साइबर ठगी का पैसा सोने में लगाया, MBA पास आरोपियों का 3 राज्यों में नेटवर्क

Sandeep Kumar | Jun 19, 2026, 17:30 IST
साइबर ठगी का पैसा सोने में लगाया
नर्मदापुरम के तीन MBA युवकों ने उज्जैन में साइबर ठगी के पैसों से सोना खरीदा। दिल्ली सिंडिकेट के इशारे पर 3 राज्यों के खातों से पेमेंट कराई। माधवनगर पुलिस ने सीसीटीवी सुराग से तीनों को होटल से दबोचा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • MBA युवकों ने उज्जैन में साइबर ठगी से सोना खरीदा।
  • दिल्ली सिंडिकेट ने उन्हें ठगी के लिए तैयार किया था।
  • राजस्थान पंजाब और यूपी के खातों से पैसा ट्रांसफर हुआ।
  • सोना बेचकर ठगी की रकम कैश में बदलने की योजना थी।
  • पुलिस ने सीसीटीवी नंबर के आधार पर तीनों को पकड़ा।

जल्दी अमीर बनने की चाह ले डूबी

नर्मदापुरम के तीन युवक अनिमेष वर्मा, कशिश बढ़ानी और राहुल गुप्ता। तीनों MBA की डिग्री रखते हैं। पर जल्दी पैसा कमाने की चाहत ने इन्हें अपराध की राह पर धकेल दिया। मुख्य आरोपी अनिमेष वर्मा करीब तीन महीने पहले क्रिप्टोकरेंसी एक्सचेंज प्लेटफॉर्म बायनेन्स पर "सात्विक" नाम की एक टेलीग्राम आईडी के संपर्क में आया। उसे भारी मुनाफे का झांसा दिया गया। ठगों ने बताया कि यह गेमिंग प्लेटफॉर्म का पैसा है। इसे सोने में लगाकर वापस कानूनी तरीके से निकालना है। कमीशन का लालच था। अनिमेष फंस गया। फिर उसने कशिश और राहुल को भी इस जाल में खींच लिया।



10 दिन में चार दुकानों से खरीदा सोना

तीनों उज्जैन पहुंचे। हीरा पैलेस और श्रीदर्शन होटल में ठहरे। वहां से करीब 10 दिन तक अपना काम चलाते रहे। योजना सीधी थी। सोने की दुकान पर जाओ, दुकानदार का क्यूआर (QR – Quick Response) कोड स्कैन करो, दिल्ली के ठगों को भेजो।



ठग उस कोड पर साइबर पीड़ितों के खातों से पेमेंट कराते थे। इस तरह तीन शोरूम से करीब 4.65 लाख रुपए का सोना खरीदा गया। फर्जी आधार कार्ड और फर्जी पहचान पत्र से खरीदारी हुई।



तीन राज्यों के पीड़ितों के खाते बने हथियार

उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा ने बताया कि ठगों ने इस खरीद के लिए तीन राज्यों के लोगों के खाते इस्तेमाल किए। राजस्थान के नागौर निवासी मोहम्मद नासिर के खाते से 2.88 लाख रुपए निकाले। पंजाब के सुरिंदर सिंह के खाते से 95 हजार और गाजियाबाद के मनोज कुमार के खाते से 99 हजार रुपए उड़ाए गए। ये तीनों साइबर ठगी के शिकार थे। उनके खाते ठगों के कब्जे में थे।



एसपी शर्मा ने कहा कि यह दिल्ली से चलने वाला एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय डिजिटल सिंडिकेट है। इसके सदस्य सोने और पेट्रोल पंपों में ठगी का पैसा निवेश कराते हैं। वजह साफ है। सोने की कमोडिटी वैल्यू (Commodity Value) कभी कम नहीं होती।



कैसे खुल गई पोल

6 जून की रात करीब 9 बजे फ्रीगंज के डीपीके ज्वेलर्स के मालिक घबराए हुए माधवनगर थाने पहुंचे। दोपहर में एक युवक 92 हजार रुपए के गोल्ड कॉइन (Gold Coin) खरीदकर गया था। रात में उनका बैंक खाता होल्ड हो गया था।



माधवनगर टीआई गजेंद्र पचौरिया की टीम तुरंत हरकत में आई। रात में ही शोरूम पहुंचे और सीसीटीवी फुटेज खंगाले। फुटेज में एक युवक सोना खरीद रहा था। दूसरा बाहर खड़ा था। उसी दौरान एक कॉल आया। कैमरे का एंगल ऐसा था कि मोबाइल स्क्रीन पर दिख रहा नंबर साफ कैद हो गया। उसी एक नंबर से लोकेशन ट्रेस की गई। तीनों को महाकाल क्षेत्र के एक होटल से दबोच लिया गया।



कोर्ट से मिला रिमांड, दिल्ली भेजी जा रही टीम

गुरुवार को तीनों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया गया। कोर्ट ने 21 जून तक पुलिस रिमांड मंजूर की। एसपी शर्मा ने बताया कि जमा हुई पेमेंट को होल्ड करा दिया गया है। एक टीम दिल्ली के मुख्य सिंडिकेट तक पहुंचने के लिए रवाना की जा रही है।



ये भी पढ़ें...

SEBI का नाम लेकर साइबर ठगी, फर्जी ऐप से लगाया 27 लाख का चूना



साइबर ठगी: यूके से गिफ्ट भेजने के नाम पर महिला से 3.91 लाख रुपए की ठगी



साइबर ठगी का नया तरीका, साली बनकर सोशल मीडिया के बधाई संदेशों से ठगे लाखों



मल्टीनेशनल कंपनियों की नौकरी छोड़ साइबर ठगी का रास्ता चुन रहे युवा





Tags:
  • उज्जैन
  • नर्मदापुरम
  • साइबर ठगी
  • प्रदीप शर्मा
  • उज्जैन एसपी प्रदीप शर्मा