राज्य चुनाव आयोग ने खुद को अदालत समझा है क्या, समय पर चुनाव नहीं होने पर हाई कोर्ट की फटकार
Mukesh Sharma | Apr 02, 2026, 14:03 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट ने पंचायत-निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं कराने पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने आदेश की अवहेलना पर राज्य चुनाव आयुक्त राजेश्वर सिंह और सचिव राजेश वर्मा को अवमानना नोटिस जारी किया है।
News In Short
- राजस्थान में पंचायत-निकाय चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं कराने पर हाई कोर्ट सख्त।
- पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने समय पर चुनाव नहीं कराने पर दायर की है याचिका।
- हाई कोर्ट ने सुनवाई में राज्य चुनाव आयोग के प्रति दिखायी सख्त रुख।
- राज्य चुनाव आयुक्त और सचिव को नोटिस जारी कर 4 सप्ताह में मांगा जवाब।
- समय पर चुनाव नहीं कराने को लेकर अब लटकी अवमानना की तलवार।
News In Detail
कोर्ट को बताया गया कि राजस्थान हाई कोर्ट ने 14 नवंबर, 2025 के अपने आदेश से राज्य में परिसीमन पूरा करके 15 अप्रैल तक या इससे पहले राजस्थान पंचायत-निकाय चुनाव करवाने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट में भी सरकार की ओर से हाई कोर्ट के आदेश की पालना में 15 अप्रै तक चुनाव करवाने का आश्चासन दिया था। इसके बावजूद राज्य चुनाव आयोग ने पहले 22 अप्रैल तक और फिर 8 मई तक वोटर लिस्ट फाइनल करने के आदेश जारी कर दिए हैं।
बिना अदालती अनुमति के ही फैसला
सुनवाई के दौरान ही महाधिवक्ता राजेंद्र प्रसाद कोर्ट में पहुंचे। कोर्ट ने उनसे कहा कि चुनाव आयोग अपनी मर्जी से ही बिना अदालती अनुमति के चुनाव 15 अप्रैल तक नहीं करवाने का फैसला कर रहा है। क्या आयोग को कोर्ट आदेश की जानकारी नहीं थी। क्या उनको नहीं पता कि यदि समय चाहिए था तो अदालत से अनुमति लेनी होगी। इस दौरान महाधिवक्ता ने कोर्ट को संतुष्ट करने की कोशिश की ताकि नोटिस जारी ना हों और कहा कि वह जल्दी ही डिटेल में कारण बताते हुए प्रार्थना पत्र दायर करेंगे।
चुनाव आयोग की कार्यवाही कोर्ट अवहेलना
यह है मामला
इस समयावधि में अधिकतम 6 महीने की छूट मिल सकती है। सरकार ने पंचायतों में पूर्व सरपंचों को ही प्रशासक लगा दिया। हाईकोर्ट ने 14 नवंबर,2025 के आदेश से परिसीमम प्रक्रिया पूरी कर 15 अप्रैल तक या इससे पहले पंचायतों व निकायों के चुनाव करवाने के आदेश दिए थे।
सुप्रीम कोर्ट ने आदेश रखे बरकरार
इस आदेश के अनुसार राज्य चुनाव आयोग और राज्य सरकार को 15 अप्रैल से आगे चुनाव खिसकाने के लिए हाईकोर्ट से अनुमति लेनी जरुरी है। लेकिन, आयोग ने बिना अदालती अनुमति के ही वोटर लिस्ट फाइनल करने की तारीख पहले 22 अप्रैल की और फिर इसे बढ़ाकर 8 मई कर दिया। राज्य चुनाव आयोग बिना अदालती अनुमति के ऐसा नहीं कर सकता।
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