सिवनी जंबो सीताफल को मिला जीआई टैग, किसानों को ऐसे होगा फायदा
समझें क्या है पूरा मामला
- मध्यप्रदेश के सिवनी जिले के जंबो सीताफल को भौगोलिक संकेतक यानी जीआई टैग मिल गया है।
- यह सीताफल अपने बड़े आकार और मीठे स्वाद के लिए पूरे देश में मशहूर है।
- भूतबंधानी क्षेत्र में उगने वाले कुछ फलों का वजन 800 ग्राम से एक किलो तक पहुंच जाता है।
- जीआई टैग मिलने से अब इस फल की नकल नहीं की जा सकेगी।
- सिवनी के हजारों किसानों को इससे सीधा आर्थिक फायदा मिलेगा।
सिवनी का सीताफल है खास क्यों
सिवनी का जंबो सीताफल सामान्य सीताफल से काफी अलग है। इसका औसत वजन 200 से 650 ग्राम के बीच होता है। भूतबंधानी इलाके में कुछ फल 800 ग्राम से एक किलो तक के भी मिलते हैं।
यह फल प्राकृतिक रूप से उगता है। इसमें कोई खास रासायनिक खाद नहीं डाली जाती। इसीलिए इसका स्वाद दूसरे सीताफलों से बेहतर माना जाता है।
जीआई टैग क्या होता है और क्यों जरूरी है
जीआई टैग यानी भौगोलिक संकेतक (GI – Geographical Indication) एक कानूनी पहचान है। यह किसी खास उत्पाद को उसकी भौगोलिक उत्पत्ति के आधार पर मिलती है।
एक बार टैग मिलने के बाद दूसरा कोई उस नाम का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इससे असली उत्पाद की पहचान सुरक्षित रहती है और किसानों को बाजार में ज्यादा दाम मिलते हैं।
2023 में किया था आवेदन
सिवनी के सहायक संचालक उद्यानिकी डॉ. आशा उपवंशी-वासेवार ने बताया कि वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के जरिए जीआई टैग के लिए आवेदन किया गया था। कलेक्टर सिवनी और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में यह काम हुआ।
तीन साल की मेहनत के बाद अब यह मान्यता मिली है। यह उपलब्धि जिले के किसानों और प्रशासन दोनों के लिए बड़ी खुशखबरी है।
695 हेक्टेयर में होती है खेती
फिलहाल सिवनी जिले में करीब 695 हेक्टेयर जमीन पर सीताफल की खेती हो रही है। हर साल करीब 6090 मीट्रिक टन उत्पादन होता है।
यह फल दिल्ली, मुंबई, नागपुर, रायपुर और वाराणसी जैसे बड़े शहरों में बिकता है। मांग देशभर में है और अब जीआई टैग से विदेशों में भी रास्ता खुलेगा।
सिर्फ फल नहीं, पूरी वैल्यू चेन तैयार
सीताफल का इस्तेमाल सिर्फ फल के रूप में नहीं होता। इससे पल्प बनाया जाता है जो आइसक्रीम, रबड़ी, बासुंदी, लस्सी और मिठाइयों में काम आता है।
इसके पत्ते और छिलके जैविक खाद और दवाइयां बनाने में उपयोगी हैं। जिले में दो एफपीओ (FPO – Farmer Producer Organisation) और तीन पल्प प्रोसेसिंग प्लांट पहले से काम कर रहे हैं।
किसानों की आमदनी बढ़ेगी, रोजगार भी मिलेगा
डॉ. उपवंशी-वासेवार के मुताबिक जीआई टैग से सिवनी के हजारों सीताफल किसानों को सीधा फायदा होगा। उत्पाद की मांग और दाम दोनों बढ़ने की उम्मीद है।
प्रोसेसिंग गतिविधियों के बढ़ने से स्थानीय स्तर पर नए रोजगार भी मिलेंगे। यह टैग किसानों की पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मंच पर मजबूत करेगा।
कलेक्टर ने दी बधाई
कलेक्टर नेहा मीना ने इस उपलब्धि पर किसानों, उद्यानिकी विशेषज्ञों और जिला प्रशासन को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह जिले की कृषि विरासत को मजबूत करने की दिशा में जरूरी कदम है।
उनका कहना था कि इससे क्षेत्रीय आर्थिक विकास को नई गति मिलेगी। अब सिवनी का सीताफल देश-विदेश के बाजारों में अपनी असली पहचान के साथ पहुंचेगा।
FAQ
- सिवनी के सीताफल को जीआई टैग कब और कैसे मिला?
वर्ष 2023 में भूतबंधानी सीताफल क्रॉप प्रोड्यूसर कंपनी लिमिटेड के जरिए आवेदन किया गया था। कलेक्टर और उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन में यह प्रक्रिया पूरी हुई। तीन साल बाद 2026 में यह मान्यता मिली है। - जीआई टैग से किसानों को क्या फायदा होगा?
जीआई टैग मिलने से सिवनी के सीताफल की नकल नहीं हो सकेगी। बाजार में इसकी अलग पहचान और बेहतर दाम मिलेंगे। प्रोसेसिंग और निर्यात बढ़ने से स्थानीय रोजगार भी बढ़ेगा। - सिवनी में कितने किसान सीताफल उगाते हैं?
जिले में करीब 695 हेक्टेयर में सीताफल की खेती होती है। हर साल करीब 6090 मीट्रिक टन उत्पादन होता है। दो एफपीओ और तीन पल्प प्रोसेसिंग प्लांट भी काम कर रहे हैं।
ये खबरें भी पढ़ें...
एमपी बीजेपी कार्यसमिति का ऐलान, 41 स्थाई और 106 प्रदेश सदस्य नियुक्त
सेव के बाद रतलाम की बालम ककड़ी और गराडू को मिला GI टैग
एमपी के कोचिंग सेंटरों में सुरक्षा राम भरोसे, प्रशासन को हादसे का इंतजार!
एमपी में नए सत्र से घर बैठे होगी पढ़ाई, ऑनलाइन कोर्स से मिलेंगे रेगुलर क्रेडिट