आंदोलन के बाद किसानों ने रोकी मूंग, एक दिन में 85% घटी आवक, 8% बढ़े दाम
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश सरकार ने दलहन की सरकारी खरीदी का दायरा 60% कर दिया है।
- इसका सीधा असर भोपाल की करोंद मंडी में दिखने लगा है।
- गुरुवार को मंडी में मूंग की आवक घटकर सिर्फ 25 क्विंटल रह गई।
- एक दिन में 85% की गिरावट आई है।
- आवक घटने से मूंग के भाव में भी 8% तक की तेजी देखी गई।
आवक क्यों घटी अचानक
किसानों के आंदोलन के बाद राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया। दलहन की सरकारी खरीदी (सरकारी खरीदी केंद्र) का दायरा 25% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया।
इस फैसले का असर मंडियों में अब साफ नजर आने लगा है। भोपाल की करोंद मंडी में मूंग की आवक अचानक घट गई है।
जानकारी के अनुसार गुरुवार को मंडी में मूंग की महज 25 क्विंटल आवक दर्ज हुई। जबकि बुधवार को यह आवक 167 क्विंटल थी।
यानी एक ही दिन में आवक में करीब 85% की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट व्यापारियों के लिए भी हैरान करने वाली रही।
माना जा रहा है कि किसान अब बढ़ी हुई सरकारी खरीदी का लाभ लेना चाहते हैं। इसी वजह से वे फिलहाल अपनी फसल रोक रहे हैं। वे मंडी में उपज लाने से बच रहे हैं। किसानों को उम्मीद है कि आने वाले दिनों में समर्थन मूल्य पर ज्यादा उपज बेचने का मौका मिलेगा।
एक दिन में भाव में उछाल
दूसरी ओर आवक घटने के साथ ही मूंग के भाव में भी तेजी देखने को मिली है। गुरुवार को मंडी में मूंग की नीलामी 5 हजार 600 से 6 हजार 800 रुपए प्रति क्विंटल के भाव पर हुई।
जबकि बुधवार को यह भाव 5 हजार 252 से 6 हजार 300 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहा था। यानी एक ही दिन में औसत भाव में करीब 8% की बढ़ोतरी दर्ज हुई। न्यूनतम भाव में भी करीब 7% तक की बढ़ोतरी देखी गई।
व्यापारियों का कहना है कि सरकार की घोषणा के बाद किसान फिलहाल अपनी उपज मंडियों में नहीं ला रहे हैं। पहले प्रतिदिन करीब सवा क्विंटल मूंग की सरकारी खरीदी होती थी।
अब इसे बढ़ाकर प्रति किसान करीब 3 क्विंटल कर दिया गया है। इस वजह से किसानों को समर्थन मूल्य पर ज्यादा मात्रा में उपज बेचने का भरोसा है।
यही वजह है कि वे फिलहाल बिक्री टाल रहे हैं। इसका सीधा असर बाजार भाव पर भी दिखाई दे रहा है।
व्यापारियों की राय
करोंद मंडी व्यापारी संघ के प्रवक्ता संजीव जैन ने बताया कि सरकार के फैसले का असर मंडियों में साफ दिखाई दे रहा है।
आवक घटने से भाव लगातार बढ़ रहा है। उनका कहना है कि आने वाले दिनों में इसका असर खुदरा बाजार में भी देखने को मिल सकता है।
मंडियों से बड़ी मात्रा में मूंग दाल मिलों में जाती है। वहां से प्रोसेस होकर यह उपज रिटेल बाजार तक पहुंचती है। ऐसे में आवक कम रहने से आगे मूंग दाल के दाम भी बढ़ सकते हैं।
भोपाल से मूंग कर्नाटक, दिल्ली, इंदौर, कटनी और पिपरिया की दाल मिलों में भेजी जाती है।
बता दें कि राज्य सरकार इस समय 8 हजार 768 रुपए प्रति क्विंटल की दर से मूंग खरीद रही है। जबकि करोंद मंडी में गुरुवार को कारोबारी भाव 5 हजार 600 से 6 हजार 800 रुपए प्रति क्विंटल के बीच रहा।
यानी सरकारी दर और मंडी भाव में अभी भी बड़ा अंतर बना हुआ है। यही अंतर किसानों को सरकारी खरीदी की ओर आकर्षित कर रहा है।
ई-नाम से जुड़ेंगी मंडियां
इसी बीच राज्य सरकार ने मंडियों को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने की तैयारी भी शुरू कर दी है। इसके लिए राज्य स्तरीय संचालन समिति का गठन किया गया है। यह समिति कृषि उत्पादन आयुक्त की अध्यक्षता में काम करेगी।
समिति प्रदेश की मंडियों को ई-नाम पोर्टल से जोड़ने के प्रस्तावों को मंजूरी देगी। इसके बाद यह प्रस्ताव केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। निजी मंडी प्रांगण, निजी खरीदी केंद्र और गोदाम जैसी सुविधाओं को भी इस पोर्टल से जोड़ा जा सकेगा।
इस व्यवस्था से किसानों को नया विकल्प मिलेगा। वे अब सिर्फ स्थानीय मंडी के व्यापारियों तक सीमित नहीं रहेंगे। वे ई-नाम पोर्टल के जरिए देशभर के व्यापारियों को भी अपनी उपज बेच सकेंगे। इससे किसानों को अपनी फसल का बेहतर दाम चुनने का मौका मिलेगा।
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