183 नगरीय निकायों में एमपी सरकार जल्द करेगी 1080 एल्डरमैन की नियुक्ति
समझें क्या है पूरा मामला...
- मध्य प्रदेश में अगले साल स्थानीय निकाय चुनाव होने हैं।
- इससे पहले सरकार 183 निकायों में 1080 एल्डरमैन नियुक्त करेगी।
- भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने यह सिफारिश राज्य सरकार से की थी।
- मुख्यमंत्री मोहन यादव ने सभी नियुक्तियों को मंजूरी दे दी है।
- इन एल्डरमैन को सिर्फ जुलाई 2027 तक का कार्यकाल मिलेगा।
चुनाव से पहले भाजपा की बड़ी रणनीति
मध्य प्रदेश में अगले साल स्थानीय निकाय चुनाव होने जा रहे हैं। इससे ठीक एक साल पहले भाजपा और राज्य सरकार ने अपनी रणनीति तेज कर दी है। पार्टी नेताओं को संगठन में जिम्मेदारी देने की तैयारी शुरू हो गई है। इसके लिए राज्य सरकार 183 नगरीय निकायों में एक हजार से ज्यादा एल्डरमैन (मनोनीत पार्षद) नियुक्त करने जा रही है। इनमें भोपाल समेत प्रदेश के 13 नगर निगम शामिल हैं। इसके अलावा 56 नगर पालिकाएं और 114 नगर पंचायतें भी इस सूची में हैं। यानी पूरे प्रदेश में एक साथ बड़े स्तर पर यह नियुक्ति प्रक्रिया होने जा रही है।
मध्यप्रदेश भाजपा अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की तरफ से यह सिफारिश सरकार को भेजी गई थी। उनकी ओर से कुल 1080 पदों पर जिला स्तर के भाजपा नेताओं को एल्डरमैन बनाने का प्रस्ताव दिया गया था। इस प्रस्ताव में नगर निगमों के लिए 105 नाम, नगर पालिकाओं के लिए 325 नाम और नगर पंचायतों के लिए 650 नाम तय किए गए। यह आंकड़ा मिलकर पूरे 1080 तक पहुंचता है। मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव ने इन सभी नामों को हरी झंडी दे दी है।
एक-दो दिन में आ सकता है आदेश
अब इस मामले में सिर्फ औपचारिक आदेश जारी होना बाकी है। नगरीय विकास एवं आवास विभाग अगले एक या दो दिन में इन सभी नियुक्तियों के आदेश जारी कर सकता है। यानी जल्द ही जिले स्तर के भाजपा नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी मिलने वाली है। हालांकि इन एल्डरमैन को बहुत लंबा कार्यकाल नहीं मिलेगा। इनका कार्यकाल सिर्फ एक साल तक ही सीमित रहेगा। वजह यह है कि जुलाई 2027 में प्रदेश में नया चुनाव होना तय है। नया चुनाव होते ही पुरानी व्यवस्था अपने आप खत्म हो जाएगी।
पुरानी नियुक्तियां अब तक फाइलों में अटकी
इस बीच एक और मामला भी सामने आया है, जो सरकारी देरी की मिसाल बन गया है। राज्य सरकार ने इससे पहले भी 169 नगरीय निकायों में 768 एल्डरमैन की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे। यह आदेश 29 मार्च को जारी हुआ था। वहीं, तीन महीने बीत जाने के बाद भी यह नियुक्तियां फाइलों से बाहर नहीं निकल पाई हैं। इनमें 123 नगर परिषदों और 46 नगर पालिकाओं की नियुक्तियां शामिल हैं। यानी एक तरफ नई नियुक्ति की तैयारी हो रही है, तो दूसरी तरफ पुरानी नियुक्ति अब भी अटकी पड़ी है।
इस देरी के पीछे एक खास वजह बताई जा रही है। दरअसल पुलिस वेरिफिकेशन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हो सकी है। इसी कारण तीन महीने बाद भी गजट नोटिफिकेशन जारी नहीं हो पाया है। नोटिफिकेशन न होने से इन एल्डरमैन को आधिकारिक रूप से कार्यभार भी नहीं मिल सका है। यह नेता निकाय की बैठकों में भी हिस्सा नहीं ले पा रहे हैं। साथ ही इन्हें अभी तक मानदेय (पारिश्रमिक) मिलना भी शुरू नहीं हुआ है।
नाम और सरनेम की गलतियां बनीं वजह
नगरीय विकास एवं आवास विभाग के संयुक्त संचालक सुरेश बेलिया ने इस देरी पर अपनी सफाई दी है। उनके मुताबिक कुछ निकायों में नियुक्त नेताओं के नाम और सरनेम में गलतियां सामने आई थीं। इसी वजह से नोटिफिकेशन जारी करने से पहले त्रुटि सुधार की प्रक्रिया चलाई जा रही है। साथ ही सभी नामों का दोबारा सत्यापन भी कराया जा रहा है। विभाग का कहना है कि सुधार पूरा होने के बाद ही आगे की प्रक्रिया शुरू होगी।
जानिए नियुक्ति का पूरा फॉर्मूला
सरकार ने एल्डरमैन नियुक्ति के लिए एक तय फॉर्मूला बनाया है। इसके तहत 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले चार नगरीय निकायों में 12-12 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। वहीं 10 लाख से कम आबादी वाले 12 नगरीय निकायों में 8-8 एल्डरमैन बनाए जाएंगे।
इसी तरह नगर पालिकाओं में हर जगह 6-6 एल्डरमैन नियुक्त होंगे। नगर परिषदों के लिए यह संख्या 4-4 तय की गई है। इस फॉर्मूले से साफ है कि बड़े शहरों को ज्यादा एल्डरमैन मिलेंगे और छोटी निकायों को कम।
इस पूरे मामले से यह भी साफ है कि भाजपा संगठन में जिले स्तर के नेताओं को संतुष्ट करने की कोशिश कर रही है। आने वाले निकाय चुनाव से पहले यह नियुक्तियां पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही हैं।
हालांकि पुरानी नियुक्तियों में हुई देरी यह सवाल भी उठाती है कि प्रशासनिक प्रक्रिया कितनी सुस्त है। अब देखना यह होगा कि नई 1080 नियुक्तियां कितनी तेजी से अमल में आती हैं।
FAQ
- मध्य प्रदेश में कितने एल्डरमैन नियुक्त किए जा रहे हैं?
राज्य सरकार 183 नगरीय निकायों में 1080 एल्डरमैन नियुक्त करने जा रही है। इनमें 13 नगर निगम, 56 नगर पालिकाएं और 114 नगर पंचायतें शामिल हैं। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने इन सभी नामों को मंजूरी दे दी है। - एल्डरमैन का कार्यकाल कितने समय का होगा?
नई नियुक्त होने वाले एल्डरमैन को सिर्फ एक साल का कार्यकाल मिलेगा। इसका कारण यह है कि जुलाई 2027 में मध्य प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव होने तय हैं। चुनाव के बाद यह व्यवस्था खत्म हो जाएगी।
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