OBC को 27% आरक्षण पर अब सामान्य वर्ग का विरोध, मेरिट होल्डर के शिफ्टिंग से मिलते हैं कम पद, कमलनाथ सरकार ने यह भी बनाया था नियम

Sanjay Gupta | Sept 01, 2025, 21:00 IST
obc-27-percent-reservation-general-category-opposition-merit-holders-issue
मध्‍य प्रदेश में ओबीसी को 27% आरक्षण के मामले में सामान्य वर्ग का विरोध बढ़ गया है। मेरिट होल्डर के कम पद मिलने की समस्या और कमलनाथ सरकार के क्या थे नियम, जानें द सूत्र की इस रिपोर्ट में...

मध्य प्रदेश में साल 2019 से चल रहे ओबीसी आरक्षण विवाद को लेकर कई सारे विवाद चल रहे हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की सख्ती के बाद इसमें अंतिम फैसले की घड़ी आ चुकी है। सितंबर माह में इसका हल होने की उम्मीद है। इसी के चलते सभी राजनीतिक दल भी वोट की राजनीति में साथ आ गए हैं। साथ ही, मिलकर ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण दिलाने की बात कह रहे हैं।



अब इस मामले में एक नई राजनीति ने करवट ली है। अब सामान्य वर्ग ने भी लड़ाई के लिए कमर कसी है। इसमें विविध समाजों को साथ लिया जा रहा है। साथ ही बड़े अधिवक्ताओं को सुप्रीम कोर्ट में उतारने की तैयारी है, जिससे किसी भी हाल में इंदिरा साहनी केस में लगी 50 फीसदी आरक्षण की सीमा को पार करने और 27 फीसदी OBC आरक्षण का फैसला नहीं हो।



MP की राजनीति अब सामान्य वर्ग V/S ओबीसी की ओर

8ef01eb5-2f0


ये खबर भी पढ़िए...ओबीसी को 27% आरक्षण में अब यादव समाज ने की जाति आधार पर हिस्सा देने की मांग, 15 प्रतिशत हमें दिया जाए



सौ फीसदी पद ही आरक्षित कर दीजिए फिर

विविध दलों की बैठक के बाद यह सामान्य वर्ग ने भी तय किया है कि इस लड़ाई को लड़ना होगा और वह किसी भी हाल में यह 13 फीसदी होल्ड पद ओबीसी के पक्ष में नहीं जाने देना चाहते हैं। इसके लिए अब सोशल मीडिया पर अभियान भी शुरू हो गया है। इसमें तो मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को यहां तक अपील करते हुए कहा गया है कि - सभी 100 फीसदी ही फिर ओबीसी, एसटी, एसी वर्ग को दे दीजिए। हमें पूरी तरह से सरकारी भर्तियों से प्रतिबंधित ही कर दिया जाए।



50 फीसदी सामान्य के नहीं अनारक्षित के पद हैं

युवाओं का कहना है कि यह 50 फीसदी पद अनारक्षित श्रेणी के हैं, न कि सामान्य वर्ग के। इस 50 फीसदी में से कई पद मेरिट के आधार पर विभिन्न आरक्षित श्रेणियों के लोग ले जाते हैं। ऐसे में इसमें से 50 फीसदी में मुश्किल से आधे पद ही सामान्य वर्ग के लिए बचते हैं।



