मुरैना-भिंड गेहूं खरीद घोटाले में पटवारियों के बाद 10 समितियों पर FIR

Aman Vaishnav | Jun 30, 2026, 09:31 IST
मुरैना-भिंड गेहूं खरीद घोटाला
हाल ही में एमपी के मुरैना और भिंड में फर्जी किसानों के नाम पर गेहूं बेचने का घोटाला सामने आया था। इस मामले में प्रशासन ने समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों सहित कुल 20 पर FIR दर्ज की है।

समझें क्या है पूरा मामला...

  • मुरैना-भिंड में फर्जी किसानों के नाम पर गेहूं बेचने का बड़ा घोटाला हुआ है।
  • आरोपियों ने बिना खेती किए उत्तर प्रदेश से गेहूं खरीदा था।
  • फिर इसे मध्यप्रदेश में समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया।
  • इस मामले में कलेक्टर ने अब तक 15 पटवारी सस्पेंड किए हैं।
  • रविवार रात 10 समिति प्रबंधकों और ऑपरेटरों पर FIR भी दर्ज हो गई है।

गेहूं खरीद में बड़ी गड़बड़ी

बता दें कि मुरैना जिले में यह घोटाला कई महीनों से चल रहा था। यहां फर्जी किसानों ने अपने नाम पर पंजीयन कराया। इसके बाद (उत्तरप्रदेश) बाहर से लाया गया गेहूं समर्थन मूल्य पर बेच दिया गया। इस तरह सरकारी खरीद प्रणाली का सीधा दुरुपयोग हुआ।



वहीं प्रशासन को जब इसकी जानकारी मिली तो जांच शुरू हुई। जांच में कई हल्कों के पटवारी और तहसीलदार भी संदेह के घेरे में आए। कलेक्टर ने पहले ही 15 पटवारियों को सस्पेंड कर दिया था। दो तहसीलदारों को नोटिस भी जारी हुआ है।



mp-fake-farmers-wheat-procurement-fraud-eow-2026-06-24-12-13-13


MP में हजारों क्विंटल गेहूं बिना बोए बेचा, फर्जी किसानों को दे दिए 4.82 करोड़



10 समिति प्रबंधकों पर FIR

इसके बाद रविवार 28 जून की रात कलेक्टर के निर्देश पर बड़ी कार्रवाई हुई। जिले के 10 समिति प्रबंधकों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के खिलाफ FIR दर्ज की गई।



इनमें चेना, गलेथा, भैंसरोली, जरेरुआ और जैतपुर नूराबाद समितियां शामिल हैं। परसोंता, उत्तमपुरा, नितेहरा, सुमावली और खनेता समितियों के नाम भी इस सूची में हैं।



इन सभी समितियों पर आरोप है कि यहां फर्जी पंजीयन के आधार पर गेहूं खरीदा गया। प्रबंधक और ऑपरेटर दोनों की मिलीभगत की बात सामने आ रही है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क की तह तक जाने की कोशिश कर रही है।



भिंड में भी जांच पर सवाल

इसके अलावा भिंड जिले में भी 23 फर्जी किसानों का मामला सामने आया है। लहार एसडीएम ने इसकी प्रारंभिक जांच कराई थी। इस जांच में आरोपियों को बचाने की कोशिश की बात उठी है।



जांच प्रतिवेदन के अनुसार असली जमीन मालिकों से सहमति लेने की कोशिश हुई। इन्हीं जमीनों पर फर्जी लोगों ने पंजीयन कराकर गेहूं बेचा था। भिंड कलेक्टर केएल मीणा इस रिपोर्ट से संतुष्ट नहीं हैं।



रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि कुछ फर्जी पंजीयन असत्यापित किए गए। इसके बावजूद फर्जी लोगों को गेहूं बेचने से रोका नहीं जा सका। प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि भिंड में अगले दो दिनों में बड़ी कार्रवाई हो सकती है।



प्रशासन की सख्ती जारी

इस पूरे मामले में प्रशासन ने सख्त रुख अपनाया है। कलेक्टर स्तर पर लगातार निगरानी की जा रही है। जांच एजेंसियां सभी जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।



आने वाले दिनों में और भी नाम सामने आ सकते हैं। प्रशासन का कहना है कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा। किसानों के हित और सरकारी खरीद प्रणाली की पारदर्शिता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है।



जीरो टॉलरेंस नीति के तहत कार्रवाई

मुरैना कलेक्टर लोकेश जांगिड़ ने कहा कि गेहूं बेचने वाले गैर-भूस्वामी किसानों के मामले भले ही कम हों, लेकिन मध्यप्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत गड़बड़ी करने वालों पर लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है।



लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ

भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा ने बताया कि गलत तरीके से पंजीयन कर गेहूं बेचने वालों के बैंक खाते होल्ड कराने के लिए बैंकों को पत्र भेजा गया है।



कलेक्टर ने बताया कि लापरवाही बरतने वाले प्रबंधकों के खिलाफ कार्रवाई के लिए सहकारी बैंक को भी लिखा गया है। कलेक्टर ने कहा कि जल्द ही इस मामले में बड़ी कार्रवाई की जाएगी।



ये खबरें भी पढ़िए...

सागर के वेयरहाउस में गेहूं घोटाला: DSO को हटाया, सहायक अधिकारी निलंबित



गेहूं खरीदी के जख्म भरे नहीं, अब खाद की महंगाई ने बढ़ाई किसानों की मुश्किलें



एक के बाद एक खुल रहे गेहूं खरीदी घोटाला अब तक 1.35 करोड़ का घोटाला



Tags:
  • मध्यप्रदेश सरकार
  • भिंड
  • मुरैना
  • मध्यप्रदेश सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति
  • गेहूं खरीदी
  • लोकेश जांगिड़
  • गेहूं खरीदी घोटाला
  • भिंड कलेक्टर किरोड़ी लाल मीणा