साइबर ठगी का नया तरीका, साली बनकर सोशल मीडिया के बधाई संदेशों से ठगे लाखों
Ashish Bhardwaj | May 30, 2026, 20:54 IST
Photograph: (the sootr)
आपकी सोशल मीडिया पर छोटी सी लापरवाही भारी पड़ सकती है। राजस्थान पुलिस ने ऐसी गैंग का खुलासा किया है, जो सोशल मीडिया पर सगाई की बधाई देकर लोगों को ठगता था।
कल्पना कीजिए, आपके घर में शहनाई बजने वाली है। हाल ही में सगाई की रस्म पूरी हुई है। घर का हर सदस्य बेहद खुश है। इसी खुशी को दोगुना करने के लिए आपने सगाई की खूबसूरत तस्वीरें सोशल मीडिया पर अपलोड कर दीं।
देखते ही देखते कमेंट बॉक्स बधाइयों से भर गया। कोई शुभकामनाएं लिख रहा है, तो कोई नई शुरुआत मुबारक कह रहा है। रिश्तेदार एक-दूसरे को टैग कर रहे हैं। आप इन सब संदेशों को पढ़कर मुस्कुरा रहे हैं।
इसी डिजिटल भीड़ में एक और शख्स मौजूद है। वह न तो आपका दोस्त है, न रिश्तेदार और न ही कोई शुभचिंतक। वह आपकी खुशियों को नहीं देख रहा, बल्कि वह आपके बैंक खाते तक पहुंचने का रास्ता तलाश रहा है। वह आपकी हर एक तस्वीर, हर एक टैग और हर एक कमेंट को बहुत बारीकी से नोट कर रहा है।
सगाई के कुछ दिनों बाद अचानक आपके मोबाइल की घंटी बजती है। आप फोन उठाते हैं। दूसरी तरफ से एक लड़की की बेहद मीठी आवाज आती है: हेलो जीजाजी... पहचानो तो मैं कौन?
आप थोड़ा सोचते हैं। दिमाग पर जोर डालते हैं। तभी सामने से हंसते हुए जवाब आता है:
अरे जीजाजी, इतनी जल्दी भूल गए? मैं आपकी साली बोल रही हूं...।
चूंकि सगाई अभी नई-नई हुई है, रिश्तेदारियां भी ताजी हैं। ऐसे माहौल में हर किसी को नए रिश्तेदारों की आवाज या चेहरा ठीक से याद नहीं होता। यही वजह है कि सामने वाले पर शक करने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
आप भी सहमकर और थोड़ा मुस्कुराकर बात आगे बढ़ाते हैं। बस, यहीं से शुरू होता है ठगी का वह खतरनाक खेल, जिसने राजस्थान की सवाई माधोपुर पुलिस को भी हैरान कर दिया।
सवाई माधोपुर पुलिस के हत्थे चढ़े एक साइबर ठग का तरीका आम अपराधियों से बिल्कुल अलग था। यह कोई रैंडम कॉल नहीं करता था। इसका तरीका बेहद शातिर था।
आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की प्रोफाइल को घंटों खंगालता था। वह देखता था कि किस घर में नया रिश्ता जुड़ा है। किसकी शादी तय हुई है? कौन किसका साला है और कौन किसकी साली?
वह सोशल मीडिया के कमेंट्स और टैग्स की मदद से शिकार के पूरे परिवार का नक्शा (फैमिली ट्री) तैयार कर लेता था। यानी, जिस जानकारी को लोग खुशी-खुशी दुनिया के सामने साझा कर रहे थे, वही जानकारी इस ठग के लिए अपराध का ब्लूप्रिंट बन रही थी। उसे पता चल जाता था कि होने वाले जीजाजी को किस नाम से पुकारना है और किस रिश्तेदार का हवाला देना है।
फोन पर साली बनकर बात करने वाला यह शातिर अपराधी बेहद आराम से बातें करता था। वह घर-परिवार का हालचाल पूछता। सगाई के फंक्शन की बातें करता। रिश्तेदारों के नाम लेता। बातचीत इतनी स्वाभाविक होती थी कि पीड़ित को पूरा यकीन हो जाता कि फोन पर सचमुच उसकी असली साली ही बात कर रही है।
जब बातचीत के जरिए भरोसा पूरी तरह से कायम हो जाता, तब असली खेल शुरू होता था। बातों-बातों में आरोपी बेहद भावुक होकर कहता-जीजाजी, एक छोटी सी मदद चाहिए थी। मेरा एक बहुत जरूरी पेमेंट अटक गया है। या एक सहेली को अर्जेंट पैसे भेजने हैं, मेरा गूगल पे काम नहीं कर रहा।
ठग कभी बीमारी का बहाना बनाता, तो कभी किसी इमरजेंसी का ड्रामा रचता। सबसे बड़ी चालाकी यह थी कि वह रकम बहुत बड़ी नहीं मांगता था। वह केवल 10, 20 या 30 हजार रुपए की मांग करता था।
इतनी छोटी रकम सुनकर पीड़ित को बड़ा शक नहीं होता था। वह सोचता था कि नई-नई साली है, अगर इस वक्त मना किया तो होने वाली पत्नी और ससुराल पक्ष में इमेज खराब होगी। पीड़ित बिना सोचे-समझे बताए गए नंबर पर पैसे ट्रांसफर कर देता था। पैसे खाते में पहुंचते ही फोन बंद हो जाता और साली गायब हो जाती। बाद में जब पीड़ित असली ससुराल में फोन करता, तब तक खेल खत्म हो चुका होता था।
