एमपी को मूंग खरीदी में हर साल 1115 करोड़ का घाटा, तीन साल में 3346 करोड़ की चपत
Sanjay Dhiman | Jul 30, 2026, 16:48 IST
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मध्य प्रदेश सरकार को कोटे से ज्यादा मूंग खरीदने पर तीन साल में 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। सरकार अब केंद्र से ज्यादा कोटा मांग रही है।
मध्य प्रदेश सरकार को मूंग खरीदी में भारी नुकसान हो रहा है। तीन साल में यह नुकसान 3346 करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कारण है केंद्र सरकार के तय कोटे से ज्यादा मूंग खरीदना। एमपी देश में सबसे ज्यादा मूंग खरीदने वाला राज्य बन गया है। अब सरकार केंद्र से अपना कोटा बढ़ाने की मांग कर रही है।
मध्य प्रदेश सरकार को हर साल करीब 1150 करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा है। यह नुकसान सिर्फ मूंग खरीदने से नहीं होता। खरीदी के बाद परिवहन, वेयरहाउस में रखरखाव और बाजार में बिक्री तक हर स्तर पर घाटा बढ़ता जाता है।
एक सरकारी दस्तावेज के अनुसार, तीन साल में जरूरत से ज्यादा मूंग खरीदने से कुल 3,346 करोड़ रुपए की हानि हुई है। इसका मतलब है हर साल औसतन 1,115 करोड़ रुपए का सीधा वित्तीय बोझ।
केंद्र सरकार की प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस – Price Support Scheme) के तहत हर राज्य से मूंग खरीदी जाती है। इसमें मध्य प्रदेश हमेशा सबसे आगे रहा है।
पिछले तीन सालों (2023-24 से 2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदार राज्य है। यहां हर साल कुल उत्पादन का 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है।
इसके मुकाबले राजस्थान में यह आंकड़ा सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह हिस्सा 3 प्रतिशत से भी कम रहा। कई बार तो खरीदी शून्य के बराबर रही।
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हर साल केंद्र सरकार राज्यों के लिए मूंग खरीदी का लक्ष्य तय करती है। मध्य प्रदेश का लक्ष्य लगातार बढ़ता गया है।
साल 2023-24 में यह लक्ष्य 2.76 लाख मीट्रिक टन था। 2024-25 में यह बढ़कर 3.31 लाख मीट्रिक टन हो गया। 2025-26 में लक्ष्य 3.51 लाख मीट्रिक टन रखा गया।
लेकिन असली खरीदी इससे भी आगे निकल गई। 2023-24 में 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई। 2024-25 में यह आंकड़ा 2.90 लाख मीट्रिक टन रहा। 2025-26 में तो खरीदी बढ़कर 4.20 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। यानी तय लक्ष्य से भी ज्यादा मूंग खरीद ली गई।
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राजस्थान की स्थिति एमपी से बिल्कुल अलग है। वहां खरीदी का लक्ष्य ज्यादा होने के बावजूद असली खरीदी उत्पादन के सिर्फ 10 प्रतिशत के आसपास रही।
महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तो हालात और अलग हैं। कई सालों में लक्ष्य मिलने के बावजूद इन राज्यों में या तो खरीदी नहीं हुई या बहुत कम हुई।
इस बढ़ते नुकसान को देखते हुए मध्य प्रदेश सरकार ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से बड़ी मांग की है। सरकार चाहती है कि राज्य का मूंग खरीदी कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत किया जाए।
सरकार का तर्क सीधा है। जब सबसे ज्यादा मूंग एमपी में ही खरीदी जाती है, तो जिन राज्यों में खरीदी कम होती है, उनका कोटा एमपी को दे दिया जाना चाहिए। इससे केंद्र सरकार को देशभर की कुल खरीदी सीमा भी नहीं बढ़ानी पड़ेगी।
अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है। इस पर आगे भी फैसला आना बाकी है।
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हर साल भारी नुकसान
एक सरकारी दस्तावेज के अनुसार, तीन साल में जरूरत से ज्यादा मूंग खरीदने से कुल 3,346 करोड़ रुपए की हानि हुई है। इसका मतलब है हर साल औसतन 1,115 करोड़ रुपए का सीधा वित्तीय बोझ।
एमपी अव्वल क्यों
पिछले तीन सालों (2023-24 से 2025-26) के आंकड़े बताते हैं कि मध्य प्रदेश देश का सबसे बड़ा मूंग खरीदार राज्य है। यहां हर साल कुल उत्पादन का 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है।
इसके मुकाबले राजस्थान में यह आंकड़ा सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में यह हिस्सा 3 प्रतिशत से भी कम रहा। कई बार तो खरीदी शून्य के बराबर रही।
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आंकड़ों की पूरी कहानी
साल 2023-24 में यह लक्ष्य 2.76 लाख मीट्रिक टन था। 2024-25 में यह बढ़कर 3.31 लाख मीट्रिक टन हो गया। 2025-26 में लक्ष्य 3.51 लाख मीट्रिक टन रखा गया।
लेकिन असली खरीदी इससे भी आगे निकल गई। 2023-24 में 2.76 लाख मीट्रिक टन खरीदी हुई। 2024-25 में यह आंकड़ा 2.90 लाख मीट्रिक टन रहा। 2025-26 में तो खरीदी बढ़कर 4.20 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच गई। यानी तय लक्ष्य से भी ज्यादा मूंग खरीद ली गई।
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राजस्थान से तुलना
महाराष्ट्र, कर्नाटक, हरियाणा और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में तो हालात और अलग हैं। कई सालों में लक्ष्य मिलने के बावजूद इन राज्यों में या तो खरीदी नहीं हुई या बहुत कम हुई।
सरकार की नई मांग
सरकार का तर्क सीधा है। जब सबसे ज्यादा मूंग एमपी में ही खरीदी जाती है, तो जिन राज्यों में खरीदी कम होती है, उनका कोटा एमपी को दे दिया जाना चाहिए। इससे केंद्र सरकार को देशभर की कुल खरीदी सीमा भी नहीं बढ़ानी पड़ेगी।
अब देखना यह होगा कि केंद्र सरकार इस मांग पर क्या फैसला लेती है। इस पर आगे भी फैसला आना बाकी है।
FAQ
- मध्य प्रदेश को मूंग खरीदी में कितना नुकसान हुआ है?
तीन साल में मध्य प्रदेश सरकार को कुल 3346 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ है। यह नुकसान हर साल औसतन 1115 करोड़ रुपए के बराबर है। कारण है कोटे से ज्यादा मूंग की खरीदी। - मध्य प्रदेश सरकार क्या मांग कर रही है?
सरकार केंद्र से मूंग खरीदी का कोटा 25 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत करने की मांग कर रही है। तर्क यह है कि दूसरे राज्यों का बिना इस्तेमाल हुआ कोटा एमपी को दे दिया जाए। - कौन सा राज्य सबसे ज्यादा मूंग खरीदता है?
मध्य प्रदेश देश में सबसे ज्यादा मूंग खरीदने वाला राज्य है। यहां हर साल उत्पादन का 20 से 22 प्रतिशत हिस्सा समर्थन मूल्य पर खरीदा जाता है। राजस्थान में यह आंकड़ा सिर्फ 5 से 10 प्रतिशत है।
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