MP में 1800 नए पदों पर होनी थी प्रोफेसर्स की पोस्टिंग, ढाई साल बाद आया होश! कैबिनेट में जाएगा मामला
मध्यप्रदेश के 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस (Prime Minister College of Excellence ) में नई व्यवस्थाएं तो लागू कर दी गईं। लेकिन जिनके भरोसे छात्र पढ़ाई करते, यानी प्रोफेसर्स उनकी अब तक स्थाई तौर पर पोस्टिंग नहीं हो सकी है। और ये मामला अभी लंबा अटकता दिखाई दे रहा है।
क्यों अटकी 1800 पोस्टिंग ?
उच्च शिक्षा विभाग (Department of Higher Education) ने इन कॉलेजों के लिए फैकल्टी के करीब 1800 नए पद मंजूर किए। मामला वित्त विभाग के पास मंजूरी के लिए भेजा गया। करीब ढाई साल से वित्तीय वजहों से फाइल आगे नहीं बढ़ पाई है। इसका सीधा नुकसान छात्रों को उठाना पड़ रहा है। क्योंकि वित्त विभाग की मंजूरी नहीं थी, तो इन पदों पर नियमित प्रोफेसर्स का न ही ट्रांसफर हो पाया न ही किसी को स्थाई नियुक्ति मिल पाई। आलम ये हुआ कि बजट न होने से गेस्ट फैकल्टी की नियुक्ति भी नहीं हो पा रही है।
वित्त विभाग क्या बोला ?
मामले में जानकारी के लिए द सूत्र ने वित्त विभाग के एसीएस अपर मुख्य सचिव मनीष रस्तोगी से बात की। उनका कहना है कि वित्त विभाग ने उच्च शिक्षा विभाग को कैबिनेट में प्रस्ताव लाने को कहा है। मनीष रस्तोगी का कहना है कि उच्च शिक्षा विभाग अब कैबिनेट में प्रस्ताव लाने की तैयारी कर रहा है। यानी ढाई साल बाद जाकर अब मामला खत्म होता दिखाई दे रहा है। लेकिन कैबिनेट में प्रस्ताव कब तक आएगा इसकी कोई समय सीमा तय नहीं है। ऐसे में दिसंबर में सेमेस्टर परीक्षाएं शुरु हो सकती हैं और अब तक प्रोफेसर्स की भर्ती न होना वाकई हैरान करता है।
अभी कैसे चल रहा काम ?
विभागयी प्रक्रियाओं में फंसी 1800 प्रोफेसर्स की पोस्टिंग के बीच, रेगुलर फैकल्टी का डिप्लॉयमेंट बढ़ाया जा रहा है। यानी सारा काम वैकल्पिक व्यवस्थाओं के सहारे चल रहा है। दावा किया जा रहा है कि उच्च शिक्षा विभाग ने पीएम एक्सीलेंस कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर, एसोसिएट प्रोफेसर और प्रोफेसर के पदों पर इंटरव्यू भी कर लिए थे। सारी सिलेक्शन प्रोसेस पूरी होने के बाद भी स्थाई पोस्टिंग का इंतजार है। एक तरफ चुने हुए उम्मीदवार अपनी पोस्टिंग का इंतजार कर रहे हैं। तो दूसरी तरफ छात्र कॉलेज में रेगुलर फैकल्टी का इंतजार कर रहे हैं।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत बने कॉलेज
बता दें कि मध्यप्रदेश में बने 55 प्रधानमंत्री कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (National Education Policy ) के तहत बनाए गए हैं। मध्यप्रदेश सरकार ने जिलों से एक एक सरकारी कॉलेज को पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस में अपग्रेड किया था। दावा था कि इन कॉलेजों में छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, फिनटेक और लॉजिस्टिक्स जैसे विषय पढ़ाए जाएंगे। पूरे देश में ऐसे कॉलेज शुरु करने वाला मध्यप्रदेश पहला राज्य है। लेकिन इन कॉलेजों की सरकार की मंशा पर सवाल खड़े कर रही है।
ढाई साल में वहां प्रोफेसर्स की नियुक्ति ही नहीं
कोई भी कॉलेज कितना उन्नत है, ये उसकी बिल्डिंग से ज्यादा इस बात पर निर्भर करता है कि वहां पढ़ाई कैसी होती है ? फैकल्टी मौजूद है या नहीं ? छात्र कुछ सीख रहे हैं या नहीं ? लेकिन देश में पीएम कॉलेज ऑफ एक्सीलेंस खोलने वाला मध्यप्रदेश ढाई साल में वहां प्रोफेसर्स की नियुक्ति ही नहीं कर पाया है।