अनारक्षित यानी UR के पद जा रहे कैटेगरी मेरिट होल्डर को

  1. राज्य सेवा परीक्षा 2025 के प्री के रिजल्ट की बात करें तो इसमें 1140 उम्मीदवार अनारक्षित में चयनित हुए। आयोग द्वारा हाईकोर्ट में पेश किए गए दस्तावेज के आधार पर इसमें 42 पद एससी के, 5 एसटी के, 381 ओबीसी के और ईडब्ल्यूएस के 262 चयनित हुए। कुल 1140 में से 690 आरक्षित श्रेणियों के मेरिट की वजह से अनारक्षित श्रेणी में पहुंचे हैं, यानी 60 फीसदी श्रेणियों के पास गए। यानि सामान्य वर्ग को 40 फीसदी की जगह मिली।
  2. साल 2020 की राज्य सेवा परीक्षा में डिप्टी कलेक्टर के अनारक्षित वर्ग के 8 पद थे, इसमें 3 महिलाओं के और 5 पुरुषों के थे। इसमें दो सीट (एक ओबीसी और एक ईडब्ल्यूएस) अन्य श्रेणियों ने मेरिट पर हासिल की। यानी सामान्य वर्ग को 8 में 6 पद ही मिले।
  3. साल 2021 की राज्य सेवा परीक्षा के अंतिम रिजल्ट में अनारक्षित में डिप्टी कलेक्टर के 8 ही पद थे, इसमें से एक-दो नहीं बल्कि पांच सीट अन्य श्रेणियों वालों के पास गई। यानी सामान्य वर्ग को 8 में से केवल 3 सीट मिली।
  4. साल 2022 की राज्य सेवा परीक्षा में भी डिप्टी कलेक्टर के अनारक्षित में 8 पद थे, इसमें से 4 पद अन्य श्रेणियों वालों को मेरिट पर मिली। यानी 8 में से 4 पद ही सामान्य वर्ग पहुंच सके।
  5. पुलिस कांस्टेबल की ईएसबी द्वारा 2023 की ली गई परीक्षा में, इसमें टॉप टेन में केवल 1 सामान्य वर्ग का उम्मीदवार था, इसमें 8 ओबीसी के और एक ईडब्ल्यूएस के पास गया।
  6. असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती परीक्षा 2022 में भूगोल विषय में अनारक्षित श्रेणी में 14 पद थे, इसमें से 6 पर ही सामान्य वर्ग का उम्मीदवार जगह बना सका।

ये खबर भी पढ़िए...MP News: ओबीसी आरक्षण को लेकर इंदौर में भी कांग्रेस का प्रदर्शन, बीजेपी को बताया देरी का जिम्मेदार



कमलनाथ सरकार ने यह भी नियम बनाया था

कमलनाथ सरकार ने जब साल 2019 में ओबीसी को 27 फीसदी आरक्षण का नियम बनाया था तो साथ ही परीक्षा नियम 2015 में भी एक बड़ा संशोधन किया था। इसके तहत आरक्षण बढ़ाने के साथ ही हर श्रेणी का मेरिट के आधार पर मूवमेंट बंद कर दिया गया, यानी एसटी, एससी, ओबीसी या ईडब्ल्यूएस श्रेणी वाला उसी श्रेणी में ही रहेगा और वह अनारक्षित में नहीं जाएगा।



यह आदेश लेकिन मेरिट होल्डर उम्मीदवारों को रोकने के सुप्रीम कोर्ट के विविध आदेशों के खिलाफ था। इसे हाईकोर्ट जबलपुर ने रद्द घोषित कर दिया। इसके बाद फिर पुरानी स्थिति बहाल कर दी गई, यानी मेरिट के आधार पर श्रेणी वाला उम्मीदवार अनारक्षित में जगह बनाएगा।



930e4d8e-13f


परीक्षा नियम 2015 को लेकर जारी है याचिका

उधर साल 2000 में मध्य प्रदेश सरकार के सर्कुलर हो या केंद्रीय कार्मिक (डीओपीटी) विभाग के नियम। इसी तहत परीक्षा नियम 2015 है, जिसमें एक नियम यह भी है कि यदि किसी ने अपने आरक्षित वर्ग में मिली छूट का लाभ लिया है तो वह अंतिम चयन परिणाम में भी उसी श्रेणी में रहेगा भले ही वह मेरिट के आधार पर ऊपर आ सकता हो। जैसे चर्चित टीना डाबी केस, उन्हें प्री में कटऑफ में आरक्षित वर्ग के कटऑफ की छूट ली थी, इसके चलते वह प्री पास हो सकी और बाद में अंतिम मेरिट में वह देश भर में टॉपर होने के बाद भी आरक्षित वर्ग में ही रही।



मुख्य छूट में उम्र सीमा छूट और प्री कटऑफ छूट ही आती है, फीस जैसी छूट शामिल नहीं की जाती है। इसे लेकर याचिका हाईकोर्ट जबलपुर में लगी है, जिसमें राज्य सेवा परीक्षा 2025 के विज्ञापन में परीक्षा नियम 2015 को चुनौती दी गई है और मांग की गई है कि यह आरक्षण के मूल सिद्धांत के खिलाफ है और भले ही उसने अन्य छूट ली हो, लेकिन श्रेणी वाले उम्मीदवार को अंकों के आधार मेरिट में अनारक्षित में जाने से नहीं रोका जा सकता है। इस मामले में अभी सुनवाई जारी है और 4 सितंबर की तारीख लगी हुई है।



