MP में शिक्षकों का बढ़ेगा काम, ई-अटेंडेंस के बाद अब देना होगा बच्चों की पढ़ाई का हिसाब-किताब
मध्यप्रदेश के सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के लिए अब नई व्यवस्था की तैयारी है। पहले शिक्षकों की उपस्थिति जांचने के लिए ई-अटेंडेंस (E-Attendance) शुरू की गई थी। अब यह भी देखा जाएगा कि शिक्षक कक्षा में बच्चों को क्या पढ़ा रहे हैं और बच्चे कितना सीख रहे हैं।
दरअसल, गुना जिले में शिक्षकों की ऑनलाइन उपस्थिति 99 फीसदी तक दर्ज हो रही है। इसके बावजूद विद्यार्थियों की पढ़ाई का स्तर उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ा है। इसे देखते हुए अब शिक्षा विभाग का ध्यान बच्चों की पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने पर है।
फरवरी में प्रस्तावित बोर्ड परीक्षाओं और स्कूलों की वार्षिक परीक्षाओं को देखते हुए पढ़ाई की निगरानी बढ़ाने की तैयारी की जा रही है।
अब बच्चों से सवाल पूछकर जांचेंगे पढ़ाई
स्कूलों के निरीक्षण के दौरान अब केवल शिक्षकों की उपस्थिति और स्कूल के रजिस्टर ही नहीं देखे जाएंगे। बच्चों से उनकी पढ़ाई से जुड़े सवाल भी पूछे जा सकते हैं।
निरीक्षण करने वाले अधिकारी बच्चों की कॉपियां देखेंगे और यह जानने की कोशिश करेंगे कि शिक्षक ने जो पाठ पढ़ाया है, वह बच्चों को समझ में आया या नहीं।
खासकर गणित, अंग्रेजी और विज्ञान जैसे विषयों पर अधिक ध्यान दिया जाएगा। इससे पता चलेगा कि शिक्षक सिर्फ कोर्स पूरा करवा रहे हैं या बच्चे वास्तव में कुछ सीख भी रहे हैं।
इन चार तरीकों से होगी पढ़ाई की निगरानी
स्कूलों में पढ़ाई की गुणवत्ता सुधारने के लिए चार प्रमुख कामों पर जोर दिया जा सकता है।
1. हर सप्ताह पढ़ाई की समीक्षा: शिक्षक ने कितना पाठ्यक्रम पूरा कराया है, इसकी जांच होगी।
2. कॉपियों की जांच: बच्चों की कॉपियां, होमवर्क और अभ्यास कार्य देखे जाएंगे।
3. साप्ताहिक टेस्ट: Weekly Test के जरिए पता लगाया जाएगा कि बच्चों को पढ़ाया गया पाठ कितना समझ आया है।
4. कमजोर बच्चों के लिए अलग कक्षाएं: पढ़ाई में पीछे रहने वाले बच्चों को अतिरिक्त समय देकर तैयारी कराई जाएगी।
शिक्षकों को देना होगा कोर्स का हिसाब
अब स्कूलों में हर शिक्षक की विषयवार जिम्मेदारी तय करने पर जोर रहेगा। किस शिक्षक को कौन-सा विषय पढ़ाना है और कितनी कक्षाएं लेनी हैं, इसकी जानकारी रखी जाएगी।
इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि तय समय में कितना कोर्स पूरा हुआ और कितना बाकी है।
जिन विषयों में पढ़ाई पीछे चल रही होगी, उनके लिए अतिरिक्त कक्षाएं लगाने की जरूरत होगी। कोशिश रहेगी कि परीक्षाओं से पहले बच्चों का पूरा पाठ्यक्रम समय पर खत्म हो जाए।
कमजोर बच्चों पर रहेगा खास ध्यान
परीक्षाओं से पहले ऐसे विद्यार्थियों की पहचान की जाएगी, जो पढ़ाई में कमजोर हैं। इसके लिए साप्ताहिक और मासिक टेस्ट के परिणामों का सहारा लिया जा सकता है।
टेस्ट के नतीजों से पता चलेगा कि किस बच्चे को गणित, अंग्रेजी, विज्ञान या दूसरे विषयों में अधिक तैयारी की जरूरत है।
इन विद्यार्थियों के लिए अतिरिक्त अभ्यास और दोबारा पढ़ाई कराने पर जोर रहेगा। जिन स्कूलों का पिछला परीक्षा परिणाम खराब रहा है, वहां निगरानी और बढ़ाई जा सकती है।
अब सिर्फ अटेंडेंस नहीं, पढ़ाई भी होगी जरूरी
अब तक ई-अटेंडेंस के जरिए यह देखा जा रहा था कि शिक्षक समय पर स्कूल पहुंच रहे हैं या नहीं। अब पढ़ाई की प्रगति (Learning Progress) का रिकॉर्ड तैयार करने पर भी जोर दिया जाएगा।
इससे शिक्षा विभाग को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस स्कूल में पढ़ाई अच्छी चल रही है और कहां सुधार की जरूरत है।
हालांकि, यह व्यवस्था अभी निगरानी बढ़ाने की तैयारी के स्तर पर बताई गई है। इसके सभी प्रावधान लागू होने या कोई नया आदेश जारी होने की जानकारी सामने नहीं आई है।