एमपी में सड़क हादसे रोकने को सचिवालय बनाने की तैयारी, हर साल हो रहीं 15 हजार मौतें

thesootr Desk | Apr 15, 2026, 16:07 IST
road accidents
मध्यप्रदेश में हर साल बिगड़ी सड़कों के कारण 12 से 15 हजार लोगों की मौत होती है। अब इन हादसों को रोकने के लिए सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने का प्रस्ताव है। मुख्य सचिव ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्यप्रदेश में हर साल बिगड़ी सड़कों से 12 से 15 हजार मौतें होती हैं।
  • इन हादसों की मुख्य वजह ओवरलोडिंग और अनफिट गाड़ियाँ हैं।
  • हादसे रोकने को सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने का प्रस्ताव आया।
  • परिवहन विभाग के इस प्रस्ताव पर मुख्य सचिव ने सहमति दी।
  • सचिवालय में कई विभाग मिलकर काम करेंगे, खर्च 1.8 करोड़ रुपए मासिक होगा।

हर साल 15 हजार मौतें

मध्यप्रदेश की सड़कें हर साल हजारों जिंदगियां ले लेती हैं। साल 2021 से 2025 के बीच हर साल 12 से 15 हजार लोगों की मौत सड़क हादसों में हुई। ये हादसे ज्यादातर बिगड़ी सड़कों, ओवरलोडिंग और सड़क पर चलने वाली अनफिट गाड़ियों की वजह से हो रहे हैं।



अब तक हादसों की वजह दूर करने की जिम्मेदारी किसी एक विभाग की नहीं थी। कभी पुलिस किसी दूसरे विभाग पर दोष मढ़ती, तो कभी PWD (Public Works Department) दूसरों पर। एनएचएआई (National Highway Authority of India), एमपीआरडीसी (Madhya Pradesh Road Development Corporation) और राज्य पुलिस एक छत के नीचे काम नहीं करते थे। इस बिखरी हुई व्यवस्था को ठीक करने के लिए अब सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की तैयारी हो रही है।



क्या होगा सचिवालय में

परिवहन विभाग ने यह प्रस्ताव रखा कि सभी संबंधित विभागों को एक मंच पर लाया जाए। इस सचिवालय में लीड एजेंसी परिवहन विभाग होगी। यहां नीतियां बनाई जाएंगी और उन्हें लागू भी किया जाएगा। ट्रैफिक नियमों और सड़क सुरक्षा पर जागरूकता फैलाई जाएगी।



इसके अलावा दुर्घटनाओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। सड़क सुरक्षा के मामलों की समीक्षा और निगरानी भी इसी सचिवालय से होगी। विभाग मिलकर हादसों को नियंत्रित करने की कोशिश करेंगे। यह एक बड़ा संस्थागत बदलाव होगा।



मुख्य सचिव ने दी हरी झंडी

परिवहन विभागका यह प्रस्ताव मुख्य सचिव अनुराग जैन के पास पहुंचा। उन्होंने इसे सैद्धांतिक मंजूरी (Theoretical Approval)दे दी है। इसके बाद सचिवालय बनाने की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। प्रस्ताव पर विचार के लिए कमेटी की बैठकें भी हो चुकी हैं।



प्रस्ताव के मुताबिक सचिवालय चलाने में हर महीने करीब 1.8 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। यह रकम राज्य सरकार वहन करेगी। सचिवालय का काम शुरू होते ही मध्यप्रदेश में सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी पहली बार एकजुट होकर एक जगह आएगी।



सुप्रीम कोर्ट का निर्देश भी है आधार

केंद्र और सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) की एक समिति ने पहले ही राज्यों को सड़क सुरक्षा सचिवालय बनाने की गाइडलाइन दी थी। इस निर्देश के तहत अलग लीड एजेंसी बनाकर स्टेट रोड सेफ्टी काउंसिल (State Road Safety Council) के आदेशों का पालन करना था।



इस दिशा में गुजरात, राजस्थान और केरल जैसे राज्यों ने पहले से अच्छा काम किया है। मध्यप्रदेश अब इस कतार में शामिल होने जा रहा है। सड़क सुरक्षा पर मध्यप्रदेश में यह पहल काफी समय से लंबित थी।



फुल टाइम अफसर होंगे तैनात

सचिवालय में फुल टाइम अफसर (Full Time Officers) तैनात किए जाएंगे। इससे हादसों (सड़क हादसे) की निगरानी और रोकथाम में देरी नहीं होगी। अभी तक जो काम आधे-अधूरे मन से होता था, वो अब एक केंद्रीय तंत्र से संभाला जाएगा। यह बदलाव जमीन पर कितना असर दिखाएगा, यह आने वाले समय में साफ होगा।



अब शुरू होगी असली परीक्षा

प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। लेकिन असली चुनौती सचिवालय को जमीन पर उतारने की होगी। विभागों के बीच समन्वय बनाना आसान काम नहीं है। पिछले कई सालों में हादसों के आंकड़े कम नहीं हुए हैं। अब देखना होगा कि नया ढांचा कितनी जल्दी काम करना शुरू करता है और मौतों का सिलसिला रुकता है या नहीं।



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