एमपी सरकार पर बढ़ा कर्ज का बोझ, लिया 2500 करोड़ का नया लोन
मार्च महीने में ही सरकार ने ₹18 हजार 700 करोड़ का कर्ज ले लिया है, और इस पूरे वित्तीय साल में कुल कर्ज ₹91,500 करोड़ तक पहुँच जाएगा।
मध्यप्रदेश सरकार का बढ़ता कर्ज
इस वित्तीय वर्ष में अब तक सरकार ने 91 हजार 500 करोड़ रुपए का कर्ज लिया है। मार्च महीने में यह कर्ज बढ़कर ₹18,700 करोड़ हो गया है। सरकार ने मार्च में पहले 3 तारीख को ₹6300 करोड़, फिर 10 मार्च को ₹5800 करोड़, और 17 मार्च को ₹4100 करोड़ कर्ज लिया गया था।
मार्च में 3 बार लिया लोन
इस महीने सरकार ने होली के मौके पर कर्मचारियों को 3 फीसदी महंगाई भत्ता देने का ऐलान किया था, इसके बाद 3 मार्च को सरकार ने 6300 करोड़ का कर्ज लिया था। फिर, लाड़ली बहनाओं (एमपी की लाड़ली बहना योजना) को राशि देने से पहले 10 मार्च को 5800 करोड़ रुपए का कर्ज लिया गया था। हाल ही में, 17 मार्च को भी सरकार ने 4100 करोड़ का कर्ज लिया।
अब क्यों लिया लोन
वित्त विभाग के नोटिफिकेशन के मुताबिक, सरकार ने शुक्रवार को ₹1500 करोड़ का कर्ज 14 साल के लिए और ₹1000 करोड़ का कर्ज 24 साल के लिए लिया है। ये कर्ज रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के जरिए लिया गया है।
इन कर्जों का इस्तेमाल कार्यक्रमों और परियोजनाओं के लिए किया जाएगा। इन कर्जों का भुगतान 30 मार्च को किया जाएगा।
नीति आयोग की चिंता
मध्यप्रदेश सरकार पर बढ़ते कर्ज और ब्याज के बारे में नीति आयोग (NITI Aayog) ने चिंता जताई है। नीति आयोग की हाल में जारी दूसरी वार्षिक फिस्कल हेल्थ इंडेक्स 2026 रिपोर्ट (Fiscal Health Index 2026 Report) में राज्य सरकार के बढ़ते कर्ज और ब्याज पर चिंता व्यक्त की गई थी। आयोग ने कहा था कि यह कर्ज बढ़ते हुए राज्य के आर्थिक स्वास्थ्य के लिए खतरा हो सकता है।
5 लाख करोड़ के पार पहुंचा कुल बोझ
नए कर्ज के साथ ही मध्य प्रदेश पर कुल कर्ज (एमपी सरकार कर्जा) का आंकड़ा अब 5 लाख 8 हजार करोड़ रुपए से ज्यादा के पार पहुंच गया है। आंकड़ों के लिहाज से देखें तो अकेले इस चालू फाइनेंसियल ईयर में ही सरकार ने 89 हजार करोड़ से ज्यादा का भारी-भरकम कर्ज उठाया है।
मध्यप्रदेश सरकार का बढ़ता कर्ज (एमपी सरकार कर्ज लेगी) और उस पर लगने वाला ब्याज राज्य के वित्तीय स्वास्थ्य के लिए एक बड़ी समस्या बन सकता है। लगातार कर्ज लेना और उसकी बढ़ती देनदारियों को देखकर सरकार को यह ध्यान रखना होगा कि कर्ज का सही तरीके से प्रबंधन किया जाए, ताकि भविष्य में इसे चुकाने में कोई दिक्कत न आए। इसके लिए सरकार को अच्छे और मजबूत योजनाएं बनानी होंगी।
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