एमपी सरकार लाएगी विधानसभा का स्पेशल सत्र, कांग्रेस को करेगी बेनकाब!
महिला आरक्षण बिल पर लोकसभा में बने गतिरोध के बाद अब मध्य प्रदेश में सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने साफ रविवार 19 अप्रैल को हुई प्रेस कॉन्फ्रेंसमें कहा है कि, इस मुद्दे पर एक दिन का विशेष विधानसभा सत्र बुलाया जाएगा।
साथ ही इसे जनता के बीच बड़े स्तर पर उठाया जाएगा। यानी मामला अब सिर्फ सदन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों और जनसभाओं तक जाएगा जहां कांग्रेस को सीधे घेरा जाएगा।
सत्र भी सड़क भी, दोहरी रणनीति पर BJP
प्रेस कॉन्फ्रेंस में CM मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष ने साफ संकेत दिए, कि पार्टी अब इस मुद्दे को राजनीतिक और जनआंदोलन दोनों रूप में भुनाने की तैयारी में है।
एक तरफ विधानसभा का एक दिन का विशेष सत्र बुलाकर मुद्दे को आधिकारिक मंच पर उठाया जाएगा। वहीं दूसरी तरफ इसे पब्लिक कैंपेन में बदलने की रणनीति बनाई गई है।
कांग्रेस की वजह से अटका बिल
पूरे घटनाक्रम को BJP ने एक अलग एंगल देने की कोशिश की है। पार्टी का फोकस इस बात पर है कि महिला आरक्षण बिल पास न होने के पीछे कांग्रेस की भूमिका को जिम्मेदार ठहराया जाए।
इसी लाइन पर आगे बढ़ते हुए इसे जनता के बीच ऐसे पेश किया जाएगा कि महिलाओं के अधिकारों में देरी की वजह विपक्ष बना है। CM मोहन यादव ने बयान में कहा कि संसद में जो हुआ वह लोकतंत्र के लिए दुखद और निंदनीय है।
सीएम ने यह भी साफ किया कि महिलाओं को उनका अधिकार दिलाने के लिए सरकार पीछे नहीं हटेगी। इस मुद्दे को जनता की अदालत में ले जाया जाएगा। आने वाले दिनों में पूरे प्रदेश में आंदोलन तेज होगा
हालांकि बयान का सीधा असर राजनीतिक संदेश से ज्यादा रणनीतिक प्लानिंग पर नजर आया।
अब हर जिले में होगा प्रदर्शन और प्रचार
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने बताया कि BJP ने इस मुद्दे को लेकर बड़ा ग्राउंड प्लान तैयार किया है।
मुख्य प्लान इस तरह है
- सभी संभाग और जिलों में रैलियां और प्रदर्शन
- पदयात्रा और जनसभाओं का आयोजन
- पंचायत और नगरीय निकायों में प्रस्ताव पारित
- लगातार प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया कैंपेन
- सोमवार से आक्रोश रैली की शुरुआत
इसका मतलब साफ है कि मुद्दे को चुनावी एजेंडा बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है।
महिला हित बनाम राजनीतिक जंग
CM ने कांग्रेस पर महिलाओं के खिलाफ रवैया रखने का आरोप लगाया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम में राजनीतिक टकराव ज्यादा स्पष्ट दिख रहा है।
एक तरफ BJP इसे महिला सम्मान और अधिकार का मुद्दा बना रही है। वहीं दूसरी तरफ यह आगामी चुनावों के लिए नैरेटिव सेट करने की कोशिश भी नजर आ रही है।
2029 तक का तर्क भी सामने आया
CM ने यह भी कहा कि 2023 में ही स्पष्ट कर दिया गया था कि महिला आरक्षण का पूरा लाभ 2029 तक मिलेगा, क्योंकि इसके लिए नई जनगणना जरूरी है। फिलहाल 2011 की जनगणना के आधार पर ही काम चलाना मजबूरी बताया ।
महिला आरक्षण का मुद्दा अब सिर्फ कानून तक सीमित नहीं रहा है। मध्य प्रदेश में यह सदन से लेकर सड़क तक की राजनीति का केंद्र बन चुका है।
एक दिन का विधानसभा सत्र भले औपचारिक हो, लेकिन असली लड़ाई अब जनता के बीच नैरेटिव बनाने की है। जहां भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने नजर आएंगे।
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