महाकाली नंदगिरी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर, जानें कौन है ये अघोरी साधिका

Jitendra Shrivastava | Mar 14, 2026, 17:45 IST
Photograph: (thesootr)
UJJAIN. महाकाली नंदगिरी, तेलंगाना की सबसे कम उम्र की अघोरी साधिका को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर नियुक्त किया गया। अघोरी साधना और सनातन परंपरा के लिए जानी जाती हैं।

News In Short

  • महाकाली नंदगिरी बनीं किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर।
  • अघोरी साधना से प्रसिद्ध महाकाली नंदगिरी की यात्रा।
  • सनातन परंपरा के प्रचार में महाकाली नंदगिरी सक्रिय।
  • महाकाली नंदगिरी का तंत्र साधना और अघोरी परंपरा से संबंध।
  • अघोरी शब्द का सही अर्थ समझाती हैं महाकाली नंदगिरी।

News In Detail

महाकाली नंदगिरी, जिन्हें अघोर साधना में महारत हासिल है, को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया है। वे तेलंगाना के मंचेरियल जिले की रहने वाली हैं और अघोर साधना में करीब 18 साल का अनुभव रखती हैं। महाकाली नंदगिरी का नाम अघोरी साधिका के रूप में जाना जाता है और वे सनातन परंपरा के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। जानिए उनके जीवन के अनसुने पहलू।



महाकाली नंदगिरी का सफर

महाकाली नंदगिरी, जो तेलंगाना की सबसे कम उम्र की अघोरी साधिका हैं, को हाल ही में किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाया गया। नंदगिरी ने करीब 18 साल पहले असम के कामाख्या धाम में तंत्र साधना की शुरुआत की थी और तब से वे अघोर साधना में पूरी तरह समर्पित हैं। अघोरी साधिका के रूप में उनका नाम प्रसिद्ध हुआ और वे सनातन परंपरा के प्रचार में सक्रिय रहीं।



महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर बनाना एक ऐतिहासिक घटना है। इस फैसले के बाद उन्होंने उज्जैन मेंकहा कि लोग अक्सर अघोरी शब्द का गलत मतलब निकालते हैं। उनके अनुसार अघोरी केवल डर से मुक्त होकर आत्मिक उन्नति की ओर बढ़ने का मार्ग है। उन्होंने अपने साधना के अनुभवों के बारे में भी विस्तार से बताया।



गौ रक्षा के कार्य में सक्रिय

महाकाली नंदगिरी खुद को एक साधिका मानती हैं, जो सनातन परंपरा के प्रचार और गौ संरक्षण के कार्य में भी सक्रिय हैं। वे पिछले कई सालों से धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए काम कर रही हैं। उनका कहना है कि धार्मिक परंपराओं को बचाए रखना और उनका प्रचार करना उनका मुख्य उद्देश्य है।



विवादों के बाद भी साधना जारी

महाकाली नंदगिरी ने अपनी साधना के दौरान कई विवादों का सामना किया, लेकिन उनका उद्देश्य कभी नहीं बदला। वे हमेशा सनातन परंपरा और अघोर साधना के प्रचार में सक्रिय रही हैं। उनके साधना से जुड़ी कहानियां और अनुभव आज भी लोगों के दिलों में गहरे प्रभाव छोड़ते हैं।



अघोर साधना और इसका महत्व

महाकाली नंदगिरी के अनुसार, अघोरी का मतलब भयभीत होना नहीं, बल्कि निडर होकर आत्मिक साधना करना है। अघोर साधना में ध्यान, वैराग्य, जीवन-मृत्यु के सत्य और आत्मिक जागृति पर विशेष ध्यान दिया जाता है।



नंदगिरी का कहना है कि इस साधना में साधक को अपने अंदर की शक्ति और डर से मुक्त होकर आध्यात्मिक उन्नति पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।



जानें अघोरी साधना के बारे में...

अघोरी साधना क्या है?

अघोरी साधना एक विशेष प्रकार की तांत्रिक साधना है, जिसमें साधक अपनी आत्मा को उच्चतम आध्यात्मिक स्थिति तक पहुंचाने के लिए कठिन और पारंपरिक नियमों का पालन करता है।



इस साधना का मुख्य उद्देश्य व्यक्ति के भीतर के डर और बंधनों को समाप्त करना और उसे सत्य, वैराग्य, और आत्मिक जागृति के मार्ग पर आगे बढ़ाना है। अघोर साधना के दौरान, साधक अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण पाता है और भूत, प्रेत, और अन्य अंधेरे शक्तियों से मुक्त हो जाता है।



अघोरी साधना कहां की जाती है?

अघोरी साधना मुख्य रूप से भारत के उत्तर और मध्य हिस्सों में की जाती है, खासकर काशी (वाराणसी), कामाख्या धाम (असम), और हिमालय क्षेत्र में। इन स्थानों को पवित्र और ऊर्जा से भरे स्थान माना जाता है, जो साधना के लिए उपयुक्त माने जाते हैं।



काशी में गंगा नदी के किनारे अघोरी साधक अपनी साधना करते हैं। इसके अलावा, अन्य प्रमुख तांत्रिक स्थल जैसे कालसर्प पूजा स्थल और साधना के गुफाएं भी अघोरी साधकों के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती हैं।



क्यों की जाती है अघोरी साधना?

अघोरी साधना का मुख्य उद्देश्य आत्मिक उन्नति प्राप्त करना है। यह साधना व्यक्ति को अपने भीतर के डर, अंधविश्वास और मानसिक बंधनों से मुक्त कर देती है।



अघोरी साधक अपने जीवन के उद्देश्य को समझने के लिए मृत्यु, जीवन और संसार के अदृश्य पहलुओं की खोज करते हैं। यह साधना उन्हें आध्यात्मिक शक्ति, मानसिक शांति, और जीवन के सही उद्देश्य को समझने में मदद करती है। इसके अलावा अघोर परंपरा का उद्देश्य भौतिक और मानसिक शांति की प्राप्ति के साथ-साथ समाज में सकारात्मक बदलाव लाना भी है। किन्नर अखाड़ा



FAQ

  1. महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर क्यों बनाया गया?
    महाकाली नंदगिरी को किन्नर अखाड़े का महामंडलेश्वर इस कारण बनाया गया क्योंकि उन्होंने अघोर साधना और सनातन परंपरा के प्रचार में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। उनका नाम अघोरी साधिका के रूप में प्रसिद्ध है और वे गौ संरक्षण और धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के लिए कार्य कर रही हैं।
  2. महाकाली नंदगिरी ने अघोर साधना कब शुरू की थी?
    महाकाली नंदगिरी ने अघोर साधना की शुरुआत लगभग 18 साल पहले असम स्थित कामाख्या धाम से की थी। इसके बाद से वे लगातार अघोर साधना में संलग्न रही हैं और आज उन्हें 'लेडी अघोरी माता' के नाम से जाना जाता है।

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