MP में हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों की नौकरी पर संकट, जानें क्या है कारण

Anjali Dwivedi | Jan 20, 2026, 13:51 IST
outsourced-employees-job-crisis
एमपी बिजली विभाग के 12 हजार आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए 31 मार्च तक का वक्त है। टेंडर प्रक्रिया में देरी के कारण अब कर्मचारियों के भविष्य पर सवाल उठने लगे हैं। ऊर्जा विभाग की तरफ से अब तक नए आदेश जारी नहीं किए गए हैं।

News In Short

  • मप्र पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (MPPKVVCL) के आउटसोर्स एजेंसियों का टेंडर 31 मार्च को समाप्त हो रहा है।
  • नई टेंडर प्रक्रिया शुरू न होने से 12 हजार कर्मचारियों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है।
  • ऊर्जा विभाग पिछले 18 महीनों से संयुक्त टेंडर प्रणाली के डॉक्यूमेंट पूरे नहीं कर पाया है।
  • आमतौर पर 2 महीने पहले नई टेंडर प्रक्रिया शुरू हो जानी चाहिए थी, लेकिन इस बार ये अटक गई है।
  • विभाग का कहना है कि वे ऊपर से आदेश मिलने का इंतजार कर रहे हैं, उसके बाद ही आगे की कार्रवाई हो पाएगी।

News In Detail

MP News: मध्य प्रदेश बिजली विभाग के हजारों आउटसोर्स कर्मचारियों पर संकट आ गया है। पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के 12 हजार आउटसोर्स कर्मचारी अब काफी परेशान हैं।



उनके भविष्य को लेकर इस वक्त अनिश्चितता का माहौल है। आने वाला वक्त इन कर्मचारियों के लिए बड़ी चुनौती लेकर आ सकता है।




कर्मचारियों के बीच डर का माहौल

बिजली विभाग में आउटसोर्स पर काम करने वाले इन कर्मचारियों के लिए 31 मार्च की तारीख बहुत अहम है। दरअसल, जो एजेंसियां अभी काम कर रही हैं, उनका टेंडर 31 मार्च को खत्म हो रहा है।



नियम के मुताबिक, इस तारीख तक नई एजेंसियों का चयन हो जाना चाहिए था, लेकिन अब तक नई टेंडर प्रक्रिया शुरू नहीं हो पाई है। इससे कर्मचारियों के बीच डर है कि क्या 1 अप्रैल से उन्हें काम पर आने का मौका मिलेगा या नहीं।



डाक्यूमेंट्स के फेर में फंसी प्रक्रिया

आमतौर पर ये प्रक्रिया दो महीने पहले शुरू हो जानी चाहिए थी, क्योंकि टेंडर प्रोसेस के कई टेक्निकल स्टेज होते हैं, जिनमें वक्त लगता है। इस बार देरी की बड़ी वजह एक नई संयुक्त टेंडर प्रणाली है, जिस पर विभाग पिछले डेढ़ साल से काम कर रहा है।



नई प्रणाली से अटका है पेंच

ऊर्जा विभाग चाहता है कि प्रदेश की तीनों विद्युत वितरण कंपनियों के लिए एक साथ आउटसोर्सिंग टेंडर निकाले जाएं। इसके लिए जरूरी कागजी काम और नीतिगत बदलावों में हो रही देरी अब कर्मचारियों की रोजी-रोटी पर असर डालने लगी है। बिजली कंपनियों के पास फिलहाल ये साफ नहीं है कि पुरानी एजेंसियों का कार्यकाल बढ़ाया जाए या नई टेंडर जारी की जाए।



ऊर्जा विभाग के ग्रीन सिग्नल का इंतजार

मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी के मानव संसाधन विभाग के प्रमुख, राजीव गुप्ता के मुताबिक, विभाग पूरी तरह से ऊर्जा विभाग के निर्देशों पर निर्भर है। जैसे ही वहां से हरी झंडी मिलेगी, टेंडर प्रक्रिया तुरंत शुरू कर दी जाएगी। हालांकि, समय कम होने के कारण ये काम थोड़ा चुनौतीपूर्ण लग रहा है।



एजेंसी बदलेगी या कर्मचारी?

बिजली विभाग में ये परंपरा रही है कि टेंडर खत्म होने के बाद अक्सर एजेंसियां बदल जाती हैं, लेकिन पुराना स्टाफ उसी पद पर काम करता रहता है। इस बार समस्या ये है कि अगर 31 मार्च तक नई एजेंसी तय नहीं हुई, तो इन 12 हजार कर्मचारियों का कानूनी नियोक्ता कौन होगा? बिना वैध अनुबंध के कर्मचारियों से काम लेना कंपनियों के लिए तकनीकी और कानूनी रूप से मुश्किल हो सकता है। इस तरह से आउटसोर्स कर्मचारी मध्यप्रदेश के लिए एक बड़ा खतरा बन सकते हैं।



आउटसोर्स कर्मचारियों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें....

एमपी आउटसोर्स कर्मचारी संकट से गड़बड़ा जाएगा सरकारी सिस्टम, कर्मचारियों और ऑफिसरों में बढ़ी टेंशन



Tags:
  • MP News
  • एमपी पावर मैनेजमेंट कंपनी
  • बिजली विभाग
  • आउटसोर्स कर्मचारी मध्यप्रदेश
  • आउटसोर्स कर्मचारियों
  • मध्य प्रदेश पूर्व क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी