भाजपा प्रदेश कार्यसमिति की सूची तैयार, छोटी होगी टीम, हर तीसरी सदस्य महिला रह सकती है
BHOPAL. मध्यप्रदेश भाजपा में नई नियुक्तियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की नई टीम का खाका तैयार हो चुका है। इस बार की कार्यसमिति न केवल आकार में छोटी और कसी हुई होगी, बल्कि इसमें नारी शक्ति का दबदबा भी साफ दिखाई देगा। पार्टी ने तय किया है कि टीम में हर तीसरा सदस्य महिला होगी, जो संगठन में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का सीधा संकेत है।
नवरात्रि में हो सकता है नई टीम का ऐलान
भाजपा के गलियारों से खबर है कि नई प्रदेश कार्यसमिति की सूची बनकर तैयार है। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने संकेत दिए हैं कि इसी महीने चैत्र नवरात्रि के शुभ अवसर पर नामों की आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
जानकारी के अनुसार, पार्टी इस बार स्मार्ट और प्रभावी टीम के फॉर्मूले पर काम कर रही है। जहां पिछली कमेटियां काफी जंबो (बड़ी) हुआ करती थीं, वहीं इस बार इसे छोटा रखने का फैसला लिया गया है।
हर तीसरी सदस्य होगी महिला
इस नई कार्यसमिति में कुल 106 सदस्यों को जगह मिलने का अनुमान है। महिला सशक्तिकरण के एजेंडे को आगे बढ़ाते हुए इसमें 35 महिला सदस्यों को शामिल किया जाएगा।
खास बात यह है कि इन 35 महिलाओं में से 9 सदस्य अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) वर्ग से होंगी। 26 प्रदेश पदाधिकारियों के अलावा, पार्टी संविधान का पालन करते हुए 26 विशेष आमंत्रित सदस्यों की नियुक्ति भी संभव है। इससे कुल संख्या 160 के आसपास पहुंच सकती है।
मालवा और महाकौशल का पलड़ा रह सकता है भारी
क्षेत्रीय संतुलन साधने के लिए भाजपा ने सूक्ष्म स्तर पर शोध (रिसर्च) किया है। चर्चा है कि मालवा-निमाड़ और महाकौशल क्षेत्र से इस बार अधिक चेहरे शामिल किए जा सकते हैं। इसका कारण इन क्षेत्रों में संगठन की बढ़ती सक्रियता को माना जा रहा है।
हालांकि, विंध्य, बुंदेलखंड और ग्वालियर-चंबल संभागों के अनुभवी नेताओं और नई पीढ़ी के बीच तालमेल बिठाने की भी पूरी कोशिश की गई है।
डिजिटल और सक्रिय कार्यकर्ताओं को होगा फायदा
पार्टी इस बार केवल राजनीतिक रसूख नहीं, बल्कि परफॉर्मेंस देख रही है। सूत्रों की मानें तो डिजिटल मीडिया और मीडिया मैनेजमेंट में सक्रिय रहे कार्यकर्ताओं को इस बार इनाम मिल सकता है।
अनुभवी दिग्गजों के साथ-साथ युवा मोर्चा और जिला स्तर पर जमीन से जुड़े नेताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। इसका मुख्य उद्देश्य आगामी संगठनात्मक कार्यक्रमों को नई ऊर्जा के साथ पूरा करना है।
नियुक्तियों में देरी की यह है बड़ी वजह
जानकारी के अनुसार, कार्यसमिति के गठन में देरी के पीछे कई कारण रहे हैं। इनमें निगम, मंडल और प्रकोष्ठों में होने वाली नियुक्तियां प्रमुख थीं। इसके अलावा, दिल्ली से केंद्रीय नेतृत्व की हरी झंडी और स्थानीय स्तर पर जातिगत समीकरणों को साधना भी एक बड़ी चुनौती थी।
आगामी अप्रैल महीने में नई टीम की पहली बैठक प्रस्तावित है। वहीं, 25 सदस्यीय स्थायी आमंत्रित सदस्यों की सूची में भी बदलाव होंगे। प्रभात झा और भगवत शरण जैसे वरिष्ठ नेताओं के निधन के बाद रिक्त हुए स्थानों पर नए दिग्गजों की एंट्री होगी।
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