सिंहस्थ 2028 से पहले एमपी में बड़ा कदम, भोपाल में बनेगा कमांडो ट्रेनिंग सेंटर

Kaushiki | Jul 16, 2026, 15:00 IST
mp bhopal counter terrorism training center
एमपी 2028 में सिंहस्थ का आयोजन करने जा रहा है। इसी को देखते हुए सीएम डॉ. मोहन यादव के नेतृत्व में सिंहस्थ की तैयारियां जोरों पर है। सिंहस्थ से पहले सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए आतंकवादरोधी दस्ता बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

Madhya Pradesh Anti-Terrorism Squad: 2028 मध्यप्रदेश के लिए बहुत खास होने वाला है। बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन में सिंहस्थ का आयोजन होने वाला है। इसी को ध्यान में रखते हुए मप्र सरकार राज्य में आतंकवाद-रोधी क्षमता को एक नया आयाम पर ले जाने वाली है।



इसी कड़ी में एमपी की राजधानी भोपाल के तुमड़ा क्षेत्र में काउंटर टेररिज्म ट्रेनिंग सेंटर बनने जा रहा है। इसको लेकर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने पुलिस मुख्यालय में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। साथ ही अधिकारियों को तय-सीमा के अंदर काम करने के निर्देश दिए।



सेंटर की ये होगी खासियत

आतंकवादरोधी दस्ते (Counter-terrorism capability) को लेकर PHQ ने केंद्र की डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) बनाकर शासन को सौंप दी है। यह केंद्र राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के मानेसर के प्रशिक्षण मॉर्डल के आधार पर सिंहस्थ से पहले बनाने की तैयारी है।



भोपाल के तुमड़ा क्षेत्र में काउंटर टेररिज्म ट्रेनिंग सेंटर करीब 200 करोड़ की लागत में बनेगा। अगर हम इसकी खूबी की बात करें तो इस विशेष ट्रेनिंग यूनिट में एटीएस, एसटीएफ एसएएफ, क्यूआरटी और जिला पुलिस बल के स्पेशलाइज्ड टीम को ट्रेनिंग देगा। एनएसजी से एमपी पुलिस के 1164 कर्मी ने प्रशिक्षिण लिया है। इस सेंटर के बाद बड़ी संख्या में टीम तैयार होगी।



एक साथ मिलेगा मॉडर्न ट्रेनिंग

वहीं अगर हम इस प्रोपोसड सेंटर की बात करें तो एमपी पुलिस की कई विशेष इकाइयों को एक साथ ट्रेनिंग देगा। इन यूनिटों में काउंटर टेररिज्म (एटीएस), विशेष कार्य बल (एसटीएफ), विशेष सशस्त्र बल (एसएएफ) को ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें मुख्य तौर पर मॉडर्न हथियारों के ऑपरेशन, बंधक मुक्ति अभियान, क्लोज प्रार्टर बैटल जैसे विषयों का ट्रेनिंग दिया जाएगा।



इसलिए जरूरत पड़ी इस सेंटर की

कहते हैं आवश्यकता आविष्कार की जननी है। एमपी में बीते कुछ समय से ऐसी स्थिति बनी जिसने ये बता दिया कि केवल पुलिस प्रदेश की सुरक्षा के लिए पर्याप्त नहीं है। इसका कारण हिज्य-उत्त-तहरीर (एचयूटी), जमात-उल-मुजाहिदीन बांग्लादश (जेएमबी) पीएफआई जैसे संगठनों का काम रहा है।



इसने ये बता दिया है कि प्रदेश में केवल पुलिस सुरक्षा पर्याप्त (एंटी टेररिज्म स्क्वॉड) नहीं है। इसको ध्यान में रखकर राज्य ने अपनी सुरक्षा रणनीति में परिवर्तन किया है। फिलहाल सूत्रों की मानें तो ये प्रशिक्षित कमांडो संवेदनशील जिलों में तैनात होंगे। जिससे जरूरत पड़ने पर स्थिति पर नियंत्रण किया जा सके।



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