इस ठगी का शिकार हुए लोगों को जब अपनी गलती का अहसास हुआ तो उन्होंने गृह मंत्रालय की साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायतें दर्ज कराईं।
सवाई माधोपुर जिले से जब एक के बाद एक कई शिकायतें सामने आईं, तो पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया। सभी पीड़ितों की कहानी एक जैसी थी-नई रिश्तेदारी का हवाला देकर पैसे ठगे गए।
सवाई माधोपुर कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की जांच शुरू की, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।
संदिग्ध बैंक खातों के लेन-देन (Transactions) और मोबाइल टावर लोकेशन को ट्रैक करते हुए पुलिस धीरे-धीरे इस गैंग के करीब पहुंचने लगी।
साइबर सेल की मदद से कोतवाली पुलिस ने सबसे पहले नरेंद्र सैनी नाम के आरोपी को दबोचा। नरेंद्र से जब कड़ाई से पूछताछ की गई, तो पुलिस के सामने इस पूरे गैंग का कच्चा चिट्ठा खुल गया। लेकिन पुलिस जानती थी कि नरेंद्र सिर्फ एक मोहरा है, असली खिलाड़ी अभी भी कानून की गिरफ्त से बाहर है।
इसके बाद पुलिस ने अपनी तफ्तीश तेज की। आखिरकार पुलिस बारां के उस मास्टरमाइंड गणेश उर्फ दिलखुश तक पहुंच गई जो लड़की की आवाज निकालकर लोगों को चूना लगा रहा था।
पुलिस ने जाल बिछाकर मुख्य आरोपी गणेश उर्फ दिलखुश को बारां से गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस भी हैरान रह गई कि महज 24 साल का यह युवक बिना किसी बड़े तकनीकी तामझाम के, सिर्फ अपनी आवाज बदलने की कला और सोशल मीडिया की मदद से लाखों रुपए डकार चुका था।
इस मामले के सामने आने के बाद साइबर एक्सपर्ट्स और पुलिस ने आम जनता के लिए कुछ बेहद जरूरी गाइडलाइंस जारी की हैं: क्या करें? क्या न करें?
अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा 'Private' मोड पर रखें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट कभी स्वीकार न करें।
किसी भी रिश्तेदार के नाम पर आई कॉल पर पैसे भेजने से पहले, उनके पुराने नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें। जल्दबाजी या लोक-लाज के डर में आकर तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर न करें।
कमेंट बॉक्स में परिवार के सदस्यों के असली नाम या आपसी रिश्तों का खुलासा करने से बचें। अपनी शादी, सगाई या यात्रा की लाइव लोकेशन और हर छोटी जानकारी पोस्ट न करें।
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देखते ही देखते कमेंट बॉक्स बधाइयों से भर गया। कोई शुभकामनाएं लिख रहा है, तो कोई नई शुरुआत मुबारक कह रहा है। रिश्तेदार एक-दूसरे को टैग कर रहे हैं। आप इन सब संदेशों को पढ़कर मुस्कुरा रहे हैं।
इसी डिजिटल भीड़ में एक और शख्स मौजूद है। वह न तो आपका दोस्त है, न रिश्तेदार और न ही कोई शुभचिंतक। वह आपकी खुशियों को नहीं देख रहा, बल्कि वह आपके बैंक खाते तक पहुंचने का रास्ता तलाश रहा है। वह आपकी हर एक तस्वीर, हर एक टैग और हर एक कमेंट को बहुत बारीकी से नोट कर रहा है।
जब फोन पर गूंजी मीठी आवाज
आप थोड़ा सोचते हैं। दिमाग पर जोर डालते हैं। तभी सामने से हंसते हुए जवाब आता है:
अरे जीजाजी, इतनी जल्दी भूल गए? मैं आपकी साली बोल रही हूं...।
चूंकि सगाई अभी नई-नई हुई है, रिश्तेदारियां भी ताजी हैं। ऐसे माहौल में हर किसी को नए रिश्तेदारों की आवाज या चेहरा ठीक से याद नहीं होता। यही वजह है कि सामने वाले पर शक करने की गुंजाइश न के बराबर रह जाती है।
आप भी सहमकर और थोड़ा मुस्कुराकर बात आगे बढ़ाते हैं। बस, यहीं से शुरू होता है ठगी का वह खतरनाक खेल, जिसने राजस्थान की सवाई माधोपुर पुलिस को भी हैरान कर दिया।
सोशल मीडिया बना ठगी का ब्लूप्रिंट
आरोपी फेसबुक और इंस्टाग्राम पर लोगों की प्रोफाइल को घंटों खंगालता था। वह देखता था कि किस घर में नया रिश्ता जुड़ा है। किसकी शादी तय हुई है? कौन किसका साला है और कौन किसकी साली?
