मीनाक्षी नटराजन नामांकन विवाद, नाम वापसी का आखिरी दिन, SC जाएगी कांग्रेस
समझें क्या है पूरा मामला...
- कांग्रेस की राज्यसभा उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन 9 जून को रद्द हुआ था।
- भाजपा ने आरोप लगाया कि उन्होंने तेलंगाना कोर्ट के मामले की जानकारी छिपाई थी।
- कांग्रेस ने कहा यह केस नहीं, सिर्फ एक कारण बताओ नोटिस था।
- चुनाव आयोग ने अब तक कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल को कोई जवाब नहीं दिया है।
- आज नाम वापसी का आखिरी दिन है, राहत न मिली तो भाजपा निर्विरोध जीत जाएगी।
MP राज्यसभा विवाद की पूरी कहानी
मध्यप्रदेश की राजनीति इस वक्त बेहद गर्म है। राज्यसभा चुनाव से ठीक पहले एक ऐसा मोड़ आया, जिसने पूरे देश का ध्यान खींच लिया है। कांग्रेस की उम्मीदवार मीनाक्षी नटराजन का नामांकन पत्र रद्द कर दिया गया है।
मीनाक्षी नटराजन राहुल गांधी की करीबी और कांग्रेस की कोर टीम की अहम सदस्य मानी जाती हैं। उन्होंने 8 जून 2026 को भोपाल में राज्यसभा चुनाव के लिए नामांकन दाखिल किया था।
कब और कैसे रद्द हुआ नामांकन?
मंगलवार, 9 जून की सुबह नामांकन पत्रों की जांच शुरू हुई थी। भाजपा उम्मीदवार महेश केवट और रजनीश अग्रवाल ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने मीनाक्षी के नामांकन पर आपत्ति दर्ज कराई थी। प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी ने भी शिकायत की थी। भाजपा की ओर से एडवोकेट संकेत गुप्ता ने सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के नियमों का हवाला देकर नामांकन रद्द करने की मांग रखी थी।
शाम करीब 5:30 बजे रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला सुनाया था। फैसले के तुरंत बाद कांग्रेस नेताओं ने विधानसभा परिसर में विरोध प्रदर्शन किया था।
भाजपा ने क्या आरोप लगाए?
भाजपा ने मीनाक्षी नटराजन के नामांकन पर कुल 6 आपत्तियां दर्ज कराई है।
- पहली आपत्ति यह थी कि नामांकन के पेज पांच, छह और सात पर सत्यापन मोहर अस्पष्ट है।
- दूसरी यह कि आपराधिक मामलों से जुड़े जरूरी कॉलम में जानकारी दर्ज नहीं की गई।
- तीसरी आपत्ति में आय विवरण वाले हिस्से में चुनाव आयोग के तय प्रारूप से छेड़छाड़ का आरोप था।
- चौथी बात यह कि नामांकन पत्र और शपथपत्र (Affidavit) में संपत्ति के कुल मूल्य में अंतर पाया गया।
- सबसे बड़ा आरोप यह था कि फॉर्म-26 में तेलंगाना की एक अदालत में लंबित शिकायत की जानकारी छिपाई गई है।
- वहीं, छठवीं आपत्ति यह थी कि अधूरी और गलत जानकारी देने की वजह से नटराजन का नामांकन रद्द किया जाए।
भाजपा का कहना था कि सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुसार हलफनामे में सभी लंबित मामलों का उल्लेख जरूरी है।
2022 से शुरू हुई यह कानूनी उलझन
यह मामला नया नहीं है। साल 2022 में तेलंगाना में एक महिला ने कांग्रेस नेता कुंभम शिवा कुमार रेड्डी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी। उसी मामले में मीनाक्षी नटराजन का नाम भी सामने आया था।
इसके बाद 2022 से 2025 के बीच उस महिला ने विभिन्न स्तरों पर शिकायतें और याचिकाएं दाखिल कीं। जून 2026 में जब राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई, तब यह पुराना मामला फिर से सुर्खियों में आ गया है।
कांग्रेस ने क्या कहा?
