आबकारी सहायक आयुक्त मंदाकिनी दीक्षित के आरोप- राजनीतिक प्रभाव में सरकार ने किया निलंबित
बता दें कि मंदाकिनी दीक्षित ने इस निलंबन को इंदौर हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। अब हाईकोर्ट ने इस मामले में अहम आदेश दिए हैं।
दीक्षित ने सरकार पर ही लगाए गंभीर आरोप
इस याचिका पर हाईकोर्ट इंदौर (Indore High court) ने फैसला दिया है। इस दौरान दीक्षित ने आबकारी विभाग और मध्यप्रदेश शासन पर भी गंभीर आरोप लगाए हैं। दीक्षित ने कहा कि उन्हें 6 दिसंबर 2025 को निलंबित किया गया। यह कार्रवाई पूरी तरह से राजनीतिक प्रभाव के कारण की गई थी। वहीं इसी प्रभाव के कारण ही उन्हें अभी तक निलंबित रखा गया है।
ठेकेदार के फोन से नहीं बना वीडियो
दीक्षित ने याचिका में यह भी कहा कि दिनेश मकवाना ने आत्महत्या करने से पहले एक वीडियो रिकॉर्ड किया था। इसमें उन्होंने कहा कि अवैध मांगों के कारण आत्महत्या की। अब मृतक के फोन की रिपोर्ट आ गई है। इसमें स्पष्ट रूप से यह सामने आया है कि वीडियो उनके फोन पर रिकॉर्ड नहीं किया गया था। वहीं याचिकाकर्ता को केवल राजनीतिक प्रभाव के कारण निलंबित किया गया। वीडियो के सिवा अन्य कोई सबूत नहीं है। केवल राजनीतिक प्रभाव के कारण, याचिकाकर्ता को अनावश्यक रूप से निलंबित रखा जा रहा है।
वहीं शासन ने यह दिया जवाब
इस मामले में मंदाकिनी दीक्षित ने मध्यप्रदेश शासन, उप सचिव वाणिज्यिक कर विभाग और आबकारी आयुक्त को पक्षकार बनाया था। शासन की ओर से कहा गया कि यह मामला अत्यंत गंभीर प्रकृति का है, यह देखते हुए कि एक व्यक्ति ने याचिकाकर्ता पर आरोप लगाते हुए आत्महत्या कर ली है। इस प्रकार राज्य ने सही निलंबित किया है। विभागीय कार्रवाई भी शुरू की है जो विचाराधीन है।
ठेकेदार की मां ने भी लगाई इंटरविनर याचिका
इस मामले में ठेकेदार की मां संतोष मकवाना ने भी इंटरविनर याचिका लगाई। वहीं हाईकोर्ट ने इस पर कहा कि शासकीय सेवा मामलों में, आमतौर पर किसी तीसरे व्यक्ति को हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं होता है। क्योंकि मामला नियोक्ता और कर्मचारी के बीच का है। इसलिए इंटरविनर याचिका खारिज की जाती है।
लंबे समय तक नहीं रख सकते सस्पेंड- हाईकोर्ट
वहीं हाईकोर्ट ने फैसला सुनाया कि निलंबन के आदेश में सीधे हस्तक्षेप नहीं कर सकते। कोर्ट ने साफ किया कि निलंबन सही है या गलत इस पर वह फैसला नहीं करेगा। कोर्ट की समीक्षा सिर्फ इस बात तक सीमित रहेगी कि निलंबन आदेश की ठीक से समीक्षा हुई है या नहीं। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि निलंबन को आगे जारी रखने की जरूरत है या नहीं।
कोर्ट ने कहा कि निलंबन आमतौर पर थोड़े समय के लिए ही होना चाहिए। इसलिए सरकार को निलंबन आदेश की समीक्षा करनी होगी। अगर समीक्षा में लगता है कि निलंबन जारी रखना जरूरी है, तो सरकार को नया आदेश जारी करना होगा। इसी के साथ कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। कोर्ट ने सक्षम अधिकारी को निलंबन आदेश की समीक्षा कर उचित फैसला लेने के निर्देश दिए।
क्या है पूरा मामला
दरअसल ठेकेदार मकवाना ने सुसाइड कर लिया था। इस मामले में मौत के बाद एक वीडियो सामने आया था। इसमें मकवाना ने आरोप लगाए थे कि दीक्षित द्वारा उन्हें प्रताड़ित किया जा रहा है। वह हर माह एक दुकान से डेढ़ लाख की रिश्वत चाहती है। उनकी पांच दुकान है और साढ़े सात लाख रुपए प्रति माह की मांग है।
इसके अलावा यह भी आरोप थे कि दीक्षित अभी तक 20-25 लाख रुपए ले चुकी है। इसके बाद मामला जांच में आया। हाईकोर्ट में ठेकेदार की मां ने याचिका लगाई जिसमें आदेश हुए कि मंदाकिनी दीक्षित पर सीबीआई केस हो और जांच हो। दूसरी ओर रिट अपील में यह आदेश खारिज कर दिया गया। वहीं इस मामले में दीक्षित ने अपने निलंबन को भी चुनौती दी थी, जिस पर अब यह फैसला आया है।