उज्जैन महाकाल मंदिर के गर्भगृह में किस-किस VIP को दी गई मंजूरी, इस पर चौंका देगा मंदिर समिति का ये जवाब

Sanjay Gupta | Sept 08, 2025, 11:18 IST
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उज्जैन महाकाल मंदिर में आम भक्तों और वीआईपी भक्तों के बीच हो रहे भेदभाव पर इंदौर हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई थी, जिसे खारिज कर दिया गया। इस मामले में...

उज्जैन महाकाल मंदिर में आम और वीआईपी भक्तों को लेकर हो रहे भेदभाव को लेकर हाईकोर्ट इंदौर में लगी याचिका खारिज हो चुकी है। इस मामले में हाईकोर्ट ने वीआईपी किसे माने या नहीं माने इसे लेकर अहम टिप्पणी भी की है। साथ ही कहा कि वीआईपी किसे माना जाए यह सक्षम अधिकारी (उज्जैन महाकाल मंदिर के मामले में कलेक्टर) के विवेक पर निर्भर है। लेकिन सक्षम अधिकारी किसे वीआईपी मान रहे हैं और किसे मंजूरी दे रहे हैं, इस पर सूचना के अधिकार में मिली जानकारी चौंकाने वाली है। हाल ही में विधायक गोलू शुक्ला के पुत्र रुद्राक्ष गोलू शुक्ला के गर्भगृह में जाने और विवाद के चलते यह मुद्दा उठा था।



इन सभी वीआईपी की मांगी गई थी जानकारी

एक आम भक्त द्वारा सूचना के अधिकार में हाल के समय में भगवान महाकाल मंदिर के गर्भगृह में जाकर दर्शन, पूजा करने वालों के नाम देते हुए पूछा गया था कि इन्हें मंजूरी किसके आदेश से दी गई थी, और आदेश की कॉपी दी जाए।



इन सभी को लेकर यह जानकारी मांगी गई थी

  • 9 अगस्त 2024 को बीजेपी विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा व उज्जैन सराफा मंडल अध्यक्ष को महाकाल मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश की मंजूरी किसके आदेश पर दी गई।
  • बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा व उनके सहायकों को दर्शन मंजूरी किनके आदेश पर दी गई।
  • मई 2025 में सीएम देवेंद्र फणडवीस को मंजूरी किन्होंने दी।
  • 19 अगस्त 2024 को छत्तीसगढ़ के सीएम व परिवार को किन्होंने मंजूरी दी।
  • मार्च 2025 में कारोबारी बाबा कल्याणी को किसने मंजूरी दी।
  • 19 अगस्त 24 को वीडी शर्मा और उज्जैन बीजेपी जिलाध्यक्ष बहादुर सिंह बरमुण्डला व साथियों को मंजूरी किन्होंने दी।
  • 5 फरवरी 2025 को कार्तिकेय चौहान, कुणाल चौहान को मंजूरी किनके आदेश से हुई।
  • 8 जुलाई 2024 को बीजेपी प्रदेश संगठन प्रभारी महेंद्र सिंह चौहान को किनके द्वारा मंजूरी दी गई।

मंदिर समिति ने यह दिया जवाब

इस मामले में मंदिर समिति ने मात्र दो शब्दों में जवाब दिया है। कहा गया है- संधारित नहीं। यानी कि उनके पास इसके रिकॉर्ड मौजूद नहीं है। यानी कि किस वीआईपी को मंदिर प्रबंध समिति द्वारा गर्भगृह में प्रवेश की मंजूरी दी जाती है, इसका रिकॉर्ड कार्यालय श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति उज्जैन द्वारा नहीं रखा जाता है।



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समिति ने इनके लिए रखी है वीआईपी व्यवस्था

वहीं मंदिर प्रबंध समिति की 13 जुलाई 2023 के तहत फैसला लिया गया था कि- राजकीय अतिथि व अतिविशिष्ट अतिथियों को मंदिर के गर्भगृह में प्रवेश के लिए कलेक्टर अधिकृत रहेंगे। यह फैसला लगातार लागू है। इसके चलते आम भक्तों को गर्भगृह में जाने पर रोक है।



हाईकोर्ट ने इस मामले में लगी याचिका पर यह दिया आदेश

हाईकोर्ट ने आदेश में कहा कि- मंदिर के गर्भगृह में अतिविशिष्ट व्यक्ति ही प्रवेश कर सकता है। महाकालेश्वर मंदिर के प्रशासक (कलेक्टर) की राय में कौन अतिविशिष्ट कौन है, इसका फैसला रिट याचिका के जरिए नहीं हो सकता है, यह पूरी तरह से सक्षम प्राधिकारी के विवेक पर निर्भर है। किसी व्यक्ति की स्थिति को देखते हुए किसी विशेष दिन, कलेक्टर उसे भगवान को जल चढ़ाने के उद्देश्य से वीआईपी मानने के लिए सक्षम प्राधिकारी होगा। वीआईपी व्यक्तियों की प्रबंध समिति द्वारा कोई स्थायी सूची या प्रोटोकॉल प्रकाशित नहीं हुई है। इसलिए रिट से यह तय नहीं हो सकता है किसी विशेष दिन आने वाले व्यक्तियों में से कौन वीआईपी होगा।



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वीआईपी को कहीं परिभाषित नहीं किया गया है

हाईकोर्ट जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस बिनोद कुमार दिवेदी ने आदेश में यह भी कहा कि किसी भी वैधानिक अधिनियम या नियम में वीआईपी को परिभाषित नहीं किया गया है। इसलिए किसी भी व्यक्ति को जिसे सक्षम प्राधिकारी द्वारा गर्भगृह के अंदर प्रवेश करने की मंजूरी दी जाती है, उसे किसी विशेष दिन और समय पर वीआईपी माना जा सकता है। यह व्यवस्था भारत के सभी धार्मिक स्थलों पर लागू होती है। ऐसा लगता है कि याचिकाकर्ता व्यक्तिगत रूप से व्यथित है, इसलिए यह याचिका खारिज की जाती है।



यह थी वीआईपी और आम भक्तों को लेकर याचिका

हाईकोर्ट में 18 अगस्त को इंदौर निवासी याचिकाकर्ता दर्पण अवस्थी ने वकील चर्चित शास्त्री के माध्यम से जनहित याचिका दाखिल की थी। एडवोकेट शास्त्री ने तर्क दिया था कि दूर-दराज से आने वाले आम श्रद्धालुओं को गर्भगृह में प्रवेश नहीं दिया जाता। जबकि नेता पुत्रों, सराफा एसोसिएशन अध्यक्ष और कई लोगों को वीवीआईपी मानकर गर्भगृह में प्रवेश दिया जाता है। आम भक्तों को भी गर्भगृह में प्रवेश दिया जाए। इस पर सुनवाई के बाद मामला सुरक्षित रख लिया गया था। अब याचिकाकर्ता का कहना है कि वह इस आदेश के खिलाफ अपील करेंगे।



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