कांग्रेस की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता और नेता अभिषेक मनु सिंघवी ने चुनाव आयोग के सामने पक्ष रखा था। सिंघवी ने साफ कहा कि मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कोई आपराधिक मामला दर्ज नहीं है।
उन्होंने बताया कि तेलंगाना में एक निजी शिकायत के आधार पर अदालत ने केवल एक कारण बताओ नोटिस जारी किया था। नोटिस में सिर्फ यह पूछा गया था कि संज्ञान क्यों न लिया जाए।
कांग्रेस का तर्क था कि जब तक अदालत किसी मामले में संज्ञान लेकर आरोप तय न करे, उसे लंबित आपराधिक मामला नहीं माना जा सकता। इसलिए हलफनामे में इसका उल्लेख अनिवार्य नहीं था। पार्टी ने रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को गैरकानूनी और सीटों की चोरी करार दिया।
ECI गई, अब SC का दरवाजा
10 जून 2026 को कांग्रेस ने भारत चुनाव आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटाया था। शीर्ष नेताओं के प्रतिनिधिमंडल ने आयोग से मिलकर रिटर्निंग ऑफिसर के फैसले को पलटने की मांग की। वहीं, आयोग की तरफ से न कोई राहत मिली, न ही कोई जवाब आया।
अब कांग्रेस 11 जून को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करने की तैयारी में है। पार्टी को उम्मीद है कि शीर्ष अदालत से तत्काल राहत मिल सकती है।
भाजपा के तीनों उम्मीदवार जीत की कगार पर
आज नाम वापसी का आखिरी दिन है। यदि सुप्रीम कोर्ट से समय रहते कोई हस्तक्षेप नहीं होता, तो मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो जाएंगे।
भाजपा के तीन उम्मीदवार हैं। पहली और दूसरी सीट पर तरुण चुग जो पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव हैं और रजनीश अग्रवाल जो प्रदेश सचिव हैं। साथ ही, तीसरी सीट पर महेश केवट जो मध्यप्रदेश मछुआ कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष हैं।
दिल्ली में AICC की बड़ी बैठक
इस पूरे घटनाक्रम के बीच आज, 11 जून को दिल्ली स्थित अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (AICC) मुख्यालय में एक अहम बैठक बुलाई गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत सभी प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष और प्रभारी इसमें शामिल होंगे। बैठक में दो मुद्दों पर रणनीति तय होगी।
पहला, मीनाक्षी नटराजन के मामले को सुप्रीम कोर्ट में कैसे पेश किया जाए। दूसरा, मध्यप्रदेश के विधायकों को एकजुट रखने की रणनीति। बता दें कि पार्टी ने क्रॉस-वोटिंग के डर से विधायकों को बेंगलुरू भेजने की योजना बनाई थी। वहीं, नामांकन रद्द होने के बाद विमान को रनवे से ही वापस बुला लिया गया था।
FAQ
- मीनाक्षी नटराजन का नामांकन क्यों रद्द किया गया?
भाजपा उम्मीदवारों और पार्टी नेताओं ने रिटर्निंग ऑफिसर के सामने 6 आपत्तियां दर्ज कराईं। सबसे बड़ा आरोप यह था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने फॉर्म-26 यानी चुनावी हलफनामे में तेलंगाना की एक अदालत में चल रहे मामले की जानकारी नहीं दी। रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद नामांकन रद्द करने का फैसला दिया। - यदि मीनाक्षी नटराजन को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली तो क्या होगा?
आज यानी 11 जून 2026 को नाम वापसी का आखिरी दिन है। अगर सुप्रीम कोर्ट समय रहते कोई हस्तक्षेप नहीं करता, तो मध्यप्रदेश की तीनों राज्यसभा सीटों पर भाजपा के उम्मीदवार तरुण चुग, रजनीश अग्रवाल और महेश केवट निर्विरोध निर्वाचित घोषित हो जाएंगे। इस स्थिति में राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की नौबत ही नहीं आएगी।
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