विधायक चिंतामणि मालवीय ने IAS अधिकारियों पर उठाए सवाल, विधायक-महापौर मुख्य सचिव से ऊपर
News in Short
- विधायक मालवीय ने कहा, राज्य में शक्ति जनता नहीं, नौकरशाही के पास है।
- मुख्य सचिव और कलेक्टर स्तर पर प्रशासनिक ढांचे में बदलाव की मांग की।
- मालवीय ने कहा, एक अधिकारी के पास कई विभाग होने से जनप्रतिनिधियों का महत्व कम होता है।
- अन्य देशों में कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं, ब्रिटिश शासन की देन।
- विधायक और महापौर प्रोटोकॉल में मुख्य सचिव से ऊपर हैं, लेकिन सम्मान कम मिलता है।
News in Detail
बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय ने सरकार की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट कर
उन्होंने कहा कि राज्य में शक्ति का केंद्र जनता या जनप्रतिनिधि नहीं, बल्कि नौकरशाही बन गई है। उन्होंने मुख्य सचिव से लेकर कलेक्टर स्तर तक प्रशासनिक ढांचे में बदलाव और रिस्ट्रक्चरिंग की मांग की। लोकतांत्रिक व्यवस्था अप्रत्यक्ष रूप से कॉर्पोरेट मॉडल में बदल रही है।
डॉ. मालवीय ने कहा कि राज्य में कार्यपालिका के पास अत्यधिक शक्तियां केंद्रित हैं। कानून-व्यवस्था विकास आपदा प्रबंधन भू-प्रबंधन राजस्व और मजिस्ट्रेट संबंधी अधिकार एक ही अधिकारी के पास हैं। इससे शक्ति का संतुलन बिगड़ गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आईएएस अधिकारियों पर कार्रवाई के उदाहरण इतने कम क्यों हैं।
मंत्री के पास केवल एक ही विभाग
मालवीय ने कहा कि केंद्र सरकार में हर विभाग का केवल एक सचिव होता है। राज्यों में मुख्य सचिव के अलावा कई अतिरिक्त चीफ सेक्रेटरी और प्रिंसिपल सेक्रेटरी बनाए जाते हैं। कई बार एक अधिकारी के पास पांच से सात विभाग होते हैं। मंत्री के पास केवल एक ही विभाग रहता है। इससे अधिकारियों का प्रभाव बढ़ जाता है। जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित महत्व नहीं मिल पाता।
कई देशों में कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं
विधायक ने कहा कि अमेरिका समेत कई देशों में कलेक्टर जैसी व्यवस्था नहीं है। भारत में यह ब्रिटिश शासन की देन है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में प्रशासनिक ढांचे की समीक्षा और पुनर्गठन पर चर्चा जरूरी है।
विधायक और महापौर मुख्य सचिव से ऊपर
मालवीय ने कहा कि प्रोटोकॉल सूची में विधायक और महापौर मुख्य सचिव से ऊपर हैं। कलेक्टर उनसे काफी नीचे होते हैं। इसके बावजूद जनप्रतिनिधियों को अपेक्षित सम्मान नहीं मिलता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में शक्ति संतुलन बहाल करने के लिए व्यापक प्रशासनिक सुधार जरूरी हैं।
विधायक मालवीय का वीडियो नहीं देखा
मध्यप्रदेश आईएएस एसोसिएशन के अध्यक्ष मनु श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने विधायक मालवीय का वीडियो नहीं देखा। इसलिए वे उसके बारे में टिप्पणी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में कलेक्टर और जनता के बीच सीधा संवाद है। अन्य राज्यों में कलेक्टर और एसपी के फोन उनके पीए रिसीव करते हैं। कुछ राज्यों में अधिकारी दोपहर बाद दफ्तर नहीं आते और कैंप ऑफिस से काम करते हैं। मध्यप्रदेश में अधिकारियों जनता और जनप्रतिनिधियों के बीच परस्पर संबंध बेहतर हैं। विधायक के बयान की उन्हें पूरी जानकारी नहीं है।
FAQ
- विधायक चिंतामणि मालवीय ने किस पर सवाल उठाए?
मालवीय ने IAS अधिकारियों की शक्ति और जनप्रतिनिधियों की उपेक्षा पर सवाल उठाए। - IAS एसोसिएशन का क्या जवाब है?
एसोसिएशन ने कहा कि मध्य प्रदेश में अधिकारियों और जनता के बीच सीधा संवाद है।
ये भी पढ़ें...
IAS संतोष वर्मा से जुड़े केस में निलंबित जज अमन सिंह भूरिया गिरफ्तार
MP में IAS-IPS-IFS अधिकारियों का 2% DA बढ़ा, अब मिलेगा 60% महंगाई भत्ता
2 साल में 13 IAS-IPS आए राजस्थान कैडर में, प्रदेश बना अफसरों की पहली पसंद
बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय और कांग्रेस की रीना बोरासी विवाद में मंत्री तुलसी सिलावट उलझ गए