IAS संतोष वर्मा से जुड़े केस में निलंबित जज अमन सिंह भूरिया गिरफ्तार
Aman Vaishnav | May 29, 2026, 12:10 IST
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इंदौर के चर्चित फर्जी कोर्ट ऑर्डर मामले में SIT ने निलंबित CJM अमन सिंह भूरिया को गिरफ्तार किया है। जानकारी के अनुसार SIT ने उनसे लगभग दो घंटे पूछताछ भी की थी।
इंदौर के फर्जी फैसला कांड में SIT ने एक बड़ी कार्रवाई की है। उन्होंने तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन सिंह भूरिया को गिरफ्तार किया है। हालांकि पहले से हाईकोर्ट से उन्हें अग्रिम जमानत मिल चुकी थी।
इसलिए गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। जानकारी के अनुसार SIT ने उनसे लगभग दो घंटे पूछताछ भी की थी।
ये मामला उस समय के राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारी संतोष वर्मा से जुड़ा है। हर्षिता अग्रवाल की शिकायत के बाद 2021 में इंदौर के एमजी रोड पुलिस ने आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज किया था। इसके बाद जांच में स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत का नाम भी सामने आया था। पुलिस ने उनसे भी पूछताछ की थी। अमन सिंह भूरिया पहले बेड़न सिंगरौली में पदस्थ थे। उन्हें हाई कोर्ट ने जांच के बाद निलंबित कर दिया।
एसीपी विनोद दीक्षित के अनुसार हाई कोर्ट से अग्रिम जमानत मिलने के बाद अमन सिंह खुद कोर्ट में पेश हुए थे। पुलिस ने कोर्ट की शर्तों के मुताबिक उन्हें गिरफ्तार किया। साथ ही जमानत पर रिहा कर दिया था। इसके बाद पुलिस ने अमन सिंह से केस से जुड़े कुछ सवाल पूछे।
बता दें कि अमनसिंह साल 2021 में सीजेएम के पद पर थे। उन्होंने आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ केस को स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। जबकि लसूड़िया थाना रावत के अधीन नहीं आता था। अमन सिंह ने कहा कि यह ट्रांसफर न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे आईएएस संतोष वर्मा को नहीं पहचानते हैं।
दरअसल हाल ही में आईएएस संतोष वर्मा केस के फर्जी कोर्ट आदेश मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ था। मामले में पहले ही संतोष वर्मा और एडीजे विजेंद्र सिंह रावत फंसे हुए थे। पुलिस ने इंदौर जिला कोर्ट के तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट अमन सिंह भूरिया को इस षड़यंत्र का मुख्य आरोपी बताया था।
इंदौर पुलिस ने 17 अप्रैल को भूरिया को नोटिस भेजा था। इसके बाद 28 अप्रैल को उन्हें मोबाइल के साथ पेश होने के लिए कहा गया था। इसके जवाब में भूरिया ने जिला कोर्ट में जमानत की याचिका लगाई थी।
भूरिया ने कहा था कि उन्हें डर है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। एमजी रोड थाने में दर्ज किए गए केस में उन्हें आरोपी बनाया गया है।
लसूडिया थाने में संतोष वर्मा के खिलाफ एक केस दर्ज हुआ था। इस केस का चालान जिला कोर्ट में पेश किया गया था।
इस केस में एडीजे विजेंद्र सिंह रावत ने जून 2021 में एमजी रोड थाने में एक आवेदन दिया था। उन्होंने बताया था कि उनकी कोर्ट से 6 अक्टूबर 2020 को जो आदेश जारी हुआ, वह कूटरचित है। उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।
बता दें कि यह आदेश संतोष वर्मा को लसूडिया केस में बरी करने का था। इससे पहले एक और आदेश आया था। इसमें बताया गया था कि महिला और संतोष वर्मा के बीच राजीनामा हुआ था।
रावत के आवेदन पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद इस केस में संतोष वर्मा के अलावा एडीजे रावत और लिपिक नीतू सिंह चौहान को भी आरोपी बना दिया गया था।
पुलिस का कहना था कि रावत और वर्मा ने मिलकर यह आदेश बनाया था।
