एक नवंबर से मंत्रालय से सतपुड़ा भवन तक बायोमेट्रिक से लगेगी कर्मचारियों की हाजिरी

Sandeep Kumar | Sept 15, 2026, 19:27 IST
सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी
मध्यप्रदेश के सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी अब डिजिटल होगी। मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में बायोमेट्रिक सिस्टम लगेगा। नई व्यवस्था 1 नवंबर से अनिवार्य होगी। इससे पहले सात दिनों तक इसका ट्रायल चलेगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • मध्य प्रदेश सरकार बायोमेट्रिक अटेंडेंस व्यवस्था लागू करने जा रही है।
  • नई व्यवस्था 1 नवंबर से कर्मचारियों के लिए अनिवार्य होगी।
  • अक्टूबर के तीसरे सप्ताह में सात दिवसीय ट्रायल शुरू होगा।
  • ट्रायल के दौरान कर्मचारियों का काम दोबारा बांटा जाएगा।
  • भोपाल के बाद यह व्यवस्था प्रदेशभर के कार्यालयों में पहुंचेगी।

मध्य प्रदेश सरकार मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन में बायोमेट्रिक अटेंडेंस लागू करने जा रही है। यह व्यवस्था 1 नवंबर से अनिवार्य होगी। इससे पहले अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से सात दिन का ट्रायल चलेगा। इस दौरान कर्मचारियों का काम भी नए सिरे से बांटा जाएगा। शुरुआत भोपाल से होगी, फिर यह व्यवस्था पूरे प्रदेश के दफ्तरों में लागू होगी।



नई व्यवस्था अक्टूबर से शुरू

सामान्य प्रशासन विभाग यानी जीएडी (GAD – General Administration Department) ने इसकी तैयारी लगभग पूरी कर ली है। अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से सिस्टम ट्रायल मोड में चलाया जाएगा। इन सात दिनों में तकनीकी खामियां दूर की जाएंगी। इसके बाद मध्य प्रदेश के स्थापना दिवस यानी 1 नवंबर से यह व्यवस्था पूरी तरह लागू हो जाएगी।



इस तारीख को खास तौर पर चुना गया है। सरकार चाहती है कि यह बदलाव किसी बड़े मौके के साथ शुरू हो। इससे कर्मचारियों में भी इसकी अहमियत का संदेश जाएगा।



हाजिरी के साथ काम भी होगा तय

केवल अटेंडेंस दर्ज करना ही मकसद नहीं है। ई-अटेंडेंस सिस्टम के साथ कर्मचारियों के काम का बंटवारा भी नए सिरे से होगा। यानी किसे कौन सा काम करना है, यह भी सिस्टम में दर्ज होगा। इससे विभागों में जवाबदेही तय करना आसान होगा।



जीएडी ने सभी विभागों को साफ निर्देश दिए हैं। अक्टूबर के आखिरी सप्ताह से पहले प्रोजेक्ट से जुड़ा हर काम पूरा करना होगा। इसमें देरी की कोई गुंजाइश नहीं रखी गई है।



मुख्यमंत्री ने दिए थे निर्देश

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पहले ही सरकारी दफ्तरों में ई-अटेंडेंस लागू करने की बात कह चुके हैं। उनके निर्देश के बाद जीएडी ने प्रस्ताव तैयार किया। यह प्रस्ताव एनआईसी यानी NIC (National Informatics Centre) को भेजा गया, ताकि तकनीकी काम आगे बढ़ सके।



मुख्यमंत्री का मानना है कि डिजिटल हाजिरी से पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे सरकारी कामकाज में समय की पाबंदी भी बेहतर होगी।



पूर्व मुख्य सचिव के दौर में रफ्तार

तत्कालीन मुख्य सचिव अनुराग जैन के कार्यकाल में इस प्रोजेक्ट पर तेजी से काम शुरू हुआ था। एजेंसी चुनने के बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में वर्क ऑर्डर भी जारी हो गया था। उस समय काम काफी तेज गति से चल रहा था।



बाद में अनुराग जैन नीति आयोग चले गए। उनके जाने के बाद प्रोजेक्ट की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। अब सरकार इसे फिर से गति देने में जुटी है।



जिलों तक पहुंचेगी व्यवस्था

भोपाल के मुख्य सरकारी भवनों से शुरुआत के बाद सरकार इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना बना रही है। मुख्यमंत्री ने इसके लिए अलग से कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए हैं।



आने वाले समय में यह व्यवस्था सभी जिलों के कलेक्टोरेट और अन्य संभागीय-जिला कार्यालयों में भी लागू होगी। इससे प्रदेशभर के सरकारी कर्मचारियों की हाजिरी डिजिटल तरीके से दर्ज होगी।



FAQ

  1. एमपी के मंत्रालय में बायोमेट्रिक अटेंडेंस कब से लागू होगी?
    यह व्यवस्था 1 नवंबर से लागू होगी। इससे पहले अक्टूबर के तीसरे सप्ताह से सात दिन ट्रायल चलेगा।
  2. यह व्यवस्था कहां-कहां लागू होगी?
    शुरुआत मंत्रालय, विंध्याचल और सतपुड़ा भवन से होगी। बाद में इसे प्रदेश के सभी जिलों में लागू किया जाएगा।

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