन जेल (8): 124 कैदी
कुल मिलाकर 133 जेलों में 42,119 कैदी-बंदी हैं। इतनी बड़ी संख्या को सुरक्षित रखना बड़ी चुनौती है। ऐसे में सुरक्षा में छोटी सी चूक भी बड़ा खतरा बन सकती है।
अब क्या बदलेगा?
इस नई व्यवस्था के बाद जेल की दीवार फांदना लगभग असंभव हो जाएगा। बाहरी सुरक्षा कई गुना मजबूत होगी। फरारी की घटनाओं पर रोक लगेगी। जेल प्रशासन को तुरंत अलर्ट मिलेगा। पहले कई बार कैदी दीवार कूदकर भागने की कोशिश करते थे। अब यह रास्ता लगभग बंद हो जाएगा।
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