पुलिस ने एक अहम खुलासा करते हुए बताया था कि भूरिया ने ही अपने चेंबर में संतोष वर्मा और विजेंद्र सिंह रावत की मुलाकात करवाई थी। पुलिस ने केस डायरी में बताया था कि संतोष वर्मा और विजेंद्र रावत दोनों के बयान ले लिए गए हैं। दोनों ने इस मुलाकात को सही बताया है।
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जानकारी के अनुसार इस केस को लेकर संतोष वर्मा और उनके बीच लगातार बात होती रही है। वो भी दो मोबाइल नंबरों से। 16 सितंबर 2020 से 22 जून 2021 तक दोनों के बीच 32 बार बातचीत हुई थी।
वह भी न्यायिक काम के बाद रात में। जानकारी के अनुसार जब 30 सितंबर को केस रावत की कोर्ट में षड़यंत्र के तहत शिफ्ट किया गया उस दिन भी दोनों के बीच 8 बार बात हुई थी।
इसके बाद 1 अक्टूबर को रात 8:38 बजे भी दोनों के बीच चर्चा हुई थी। वहीं 16 सितंबर से 25 सितंबर तक सुबह 10:52 से लेकर रात 10:35 तक भी बातचीत होती रही।
इसके बाद 30 सितंबर को जेएमएफसी अरविंद गुर्जर की कोर्ट से केस रावत की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था। दोनों के बीच की व्हाट्सएप चैट भी मौजूद है।
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इसलिए गिरफ्तारी के बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर दिया गया। जानकारी के अनुसार SIT ने उनसे लगभग दो घंटे पूछताछ भी की थी।
जांच के बाद किया निलंबित
आईएएस संतोष वर्मा को पहचानने से इनकार
बता दें कि अमनसिंह साल 2021 में सीजेएम के पद पर थे। उन्होंने आईएएस संतोष वर्मा के खिलाफ केस को स्पेशल जज विजेंद्रसिंह रावत की अदालत में ट्रांसफर कर दिया था। जबकि लसूड़िया थाना रावत के अधीन नहीं आता था। अमन सिंह ने कहा कि यह ट्रांसफर न्यायिक प्रक्रिया के तहत किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि वे आईएएस संतोष वर्मा को नहीं पहचानते हैं।
आईएएस संतोष वर्मा केस का खुलासा
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भूरिया ने यह कहकर लगाई याचिका
भूरिया ने कहा था कि उन्हें डर है कि उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है। एमजी रोड थाने में दर्ज किए गए केस में उन्हें आरोपी बनाया गया है।
यह है पूरा केस
इस केस में एडीजे विजेंद्र सिंह रावत ने जून 2021 में एमजी रोड थाने में एक आवेदन दिया था। उन्होंने बताया था कि उनकी कोर्ट से 6 अक्टूबर 2020 को जो आदेश जारी हुआ, वह कूटरचित है। उन्होंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया था।
बता दें कि यह आदेश संतोष वर्मा को लसूडिया केस में बरी करने का था। इससे पहले एक और आदेश आया था। इसमें बताया गया था कि महिला और संतोष वर्मा के बीच राजीनामा हुआ था।
रावत के आवेदन पर पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ केस दर्ज किया और जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद इस केस में संतोष वर्मा के अलावा एडीजे रावत और लिपिक नीतू सिंह चौहान को भी आरोपी बना दिया गया था।
पुलिस का कहना था कि रावत और वर्मा ने मिलकर यह आदेश बनाया था।
भूरिया ने ही रावत और वर्मा को मिलवाया था
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वर्मा और भूरिया के बीच में लगातार फोन कॉल
वह भी न्यायिक काम के बाद रात में। जानकारी के अनुसार जब 30 सितंबर को केस रावत की कोर्ट में षड़यंत्र के तहत शिफ्ट किया गया उस दिन भी दोनों के बीच 8 बार बात हुई थी।
इसके बाद 1 अक्टूबर को रात 8:38 बजे भी दोनों के बीच चर्चा हुई थी। वहीं 16 सितंबर से 25 सितंबर तक सुबह 10:52 से लेकर रात 10:35 तक भी बातचीत होती रही।
इसके बाद 30 सितंबर को जेएमएफसी अरविंद गुर्जर की कोर्ट से केस रावत की कोर्ट में ट्रांसफर हुआ था। दोनों के बीच की व्हाट्सएप चैट भी मौजूद है।
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