एमपी में अब बिजली होगी स्टोर! बैट्री और पम्प्ड एनर्जी से मिलेगी नई ऊर्जा ताकत

Sandeep Kumar | Aug 08, 2026, 16:49 IST
एमपी में अब बिजली होगी स्टोर
मध्य प्रदेश में बिजली भंडारण को लेकर बड़ा बदलाव होने जा रहा है। नियामक आयोग ने बैटरी स्टोरेज तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए नियम बदले हैं। अब सालाना स्टोर बिजली का 85% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से लेना अनिवार्य होगा।

समझें क्या है पूरा मामला

  • एमपी में बिजली भंडारण नियमों में बदलाव हुआ।
  • बैटरी स्टोरेज तकनीक को बढ़ावा मिलेगा।
  • 85% स्टोर बिजली नवीकरणीय स्रोतों से होगी।
  • सौर और पवन ऊर्जा का उपयोग बढ़ेगा।
  • पीक डिमांड में बिजली उपलब्ध कराई जाएगी।

नए नियम से क्या बदलेगा

मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग ने नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS – Battery Energy Storage System) और पम्प्ड स्टोरेज प्लांट (PSP – Pumped Storage Plant) से जुड़े नियमों में संशोधन किया है।



यह बदलाव मध्य प्रदेश विद्युत नियामक आयोग के 2021 विनियम में किया गया है। नए प्रावधान के तहत एनर्जी स्टोरेज सिस्टम में जमा होने वाली सालाना ऊर्जा का कम से कम 85% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आना जरूरी होगा। यह सीमा सभी संबंधित एजेंसियों पर लागू होगी।



पीक डिमांड में मिलेगी राहत

नए नियम का मुख्य मकसद सौर और पवन ऊर्जा को जरूरत के समय उपलब्ध कराना है। दिन में बनने वाली अतिरिक्त सौर बिजली को अब बैटरी या अन्य स्टोरेज सिस्टम में जमा किया जा सकेगा।



मांग बढ़ने पर इस स्टोर बिजली का इस्तेमाल किया जाएगा। इससे पीक डिमांड के समय बिजली आपूर्ति संतुलित रहेगी। साथ ही बिजली ग्रिड की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।



RPO लक्ष्य पूरा करने में मिलेगी मदद

नवीकरणीय स्रोतों से स्टोर की गई बिजली को रिन्यूएबल परचेज ऑब्लिगेशन (RPO – Renewable Purchase Obligation) की पूर्ति में भी गिना जाएगा। यह मान्यता एक तय सीमा तक ही दी जाएगी।



इससे बिजली वितरण कंपनियों और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं को फायदा होगा। वे अपने नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य आसानी से पूरे कर सकेंगी। साथ ही ऊर्जा भंडारण अपनाने का रास्ता भी आसान होगा।



तकनीक की समय-समय पर होगी समीक्षा

आयोग के इस संशोधन से प्रदेश में BESS और पम्प्ड स्टोरेज तकनीकों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। तकनीक की लागत में बदलाव और व्यावसायिक इस्तेमाल के आधार पर नियमों की समीक्षा भी होती रहेगी।



इस पूरी व्यवस्था से मध्य प्रदेश में नवीकरणीय ऊर्जा पर निर्भरता बढ़ेगी। सोलर और विंड एनर्जी को ग्रिड में बेहतर तरीके से जोड़ने में यह कदम अहम साबित हो सकता है।



FAQ

  1. एनर्जी स्टोरेज का नियम किसके लिए लागू है?
    यह नियम मध्य प्रदेश में एनर्जी स्टोरेज सिस्टम इस्तेमाल करने वाली एजेंसियों पर लागू होगा। इसके तहत बिजली भंडारण के नए मानक तय किए गए हैं।
  2. 85% नियम का मतलब क्या है?
    स्टोर की गई सालाना बिजली का कम से कम 85% हिस्सा नवीकरणीय स्रोतों से आना जरूरी होगा। यह सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए है।

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