घोषणा से पहले नाम लीक ! एमपी में प्राधिकरण अध्यक्ष बनने वालों ने खुद खोल दी लिस्ट, संगठन पर बढ़ा दबाव

Ramanand Tiwari | Apr 25, 2026, 22:35 IST
Photograph: (the sootr)
मध्य प्रदेश में विकास प्राधिकरण अध्यक्ष की नियुक्तियां लगभग तय हो चुकी हैं, लेकिन नाम लीक होने से संगठन पर दबाव बढ़ा है। ग्वालियर, भोपाल, इंदौर जैसे शहरों में नियुक्तियां अटकी हैं।

मध्य प्रदेश में विकास प्राधिकरणों की बहुप्रतीक्षित नियुक्तियों को लेकर दिलचस्प मोड़ आ गया है। जिन नेताओं को अध्यक्ष बनना है, उन्हीं ने अपने नाम पहले ही ‘लीक’ कर दिए। बताया जा रहा है कि प्रदेश भाजपा संगठन ने दावेदारों से बातचीत कर सहमति बनाई, लेकिन इसके बाद वही नाम बाहर आने लगे। अब स्थिति ये है कि लिस्ट लगभग तैयार मानी जा रही है, बस औपचारिक घोषणा बाकी है। लेकिन इस लीक ने संगठन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।



क्या है पूरा मामला?

लंबे समय से अटकी प्राधिकरण नियुक्तियों पर आखिरकार सहमति बनती दिख रही है। संगठन स्तर पर दिग्गज नेताओं और दावेदारों के बीच कई दौर की बातचीत हुई। इन बैठकों में नामों पर सहमति बनने के संकेत मिले, लेकिन आधिकारिक घोषणा से पहले ही नाम बाहर आने लगे। सूत्रों का दावा है कि ये नाम खुद दावेदारों ने अपने-अपने स्तर पर ‘सेट’ कर लीक किए। अब संगठन के सामने चुनौती है कि जिन नामों पर मुहर लगानी है, वही पहले से चर्चा में आ चुके हैं।



क्यों बढ़ा संगठन पर दबाव?

पहले तक सिर्फ कयासों की राजनीति चल रही थी, जिससे संगठन को स्पेस मिलता था। लेकिन जैसे ही नाम सामने आए, खेमेबाजी खुलकर सामने आ गई। हर दिग्गज नेता अब अपने समर्थक के नाम पर दबाव बनाने में जुट गया है। इससे जो मामला सुलझता दिख रहा था, वही अब कुछ जगहों पर उलझने लगा है।



किन शहरों में नाम लगभग तय?

सूत्रों के मुताबिक कई प्राधिकरणों के लिए नाम फाइनल माने जा रहे हैं। हालांकि ग्वालियर, भोपाल और इंदौर जैसे बड़े और संवेदनशील प्राधिकरणों को लेकर अभी भी मंथन जारी है। संगठन कोशिश कर रहा है कि सामाजिक, क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन एक साथ साधा जाए।



संभावित नाम (चर्चा में)

  • देवास: बहादुर सिंह मुकाती,
  • जबलपुर: संदीप जैन
  • ग्वालियर: मधुसूदन भदौरिया,
  • उज्जैन: रवि सोलंकी,
  • रतलाम: मनोज पोरवाल,
  • कटनी: शशांक श्रीवास्तव,
  • ओरछा: अखिलेश अयाची,
  • विंध्य: पंचूलाल प्रजापति,
  • ग्वालियर (उपाध्यक्ष): सुधीर गुप्ता,वेदप्रकाश शिवहरे

क्या सिर्फ अध्यक्ष ही नहीं, और भी नियुक्तियां?

कुछ प्राधिकरणों में उपाध्यक्ष पद भी भरे जा सकते हैं। निगम-मंडलों में भी समानांतर नियुक्तियां संभव



  • नागरिक आपूर्ति निगम: केपी यादव
  • अपैक्स बैंक: महेंद्र सिंह यादव
  • वेयरहाउसिंग कॉर्पोरेशन: संजय नगाइच

ग्वालियर,भोपाल-इंदौर पर क्यों अटका मामला?

ग्वालियर,भोपाल और इंदौर जैसे बड़े प्राधिकरणों को लेकर मामला सिर्फ नियुक्ति का नहीं, बल्कि पावर बैलेंस का है।


यही वजह है कि इन नामों पर अंतिम फैसला शीर्ष नेतृत्व के स्तर पर अटका हुआ है। संभावना है कि इन तीनों पर सहमति बनते ही पूरी लिस्ट एक साथ जारी की जाए।



महिला और बाल आयोग भी अटके

राज्य महिला आयोग और बाल संरक्षण आयोग के नाम भी लगभग तय बताए जा रहे थे।



महिला आयोग: रेखा यादव



बाल संरक्षण आयोग: निवेदिता शर्मा लेकिन इनकी नियुक्तियों के आदेश अब तक जारी नहीं हो सके हैं, जिससे सवाल और बढ़ गए हैं।



आखिर कब आएगी लिस्ट?

  • स्थिति साफ है—नाम तय हैं, लेकिन हालात उलझे हुए हैं।
  • जहां सहमति पूरी हो चुकी है, वहां जल्द घोषणा हो सकती है।
  • लेकिन जहां खेमेबाजी हावी है, वहां देरी तय मानी जा रही है।

यानी लिस्ट कभी भी आ सकती है, लेकिन राजनीति का ‘प्रेशर’ इसकी टाइमिंग तय करेगा।



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