कर्ज चुकाने को एमपी सरकार बेच रही अपनी जमीनें, 101 सरकारी संपत्तियां नीलाम
Aman Vaishnav | Mar 22, 2026, 10:26 IST
madhya pradesh lok sampatti nilam 1110 crore karj
मध्यप्रदेश सरकार कर्ज चुकाने के लिए लोक संपत्तियां बेच रही है। 2016 से अब तक 101 संपत्तियां नीलाम हो चुकी हैं और 1110 करोड़ रुपए जुटाए गए हैं। केरल, मुंबई, नागपुर और झांसी में भी MP की संपत्तियां बिकी या विवाद में हैं।
News In Short
- मध्यप्रदेश सरकार करोड़ों के कर्ज और उसके ब्याज को चुकाने के लिए लोक संपत्तियां बेच रही है।
- 2016 में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग बनने के बाद से 10 वर्षों में 101 सरकारी संपत्तियां नीलाम हो चुकी हैं।
- इन नीलामियों से सरकार को करीब 1110 करोड़ रुपए मिले हैं।
- विभाग के पास मध्यप्रदेश के बाहर दूसरे राज्यों में मौजूद सरकारी संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
- नागपुर में बस डिपो की जमीन और झांसी में 19 एकड़ जमीन विवाद या बिक्री की प्रक्रिया में है।
कर्ज का बोझ और संपत्ति बिक्री की मजबूरी
2016 में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग का गठन हुआ था। इसके बाद से अब तक करीब 10 वर्षों में 101 लोक संपत्तियां नीलाम की जा चुकी हैं। इनसे सरकार को करीब 1110 करोड़ रुपए मिले हैं।
विधानसभा में हुआ खुलासा
यह विभाग केवल मध्यप्रदेश की भिन्न-भिन्न संपत्तियों को बेचने का काम कर रहा है। वहीं दूसरे राज्यों में पड़ी सरकारी जमीनें और भवन इसकी नजर से बाहर हैं।
संपत्ति बिक्री में स्टांप शुल्क विवाद भी
केरल के वायनाड में बीनाची एस्टेट
मध्य प्रदेश सरकार की प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड (पीआईसीएल – Provident Investment Company Limited) के पास केरल के वायनाड जिले में 554 एकड़ की बीनाची एस्टेट है। इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा केरल प्राइवेट फॉरेस्ट एक्ट के तहत केरल सरकार के अधीन कर दिया गया था।
पीआईसीएल ने इस पर हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। सुनवाई में कोर्ट ने आपसी सहमति से विवाद निपटाने के निर्देश दिए थे। इस मुद्दे पर मुख्य सचिव स्तर पर बातचीत हो चुकी है। अब इसका उचित मुआवजा लेकर केरल सरकार के हाथों सैद्धांतिक सहमति से निपटाने की तैयारी है। इस संपत्ति की कीमत अरबों रुपए आंकी जा रही है।
मुंबई में दो बड़ी प्रॉपर्टी
मुंबई में ही MP सरकार की दूसरी प्रॉपर्टी एक हजार वर्गमीटर से ज्यादा की एक तीन मंजिला प्रोसेस बिल्डिंग है। इसे किराए पर दिया गया था, लेकिन बॉम्बे महानगर पालिका ने इसे जर्जर घोषित कर दिया था।
अब रीडेंसिफिकेशन स्कीम (Redensification Scheme) के तहत इसका पुनर्निर्माण कराया जा रहा है। इससे सरकार को करोड़ों की आय होने की संभावना है।
नागपुर में बस डिपो की 3 एकड़ जमीन
यूपी के झांसी में 19 एकड़ जमीन
बस डिपो और सहकारिता विभाग की संपत्तियां भी बिकीं
इसके अलावा आलीराजपुर, महिदपुर जैसे कई स्थानों की बस डिपो जमीनें भी बेची जा चुकी हैं। सहकारिता विभाग की मुरैना के जरेरुआ का तिलहन संघ प्रसंस्करण संयंत्र, पुराना जेल कंपाउंड खरगोन, ओडबर्यूही रेस्ट हाउस इटारसी, सोयाबीन प्रसंस्करण संयंत्र नाझिरखेड़ी जैसी संपत्तियां भी बेची जा चुकी हैं।
कैबिनेट में आ सकता है नया प्रस्ताव
अब लगातार इन संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर अंदरूनी प्लानिंग चल रही है। केरल की बीनाची एस्टेट को लेकर सरकार संभवतः अगली कैबिनेट बैठक में इस बिक्री से संबंधित प्रस्ताव ला सकती है।
FAQ
- मध्यप्रदेश में लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग क्या काम करता है?
लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग 2016 में मध्यप्रदेश सरकार ने बनाया था। इसका काम सरकारी संपत्तियों का रखरखाव, लेखा-जोखा और जरूरत पड़ने पर उनकी बिक्री या नीलामी करना है। इस विभाग के जरिए सरकार राजस्व जुटाती है। 2016 से 2025 तक करीब 10 वर्षों में इसने 101 सरकारी संपत्तियां नीलाम की हैं और करीब 1110 करोड़ रुपए जुटाए हैं। हालांकि इस विभाग के पास प्रदेश से बाहर दूसरे राज्यों में मौजूद संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। - केरल के वायनाड में MP की बीनाची एस्टेट का विवाद क्या है?
केरल के वायनाड जिले में मध्यप्रदेश सरकार की प्रोविडेंट इन्वेस्टमेंट कंपनी लिमिटेड के पास 554 एकड़ की बीनाची एस्टेट है। इस जमीन का एक बड़ा हिस्सा केरल प्राइवेट फॉरेस्ट एक्ट के तहत केरल सरकार के अधीन कर लिया गया था। पीआईसीएल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। कोर्ट ने आपसी सहमति से निपटाने के निर्देश दिए। अब मुख्य सचिव स्तर पर बातचीत हो चुकी है और उचित मुआवजा लेकर केरल सरकार को सौंपने की सैद्धांतिक सहमति बन रही है। इस संपत्ति की कीमत अरबों रुपए में आंकी जा रही है। - MP सरकार की संपत्तियाँ बेचने के दौरान क्या अनियमितताएं सामने आईं?
संपत्तियों की बिक्री के दौरान कई अनियमितताएं सामने आई हैं। पहली बात यह कि कई संपत्तियां बेचते समय स्टांप शुल्क नहीं चुकाया गया। बाद में यह खुलासा हुआ तो पंजीयन अधिकारियों ने बकाया वसूली के लिए कार्रवाई शुरू की। दूसरी बात यह कि विभाग के पास दूसरे राज्यों में मौजूद संपत्तियों का कोई रिकॉर्ड नहीं है। तीसरी बात यह कि कुछ संपत्तियों पर कोर्ट में विवाद चल रहे हैं और कई मामलों में अदालती आदेशों का पालन नहीं हुआ।
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