वह सोशल मीडिया के कमेंट्स और टैग्स की मदद से शिकार के पूरे परिवार का नक्शा (फैमिली ट्री) तैयार कर लेता था। यानी, जिस जानकारी को लोग खुशी-खुशी दुनिया के सामने साझा कर रहे थे, वही जानकारी इस ठग के लिए अपराध का ब्लूप्रिंट बन रही थी। उसे पता चल जाता था कि होने वाले जीजाजी को किस नाम से पुकारना है और किस रिश्तेदार का हवाला देना है।
भरोसा जीता और फिर चला इमरजेंसी का दांव
जब बातचीत के जरिए भरोसा पूरी तरह से कायम हो जाता, तब असली खेल शुरू होता था। बातों-बातों में आरोपी बेहद भावुक होकर कहता-जीजाजी, एक छोटी सी मदद चाहिए थी। मेरा एक बहुत जरूरी पेमेंट अटक गया है। या एक सहेली को अर्जेंट पैसे भेजने हैं, मेरा गूगल पे काम नहीं कर रहा।
ठग कभी बीमारी का बहाना बनाता, तो कभी किसी इमरजेंसी का ड्रामा रचता। सबसे बड़ी चालाकी यह थी कि वह रकम बहुत बड़ी नहीं मांगता था। वह केवल 10, 20 या 30 हजार रुपए की मांग करता था।
इतनी छोटी रकम सुनकर पीड़ित को बड़ा शक नहीं होता था। वह सोचता था कि नई-नई साली है, अगर इस वक्त मना किया तो होने वाली पत्नी और ससुराल पक्ष में इमेज खराब होगी। पीड़ित बिना सोचे-समझे बताए गए नंबर पर पैसे ट्रांसफर कर देता था। पैसे खाते में पहुंचते ही फोन बंद हो जाता और साली गायब हो जाती। बाद में जब पीड़ित असली ससुराल में फोन करता, तब तक खेल खत्म हो चुका होता था।
जब 1930 पर बजी घंटियां, तो हरकत में आई पुलिस
सवाई माधोपुर जिले से जब एक के बाद एक कई शिकायतें सामने आईं, तो पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया। सभी पीड़ितों की कहानी एक जैसी थी-नई रिश्तेदारी का हवाला देकर पैसे ठगे गए।
सवाई माधोपुर कोतवाली थाना पुलिस ने इस मामले को गंभीरता से लिया। जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में एक विशेष टीम का गठन किया गया। पुलिस ने सबसे पहले उन बैंक खातों की जांच शुरू की, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर की गई थी।
संदिग्ध बैंक खातों के लेन-देन (Transactions) और मोबाइल टावर लोकेशन को ट्रैक करते हुए पुलिस धीरे-धीरे इस गैंग के करीब पहुंचने लगी।
पहले मोहरा फंसा, फिर आया मास्टरमाइंड
इसके बाद पुलिस ने अपनी तफ्तीश तेज की। आखिरकार पुलिस बारां के उस मास्टरमाइंड गणेश उर्फ दिलखुश तक पहुंच गई जो लड़की की आवाज निकालकर लोगों को चूना लगा रहा था।
पुलिस ने जाल बिछाकर मुख्य आरोपी गणेश उर्फ दिलखुश को बारां से गिरफ्तार कर लिया। उसकी गिरफ्तारी के बाद पुलिस भी हैरान रह गई कि महज 24 साल का यह युवक बिना किसी बड़े तकनीकी तामझाम के, सिर्फ अपनी आवाज बदलने की कला और सोशल मीडिया की मदद से लाखों रुपए डकार चुका था।
खुद को कैसे सुरक्षित रखें?
अपने सोशल मीडिया अकाउंट को हमेशा 'Private' मोड पर रखें। अनजान लोगों की फ्रेंड रिक्वेस्ट कभी स्वीकार न करें।
किसी भी रिश्तेदार के नाम पर आई कॉल पर पैसे भेजने से पहले, उनके पुराने नंबर पर कॉल करके पुष्टि करें। जल्दबाजी या लोक-लाज के डर में आकर तुरंत ऑनलाइन ट्रांसफर न करें।
कमेंट बॉक्स में परिवार के सदस्यों के असली नाम या आपसी रिश्तों का खुलासा करने से बचें। अपनी शादी, सगाई या यात्रा की लाइव लोकेशन और हर छोटी जानकारी पोस्ट न करें।
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