9c904d90-cb0


ये खबर भी पढ़िए...27% ओबीसी आरक्षण पर सीएम ने बुलाई सर्वदलीय बैठक, MPPSC अभ्यर्थियों को मिल सकती है बड़ी राहत



ओबीसी वर्ग आबादी से मांग रहा अधिकार

उधर सुप्रीम कोर्ट में ओबीसी वर्ग आबादी के आधार पर अपने हक की मांग कर रहा है। ओबीसी वर्ग का कहना है कि मध्य प्रदेश में 51 फीसदी आबादी ओबीसी की है और इनका सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व 13.66 फीसदी मात्र है।



ऐसे में इस वर्ग को सामाजिक, आर्थिक पिछड़ेपन की वजह से आगे आने का मौका मिलना चाहिए और यह 27 फीसदी ओबीसी आरक्षण बनता है। इसलिए इसे लागू करते हुए 13 फीसदी होल्ड पद हमें दिए जाएं।



इन वर्ग का साफ कहना है कि वैसे ही इंदिरा साहनी केस की 50 फीसदी आरक्षण की दीवार ईडब्ल्यूएस को आरक्षण देकर तोड़ी जा चुकी है। छत्तीसगढ़ में भी अधिक आरक्षण पर भर्ती की अंतरिम मंजूरी सुप्रीम कोर्ट दे चुका है, फिर मध्य प्रदेश में इसे लागू करने में कोई समस्या नहीं है। क्योंकि इंदिरा साहनी केस में भी असाधारण स्थिति में और आंकड़ों के आधार पर इसे पार किया जा सकता है और मध्य प्रदेश में यह असाधारण स्थिति मौजूद है, जिससे ओबीसी को आरक्षण दिया जा सके।



FAQ

  1. OBC को 27% आरक्षण क्यों चाहिए?
    OBC वर्ग का कहना है कि उनकी आबादी का 51% हिस्सा होने के बावजूद सरकारी नौकरियों में उनका प्रतिनिधित्व सिर्फ 13.66% है। इसलिए, उन्हें 27% आरक्षण मिलना चाहिए ताकि वे सामाजिक और आर्थिक पिछड़ेपन से बाहर आ सकें।
  2. सामान्य वर्ग का OBC आरक्षण पर विरोध क्यों है?
    सामान्य वर्ग का कहना है कि OBC आरक्षण के कारण उन्हें सरकारी नौकरियों में कम अवसर मिल रहे हैं। वे चाहते हैं कि अनारक्षित पदों पर केवल सामान्य वर्ग के उम्मीदवारों का चयन हो, और ओबीसी के लिए आरक्षित पदों को बढ़ाया जाए।
  3. कमलनाथ सरकार ने OBC आरक्षण के लिए कौन से नियम बनाए थे?
    कमलनाथ सरकार ने 2019 में OBC को 27% आरक्षण देने का निर्णय लिया था। इसके साथ ही परीक्षा नियम 2015 में संशोधन किया था ताकि उम्मीदवार अपनी श्रेणी के अनुसार ही पदों पर चयनित हो सकें।

thesootr links

दसूत्र की खबरें आपको कैसी लगती हैं? Google my Business पर हमें कमेंट केसाथ रिव्यू दें। कमेंट करने के लिए इसी लिंक पर क्लिक करें



अगर आपको ये खबर अच्छी लगी हो तो 👉 दूसरे ग्रुप्स, 🤝दोस्तों, परिवारजनों के साथ शेयर करें📢🔃🤝💬👩‍👦👨‍👩‍👧‍👧👩



ओबीसी आरक्षण का मामला | ओबीसी आरक्षण का मुद्दा



Tags:
  • MP News
  • मध्यप्रदेश
  • डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ला
  • कमलनाथ सरकार
  • मोहन यादव
  • मध्य प्रदेश सरकार
  • राज्य सेवा परीक्षा
  • ओबीसी आरक्षण
  • ओबीसी आरक्षण का मामला
  • OBC आरक्षण
  • ओबीसी आरक्षण का मुद्दा
  • 27 फीसदी OBC आरक्षण