मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर HC ने दिया सरकार को नोटिस, 11 को अगली सुनवाई
समझें क्या है पूरा मामला...
- कांग्रेस की वरिष्ठ नेता मीनाक्षी नटराजन ने राज्यसभा चुनाव में नामांकन रद्द होने को चुनौती दी है।
- नटराजन का कहना है कि रिटर्निंग ऑफिसर ने नियमों का पालन किए बिना नामांकन खारिज किया।
- नामांकन रद्द होने के बाद भाजपा के तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवल निर्विरोध निर्वाचित घोषित हुए।
- हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है।
- अब इस चुनाव विवाद पर अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी।
मध्य प्रदेश के राज्यसभा चुनाव से जुड़ा बड़ा विवाद अब जबलपुर हाई कोर्ट में पहुंच गया है। कांग्रेस की वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद मीनाक्षी नटराजन की चुनाव याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई।
जस्टिस बीपी शर्मा की एकल पीठ ने राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया है। अदालत ने सभी से जवाब मांगा है। अब इस हाई प्रोफाइल मामले की अगली सुनवाई 11 अगस्त 2026 को होगी।
राज्यसभा चुनाव का विवाद आखिर है क्या
जून 2026 में मध्य प्रदेश की तीन राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव प्रक्रिया शुरू हुई थी। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को अपना उम्मीदवार बनाया। उन्होंने 8 जून को नामांकन दाखिल किया। अगले दिन जांच के दौरान उनका नामांकन रद्द कर दिया गया।
इसके बाद चुनाव मैदान में केवल भाजपा के तीन उम्मीदवार रह गए। इनमें राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुघ, उद्योगपति रजनीश कुमार अग्रवाल और भाजपा नेता महेश केवल शामिल थे। तीनों को 11 जून 2026 को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। कांग्रेस ने इसी पूरी प्रक्रिया को चुनौती दी है।
यह था नामांकन रद्द करने का आधार
रिटर्निंग ऑफिसर ने कहा था कि मीनाक्षी नटराजन ने अपने हलफनामे में एक निजी आपराधिक शिकायत की जानकारी नहीं दी। यह शिकायत हैदराबाद की अदालत में लंबित बताई गई थी।
अधिकारी ने इसे अधूरी जानकारी मानते हुए नामांकन निरस्त कर दिया। इसी आदेश के बाद राज्यसभा चुनाव में मुकाबला खत्म हो गया। भाजपा के तीनों उम्मीदवार बिना मतदान के ही विजयी घोषित हो गए।
मीनाक्षी नटराजन की याचिका में क्या दलील है
याचिका में कहा गया है कि जिस निजी शिकायत का हवाला दिया गया, उस पर अदालत ने संज्ञान नहीं लिया था। उस मामले में आरोप भी तय नहीं हुए थे। इसलिए कानून के अनुसार उस जानकारी का खुलासा करना जरूरी नहीं था।
याचिका में यह भी कहा गया कि रिटर्निंग ऑफिसर ने बिना उचित अवसर दिए नामांकन रद्द कर दिया। इससे प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का भी पालन नहीं हुआ। कांग्रेस का दावा है कि पूरी कार्रवाई चुनाव नियमों के विपरीत रही।
हाई कोर्ट में सुनवाई के दौरान क्या हुआ
मंगलवार को जस्टिस बीपी शर्मा की एकल पीठ में मामले की सुनवाई हुई। मीनाक्षी नटराजन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने विस्तार से पक्ष रखा। अदालत को बताया गया कि नामांकन निरस्त करने का आधार कानूनी रूप से कमजोर है। यह भी कहा गया कि चुनाव अधिकारियों ने नियम पुस्तिका का सही पालन नहीं किया।
प्रारंभिक सुनवाई के बाद हाई कोर्ट ने मामले को विचार योग्य माना। इसके बाद राज्य सरकार, रिटर्निंग ऑफिसर और सभी प्रतिवादियों को नोटिस जारी किए गए।
किन लोगों को बनाया गया है प्रतिवादी
इस चुनाव याचिका में राज्य सरकार के अलावा रिटर्निंग ऑफिसर को भी पक्षकार बनाया गया है। इलेक्शन कमीशन ऑफ़ इंडिया और चीफ इलेक्शन ऑफिसर भोपाल को भी प्रतिवादी बनाया गया है।
इसके साथ ही निर्विरोध चुने गए भाजपा के तीनों राज्यसभा सदस्य भी प्रतिवादी हैं। इनमें तरुण चुघ, रजनीश कुमार अग्रवाल और महेश केवल शामिल हैं। हाई कोर्ट ने सभी को अपना जवाब पेश करने का निर्देश दिया है। अब सभी पक्ष अगली सुनवाई में अपना पक्ष अदालत के सामने रखेंगे।
निर्विरोध निर्वाचन पर भी उठाए गए सवाल
याचिका में कहा गया है कि यदि मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द नहीं होता तो चुनाव होता। ऐसे में मतदाताओं को मतदान का अवसर मिलता। याचिका में यह भी दावा किया गया है कि दूसरे उम्मीदवारों के दस्तावेजों की जांच समान तरीके से नहीं हुई।
कुछ हलफनामों में कथित कमियों के बावजूद उनके नामांकन स्वीकार किए गए। इसी आधार पर पूरी चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता पर सवाल उठाए गए हैं।
11 अगस्त की सुनवाई होगी अहम
11 अगस्त को होने वाली सुनवाई इस मामले का अगला महत्वपूर्ण चरण होगी। उस दिन सभी प्रतिवादी अपना जवाब दाखिल करेंगे। इसके बाद अदालत तय करेगी कि मामले में आगे क्या प्रक्रिया अपनाई जाए।
यदि कोर्ट को पहली नजर में नियमों के उल्लंघन के पर्याप्त आधार मिलते हैं, तो आगे की सुनवाई और भी महत्वपूर्ण हो सकती है। फिलहाल हाई कोर्ट ने केवल नोटिस जारी किया है। अंतिम फैसला अभी आना बाकी है।
इस मामले पर सभी की नजर
यह मामला केवल एक उम्मीदवार के नामांकन तक सीमित नहीं है। इसका संबंध राज्यसभा चुनाव की पूरी प्रक्रिया से जुड़ा है। यदि अदालत याचिका में उठाए गए सवालों को सही मानती है, तो इसके दूरगामी कानूनी और राजनीतिक असर हो सकते हैं। फिलहाल सभी की नजर 11 अगस्त की सुनवाई पर टिकी हुई है। वहीं से इस चुनावी विवाद की अगली दिशा तय होगी।
ये खबरें भी पढ़ें...
राज्यसभा नामांकन रद्द होने के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची मीनाक्षी नटराजन, दायर की पिटिशन
दतिया उपचुनाव: कांग्रेस ने उतारा डमी कैंडिडेट, मीनाक्षी नटराजन मामले से लिया सबक
फॉर्म सही था, नीयत आयोग की खराब थी: नामांकन रद्द होने पर बोलीं मीनाक्षी नटराजन
मीनाक्षी नटराजन केस: नामांकन फार्म भरने से शुरू हुईं ये तीन गलतियां करती गई कांग्रेस