मोहन सरकार का साइबर अलर्ट! ठगी गांवों तक पहुंची, अब जागी पुलिस
समझें क्या है पूरा मामला...
- गांवों में साइबर ठगी तेजी से बढ़ी।
- सरकार ने सेफ क्लिक 2.0 शुरू किया।
- 50 हजार से अधिक गांव शामिल होंगे।
- डिजिटल अरेस्ट और फ्रॉड बड़े खतरे हैं।
- पुलिस 1930 हेल्पलाइन की जानकारी देगी।
साइबर ठगी अब गांवों तक पहुंची
मध्य प्रदेश में साइबर ठगी अब सिर्फ शहरों तक सीमित नहीं रही। गांवों में भी डिजिटल लेनदेन बढ़ने के साथ ऑनलाइन धोखाधड़ी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बढ़ते खतरे के बीच अब मोहन सरकार ने राज्यभर के 50 हजार से ज्यादा गांवों में 'सेफ क्लिक 2.0' अभियान शुरू किया है। सवाल यह भी उठ रहा है कि जब साइबर अपराध गांव-गांव तक फैल गए।
सरकार और पुलिस ने बड़ा अभियान शुरू किया है। इसका उद्देश्य साइबर जागरूकता बढ़ाना है। यह अभियान 50 हजार से अधिक गांवों में चलेगा। डिजिटल अरेस्ट और डीपफेक बड़े खतरे बने हैं। फर्जी निवेश के मामलों में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है।
ग्रामीण अब साइबर अपराधियों के मुख्य निशाने पर हैं। पुलिस 1930 हेल्पलाइन की जानकारी देगी। शिकायत पोर्टल के उपयोग की भी जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि जागरूकता की कमी से ठगी बढ़ रही है।
गांव बने साइबर ठगों का नया निशाना
एक समय साइबर अपराध बड़े शहरों की समस्या माना जाता था, लेकिन अब तस्वीर बदल चुकी है। स्मार्टफोन, इंटरनेट और यूपीआई गांवों तक पहुंचने के बाद साइबर ठगों ने भी अपने ठिकाने बदल लिए हैं। ग्रामीण इलाकों में डिजिटल सेवाओं का इस्तेमाल बढ़ा, लेकिन सुरक्षा की जानकारी उसी रफ्तार से नहीं पहुंच सकी। इसी कमजोरी का फायदा अपराधी उठा रहे हैं।
नुकसान के बाद जोर दे रही सरकार
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अभियान की शुरुआत करते हुए साइबर अपराध को अदृश्य दुश्मन बताया। उन्होंने कहा कि डिजिटल अरेस्ट, फर्जी निवेश लिंक, डीपफेक वीडियो, ओटीपी फ्रॉड और ऑनलाइन ठगी तेजी से बढ़ रही है। हालांकि विपक्ष और जानकार सवाल उठा रहे हैं कि जब खतरा लगातार बढ़ रहा था, तब जागरूकता अभियान पहले क्यों नहीं चलाया गया?
सरकारी योजनाओं के पैसे भी बने ठगों का जरिया
आज किसान सम्मान निधि, पेंशन, छात्रवृत्ति, मनरेगा और अन्य योजनाओं की राशि सीधे बैंक खातों में पहुंच रही है। गांवों की दुकानों से लेकर छोटे व्यापार तक यूपीआई भुगतान आम हो चुका है। लेकिन डिजिटल सुविधा जितनी तेजी से बढ़ी, साइबर सुरक्षा की समझ उतनी मजबूत नहीं हो सकी।
ऐसे लोगों को फंसा रहे हैं साइबर अपराधी
साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या किसी योजना का प्रतिनिधि बताकर कॉल करते हैं। कभी केवाईसी अपडेट, कभी सब्सिडी, तो कभी सरकारी लाभ दिलाने के नाम पर लोगों से बैंक डिटेल और ओटीपी मांगते हैं। फर्जी लिंक, नकली निवेश योजनाएं और लॉटरी का लालच देकर भी लोगों के खाते खाली किए जा रहे हैं।
अब गांव-गांव पहुंचेगी पुलिस
अभियान के तहत प्रदेश के 10 संभाग, 55 जिलों और 50 हजार से अधिक गांवों में लोगों को साइबर सुरक्षा की जानकारी दी जाएगी। पंचायत, स्कूल, बैंक, बाजार, धार्मिक स्थल और सार्वजनिक स्थानों पर जागरूकता कार्यक्रम होंगे। साथ ही 1930 हेल्पलाइन और नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल के बारे में भी बताया जाएगा।
अगर साइबर अपराध लगातार गांवों तक फैल रहे थे, तो क्या जागरूकता अभियान पहले शुरू नहीं होना चाहिए था? डिजिटल इंडिया के साथ डिजिटल सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। केवल अभियान चलाने से नहीं, बल्कि लगातार प्रशिक्षण और त्वरित कार्रवाई से ही साइबर अपराध पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
ये भी पढ़ें...
सीएम हाउस में तैनात पुलिसकर्मी से साइबर ठगी, एक सैकेंड में साफ 1.80 लाख
साइबर ठगी का पैसा सोने में लगाया, MBA पास आरोपियों का 3 राज्यों में नेटवर्क
SEBI का नाम लेकर साइबर ठगी, फर्जी ऐप से लगाया 27 लाख का चूना
साइबर ठगी: यूके से गिफ्ट भेजने के नाम पर महिला से 3.91 लाख रुपए की ठगी