हाई कोर्ट ने पलटा सिंगल बेंच का आदेश, खनिज ब्लॉकों की नीलामी का रास्ता साफ
Jageshwar prasad | May 30, 2026, 17:53 IST
Photograph: (the sootr)
राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने वर्ष 2014-15 में बिना नीलामी जारी किए गए 500 से अधिक पीएल (PL) और एलओआई (LOI) को निरस्त करने का रास्ता साफ कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल पारदर्शी नीलामी के जरिए होना चाहिए।
News In Short
- बिना नीलामी जारी किए गए 500 से अधिक पीएल और एलओआई को निरस्त करने का रास्ता साफ।
- राजस्थान हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने सिंगल बेंच के आदेश को पलट दिया, जिसमें आवंटनों को बहाल किया था।
- कोर्ट ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिए होना चाहिए।
- 2021 के कानून संशोधन के तहत गैर-नीलामी वाले लंबित मामले अब स्वतः समाप्त माने जाएंगे।
- इस फैसले से राज्य सरकार के खजाने में हजारों करोड़ रुपए के राजस्व आने की संभावना है।
News In Detail
जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस सुनील बेनीवाल की डिवीजन बेंच ने राज्य सरकार की ओर से दायर 118 विशेष अपीलों की एक साथ सुनवाई की। कोर्ट ने कहा कि व्यक्तिगत व्यावसायिक हितों से ऊपर जनहित और प्राकृतिक संसाधनों की पारदर्शी नीलामी सर्वोपरि है।
क्या था पूरा विवाद?
सरकार के इस फैसले के खिलाफ निजी खदान मालिक और कंपनियां हाईकोर्ट की सिंगल बेंच में पहुंची थीं, जहां उन्हें राहत मिल गई थी। सिंगल बेंच के इसी फैसले को राज्य सरकार ने डिवीजन बेंच में चुनौती दी थी।
क्या है पीएल और एलओआई?
तीन कानूनी बिंदुओं को आधार बनाया
दूसरा, एलओआई मिलने से मालिकाना हक नहीं बनता। अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के पुराने मामलों का उल्लेख करते हुए स्पष्ट किया कि केवल आवेदन करने या प्रारंभिक मंशा पत्र जारी होने से किसी व्यक्ति या कंपनी को सरकारी भूमि या राज्य के खनिजों पर कोई स्थायी कानूनी अधिकार प्राप्त नहीं हो जाता।
तीसरा, नीलामी ही एकमात्र पारदर्शी रास्ता। अदालत ने कहा कि प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल प्रतिस्पर्धी नीलामी के जरिए ही होना चाहिए। इससे राज्य के राजस्व को नुकसान नहीं होता और जनहित की पूरी तरह रक्षा होती है।
खजाने में आएगा भारी राजस्व
पीएल धारकों को मिलेगी खर्च की प्रतिपूर्ति
FAQ
- जोधपुर हाई कोर्ट की डिवीजन बेंच ने किस वर्ष के दौरान जारी किए गए पीएल (PL) और एलओआई (LOI) को निरस्त करने के आदेश दिए हैं?
हाई कोर्ट ने वर्ष 2014-15 के दौरान बिना किसी नीलामी के पहले आओ-पहले पाओ की विधिक नीति के तहत जारी किए गए आवंटनों को निरस्त किया है। - हाई कोर्ट ने प्राकृतिक संसाधनों के आवंटन के लिए किस विधिक प्रक्रिया को एकमात्र पारदर्शी रास्ता माना है?
माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि प्राकृतिक संसाधनों का आवंटन केवल प्रतिस्पर्धी और पारदर्शी नीलामी के जरिए ही होना विधिक रूप से सही है। - क्या उन पीएल धारकों को कोई राहत मिली है जिन्होंने खदानों पर प्रारंभिक खोज कार्य में पैसा खर्च किया था?
जी हां, ऐसे धारक स्थापित विधिक नियमों और कानूनी प्रावधानों के तहत सरकार से अपने वास्तविक खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए विधिवत आवेदन कर सकते हैं।
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